पुणे में एक रसूख़दार पिता के नशे में धुत नाबालिग बेटे ने पोर्शे कार से दो निर्दोष लोगों एक युवक और एक युवती, दोनों इंजीनियर को रौं&द कर मा?र डाला था।मामला सामने आते ही अदालत ने पहले 300 शब्दों का निबंध लिखवाकर आरोपी को ज़मानत दे दी। जब इस फैसले पर देशभर में अदालत की किरकिरी हुई, तब ज़मानत रद्द कर उसे बाल सुधार गृह भेजा गया था। अब एक बार फिर अदालत ने यह कहते हुए ज़मानत दे दी कि आरोपी पिछले 18 महीनों से हिरासत में है इसलिए उसे रिहा किया जा रहा है। जहाँ एक तरफ़ उर्दू नाम बाले उमर ख़ालिद, शरजील इमाम या ख़ालिद सैफी जैसे बरसों से जेल में बिना जमानत के बंद है तो हैं बही दूसरी तरफ़ निबंध लिख कर जमानत मिल जा रहा है । अब ऐसे फ़ैसले होंगे तो सवाल उठना लाज़मी है #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #📢 ताजा खबर 📰 #🆕 ताजा अपडेट #🔴 क्राइम अपडेट #⚖️UGC के नए नियमों पर SC की रोक