*🌞सुप्रभातम🌞*
*जय महेश*
*🇮🇳भारत माता की जय🇮🇳*
दिनांक १५ फरवरी २०२६
दिन रविवार
विक्रमी संवत २०८२
शक संवत १९४७
सूर्य उत्तरायण
दक्षिणगोल
बसन्त ऋतु
फाल्गुन मास
कृष्ण पक्ष
त्रियोदशी तिथि १७:०६ तक फिर चतुर्दशी तिथि
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र १९:४९ तक फिर श्रवण नक्षत्र
व्यतिपात योग २६:४७ तक फिर वरियान योग
मकर राशि में चन्द्रमा
*महाशिवरात्रि व्रत सबका*
*आज का सुविचार*
*क्रोध हवा का वो झोका है*
*जो बुद्धि के दीपक को बुझा देता है।*
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*वंश की उन्नति के लिए महाशिवरात्रि साधना 15 FEB. (पीढ़ियों के भाग्य, संस्कार और समृद्धि का दिव्य मार्ग*
*MAHASHIVRATRI SADHNA BENETITS FOR COMPLETE FAMILY*
शिवरात्रि केवल उपवास या पूजा नहीं, बल्कि वंश की कर्म-शुद्धि, ग्रह-संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति का सबसे शक्तिशाली समय है। ज्योतिष के अनुसार, इस रात्रि की साधना का प्रभाव तीन पीढ़ियों तक पड़ता है।
1 *ज्योतिष में शिवरात्रि का विशेष महत्व*
*शिवरात्रि की रात:*
चंद्रमा स्थिर होता है → मन शांत,
ग्रह ऊर्जा संतुलित होती है,
कर्म-दोष कमजोर पड़ते हैं,
साधना का फल कई गुना बढ़ता है,
इसी कारण ऋषि-मुनि प्राचीन काल में कैलाश पर्वत क्षेत्र में इस रात तप करते थे।
यह रात “कर्म-रीसेट टाइम” मानी जाती है।
2 *कुंडली में वंश बाधा के मुख्य कारण*
*अगर परिवार में बार-बार रुकावटें आती हों, तो कारण हो सकते हैं:*
कारण कुंडली संकेत पितृ दोष 9वें भाव पर पाप प्रभाव
संतान बाधा
5वां भाव पीड़ित
शनि-राहु दोष संघर्ष बढ़ना
गुरु कमजोरी मार्गदर्शन की कमी
सूर्य पीड़ा वंश ऊर्जा कमजोर
शिवरात्रि साधना इन दोषों को शांत करती है।
3 *शिवरात्रि से वंश को मिलने वाले लाभ*
*शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार:*
*(क)* पूर्वज स्तर पर
• पितृ शांति
• अधूरे कर्म शांत
• वंश पर कृपा
*(ख)* वर्तमान पीढ़ी पर
• आर्थिक स्थिरता
• पारिवारिक शांति
• निर्णय शक्ति
• स्वास्थ्य सुधार
*(ग)* भविष्य पीढ़ी पर
• संतान सौभाग्य
• अच्छे संस्कार
• उच्च सफलता
• आत्मबल
इसलिए इसे “कुल-कल्याण साधना” कहा जाता है।
4 *विशेष उद्देश्य हेतु विशेष शिवरात्रि साधना विधि*
उद्देश्य पूजा धन-समृद्धि, रुद्राभिषेक स्वास्थ्य महामृत्युंजय जप, विवाह शिव-पार्वती पूजा,
वंश उन्नति वंश-कल्याण पूजा,
मानसिक शांति ध्यान साधना,
ग्रह दोष अभिषेक + जप
अवचेतन और DNA स्तर पर शुद्धि होती है।
5 *पीढ़ियों पर साधना का प्रभाव*
पीढ़ी प्रभाव, पूर्वज दोष शांति, वर्तमान समृद्धि,भविष्य उज्ज्वल भाग्य
यही शिव साधना की सबसे बड़ी शक्ति है।
6 *वर्षभर का वंश-संरक्षण नियम*
*अगर आप स्थायी उन्नति चाहते हैं, तो:*
हर सोमवार जल अर्पण,
अमावस्या पर दीपक,
रोज “ॐ नमः शिवाय” 21 बार,
बच्चों को मंत्र सिखाएँ,
इससे वंश कभी कमजोर नहीं होता।
7 *आध्यात्मिक और ज्योतिषीय रहस्य*
*शिव को कहा जाता है:*
“कर्मसंहारक और भाग्यनिर्माता”
जब परिवार शिव से जुड़ता है:
नकारात्मक संस्कार टूटते हैं,
ग्रह अनुकूल होते हैं,
भाग्य रेखा मजबूत होती है,
पीढ़ीगत संघर्ष समाप्त होता है,
यही वंश उन्नति का मूल सूत्र है।
8 *निष्कर्ष (सारांश)*
*शिवरात्रि साधना*
पितृ दोष शांति,
ग्रह दोष निवारण,
संतान सौभाग्य,
आर्थिक स्थिरता,
पीढ़ियों का उत्थान का दिव्य साधन है।
एक व्यक्ति की साधना पूरे वंश का भविष्य बदल सकती है।
*NOTE*
*संक्षेप शुभ मुहूर्त*
*चतुर्दशी तिथि: 15-16 फ़रवरी 2026*
*पूजा का प्रारंभ: शाम 06:11 बजे*
*निसित काल (सबसे शुभ): 12:09 AM – 01:01 AM*
*पूजा समाप्त: सुबह 06:59 बजे*
NOTE:
इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं धार्मिक आस्था, प्रवचनों ,धार्मिक ग्रंथो/ वास्तु एवं ज्योतिष मान्यताओं पर आधारित हैं।
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#🙏प्रातः वंदन #🌞 Good Morning🌞