अगर ज़मीन सरकार की थी और घर तोड़ना ज़रूरी था, तो सवाल सिर्फ़ इतना है कि वर्षों तक लोगों को बसने किसने दिया? जिन लोगों ने प्लॉट बेचे, जिन्होंने बिजली-पानी के कनेक्शन दिए, और जिन्होंने यहाँ से वोट लिए, क्या उनकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं बनती? न्याय तभी #shalimarbagh पूरा होगा जब कार्रवाई सिर्फ़ घरों पर नहीं, बल्कि उन सभी पर होगी जिनकी वजह से यह स्थिति पैदा हुई।
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