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Suman Kumari

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लू पीड़ितों से मिलने अस्पताल पहुंचे नीतीश कुमार, पहले करने वाले थे हवाई सर्वे, बिहार में प्रचंड गर्मी के कारण लू और दिमागी बुखार की दोहरी मार पड़ी है। यह आपदा बनकर लोगों पर कहर बरपा रहा है जिससे मरनेवालों की संख्या सैकड़ों में पहुंच गई है। इन सबके बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लू पीड़ितों से मिलने गया के अनुग्रह नारायण मेमोरियल मेडिकल कॉलेज पहुंचे। इससे पहले नीतीश की नवादा और गया का हवाई सर्वे करने की योजना थी। दिमागी बुखार का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। शीर्ष अदालत सोमवार को इस मामले पर सुनवाई करने के लिए सहमती जता चुकी है। वहीं इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और बिहार सरकार से रिपोर्ट दाखिल करने को लेकर नोटिस जारी किया है।
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🗞 बिहार: चमकी बुखार क कहर

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दिमागी बुखार: बीमार अस्पतालों का मुजफ्फरपुर, सभी 103 पीएचसी रेटिंग में 'जीरो', बिहार के मुजफ्फरपुर में 117 बच्चों की मौत होने के बाद केंद्र और राज्य सरकार की नींद तो खुली, लेकिन अब भी प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से केवल इस साल नहीं, बल्कि पहले भी मौतें हुई हैं। दरअसल, मासूमों की मौत का गवाह बन रहा मुजफ्फरपुर जिला स्वास्थ्य सुविधाओं और आधारभूत संरचनाओं के मामले में फिसड्डी रहा है। आधिकारिक आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं।  स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) पर स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं जिले के सभी 103 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और एकमात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खस्ताहाल हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय की नजर में एक भी पीएचसी फिट नहीं हैं और सभी रेटिंग के मामले में शून्य हैं। मालूम हो कि ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे एईएस का शिकार हो रहे हैं। 103 में से 98 पीएचसी मूल्यांकन के भी काबिल नहीं मुजफ्फरपुर जिले के 103 में से 98 पीएचसी, स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली के मूल्यांकन के लायक भी नहीं हैं। इस मूल्यांकन के लिए जो न्यूनतम आधारभूत सुविधाएं होनी चाहिए, इन 98 पीएचसी में वे हैं ही नहीं। ऐसे में साल 2018-19 के लिए इन सारे पीएचसी का मूल्यांकन नहीं किया जा सका। बाकी पांच पीएचसी, जिनका मूल्यांकन किया गया, उनमें सभी की रेटिंग शून्य रही। मालूम हो कि रेटिंग में बुनियादी ढांचे के लिए तीन और सेवाओं के लिए दो अंक होते हैं। इन पांच पीएचसी में से प्रत्येक पीएचसी, दोनों तरह की रेटिंग में पूरी तरह फेल साबित हुआ।
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🗞 बिहार: चमकी बुखार क कहर

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🗞 बिहार: चमकी बुखार क कहर

बच्चों में घातक मेटाबॉलिक बीमारी वैसे लीची हमारे शरीर के लिए लाभप्रद भी है क्योंकि इसमें मौजूद विटमिन, लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और पाचन-प्रक्रिया के लिए जरूरी है। इसमें मौजूद फोलेट हमारे शरीर में कॉलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद करता है। यह हमारे तंत्रिका तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद पहुंचाता है। लीची में कार्बोहाइड्रेट, विटमिन सी, विटमिन ए और बी कॉम्प्लेक्स, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। एंडोसल्फान का प्रयोग भी मौत की बन रही वजह बांग्लादेशी वैज्ञानिकों ने भी लीची खाने से मरने वाले बच्चों पर एक शोध किया है और उसके अनुसार लीची की खेती में प्रतिबंधित एंडोसल्फान समेत अन्य कीटनाशकों का प्रयोग होता है जो स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत खतरनाक है। इस इलाके में गरीबी बहुत ज्यादा है। बच्चे बागानों से लीचियों को उठाकर उसे धोए बगैर ही दांतों से छीलकर खा लेते हैं जिसके चलते खतरनाक रसायन उनके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। बिहार में लंबे समय तक पत्रकारिता कर चुके नरेंद्र नाथ मिश्रा @iamnarendranath ने एक ट्वीट करके बताया कि 'गांवों में किसी मरीज के घर जाएं और उनके घर से सबसे करीब स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें तो पता चल जाएगा कि आखिर में असल बीमारी कहां है। जो बच्चे इस बीमारी से ग्रस्त हैं, उनकी मेडिकल रिपोर्ट देखेंगे तो पता चलेगा कि अगर उन्हें इंसेफेलाइटिस नहीं होगा तो कोई दूसरी बीमारी जरूर होगी।'
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हम ई पोस्ट क विरोध कर रहल बानी काँहे की इ पोस्ट। ..
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हम रिपोर्ट करे के चाहत तानी काँहे की