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#📰 शुक्रवार की ताज़ा ख़बरें #📰 समाचार एवं न्यूज़ पेपर क्लिप #🌐 राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय खबरें नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने के मामले में 10 दिसंबर से अंतिम सुनवाई करने का आदेश दिया। जस्टिस एनवी रमन्ना ने कहा, “केंद्र सरकार इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए 22 नवंबर तक हलफनामा दाखिल करे।” अदालत ने केस से संबंधित वकीलों को सभी तथ्य और दस्तावेज इकठ्ठा करने का निर्देश देने के साथ ही अंतिम सुनवाई की तारीख तय कर दी। 5 जजों की संविधान पीठ कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले के खिलाफ दाखिल हुई याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी। अदालत ने कश्मीर में प्रतिबंधों के मामले में अनुराधा भसीन की याचिका पर भी सुनवाई की। भसीन के वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा, “आप पूरे समुदाय पर अनुच्छेद 19 के तहत उन्हें मिले मौलिक अधिकारों पर पाबंदी नहीं लगा सकते।” सीमा पार आतंकवाद पहले से मौजूद रहा है। कश्मीर के लोग शांतिप्रिय हैं। सिब्बल ने कहा- कश्मीर में अस्पताल तक जाना मुश्किल राज्य में संचार सेवाएं बंद करने के मुद्दे पर बहस के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा- आप मुश्किलें खड़ी करने वालों को रोकिए, लेकिन शांतिप्रिय लोगों के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा- सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाना सही हो सकता है, लेकिन यह सही नहीं होगा कि आप पूरा इंटरनेट ही बंद कर दें। लैंडलाइन टेलीफोन संवाद के लिए जरूरी है। टेलीफोन से कानून-व्यवस्था पर असर नहीं पड़ सकता। आप मुझे किसी से बात करने से कैसे रोक सकते हैं? टेलीफोन मौजूद न हो और अगर कोई मेडिकल इमरजेंसी आ जाए, तो मैं अस्पताल कैसे पहुंच सकूंगा? 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया केंद्र सरकार ने 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया था। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था। इसके बाद पूरे राज्य में टेलीफोन, मोबाइल और इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई थी।
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📰 शुक्रवार की ताज़ा ख़बरें

📰 शुक्रवार की ताज़ा ख़बरें - कश्मीर / अनुच्छेद 370 पर सुप्रीम कोर्ट में 10 दिसंबर से अंतिम सुनवाई , केंद्र को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश - ShareChat
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1 दिन पहले
#📰 शुक्रवार की ताज़ा ख़बरें #📰 समाचार एवं न्यूज़ पेपर क्लिप #🌐 राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय खबरें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर में गुरुवार को कुछ शरारती तत्वों नेस्वामी विवेकानंद की मूर्ति पर अपशब्द लिखकर एक राजनीतिक पार्टी के खिलाफ अपना विरोध जताया था। इस पर जेएनयू के कुलपति एम.जगदीश कुमार ने कहा, ‘‘परिसर में तोड़फोड़ करने वाले विद्यार्थियों की पहचान कर ली गई है। जल्द उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन उन लोगों की भी पहचान करने में जुटा है, जिन्होंने स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की’’ कुलपति कुमार के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय की पहचान और मजबूत करने के लिए परिसर में शांति कायम करना जरूरी है। ये तभी मुमकिन है,जब हम सभी इसे अपनी जिम्मेदारी और कर्तव्य समझें। शिक्षा के केंद्र के रूप में जेएनयू की पहचान बुलंद करने के इस मिशन में हम सबको अपना श्रेष्ठ देना चाहिए।इससे पहले मूर्ति विवाद पर एबीवीपी,एनएसयूआई और लेफ्ट छात्र संगठन के सदस्यआमने-सामने आए थे। भाजपा के राज्यसभा सांसद राकेश कुमार सिन्हा ने आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की थी। 15 दिनों तक छात्रों नेविरोध प्रदर्शन किया जेएनयू में हॉस्टल, मेस समेतअन्य सुविधाओं की फीस बढ़ाने को लेकर छात्रों ने 15 दिनों तक प्रदर्शन किया। हालांकि, कुछ मामलों में फीस बढ़ोतरी का फैसला वापस लेने के बाद भी छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। उनका कहना है कि जब तक पहले जैसा फीस स्ट्रक्चर नहीं हो जाता,तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
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📰 शुक्रवार की ताज़ा ख़बरें

📰 शुक्रवार की ताज़ा ख़बरें - जेएनयू / कुलपति ने कहा - तोड़फोड़ करने वाले छात्रों की पहचान हो गई है , जल्द ही एफआईआर दर्ज की जाएगी ' जेएनयू में स्वामी विवेकानंद की क्षतिग्रस्त मूर्ति । - फाइल फोटो - ShareChat
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1 दिन पहले
#📰 शुक्रवार की ताज़ा ख़बरें #📰 समाचार एवं न्यूज़ पेपर क्लिप #🌐 राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय खबरें नई दिल्ली.आईएनएक्स मीडिया केमनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व वित्त मंत्री पी.चिदंबरम की जमानत याचिका खारिज कर दी। शुक्रवार को जस्टिस सुरेश कैत ने कहा- इसमें कोई शक नहीं है कि जमानत लेना उनका अधिकार है, लेकिन ऐसे मामले में अगर जमानत दीजाती है तो यह बड़े पैमाने पर लोगों के हितों के खिलाफ होगा क्योंकि उन पर गंभीर आरोप हैं। दरअसल, चिदंबरम परआईएनएक्स मीडिया घोटाले में सक्रिय और मुख्य भूमिका निभाने का आरोप है।ईडी और सीबीआई अलग-अलग मामलों में उनके खिलाफ जांच कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने 22 अक्टूबर को उन्हें सीबीआई वाले मामले में जमानत दे दी थी। मगर ईडी केस में जमानत मिलने के बाद हीवे जेल से बाहर आ सकेंगे। इससे पहले सीबीआई ने चिदंबरम को 21 अगस्त को गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह तिहाड़ जेल में बंद हैं। ईडी ने चिदंबरम की जमानत का विरोध किया था कोर्ट ने हाल ही में चिदंबरम की न्यायिक हिरासत 27 नवम्बर तक बढ़ा दी थी। इस पर चिदंबरम के वकील ने कोर्ट से कहा था कि उन पर देश छोड़कर जाने, गवाहों को प्रभावित करने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने जैसे कोई आरोप नहीं हैं। ऐसे में उन्हें नियमित जमानत दी जानी चाहिए। ईडी ने चिदंबरम की जमानत याचिका का विरोध किया था। एजेंसी ने कोर्ट से कहा था कि चिदंबरम को अगर जमानत मिलती है, वे साक्ष्यों को प्रभावित कर सकते हैं।
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📰 शुक्रवार की ताज़ा ख़बरें

📰 शुक्रवार की ताज़ा ख़बरें - आईएनएक्स केस / मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चिदंबरम को जमानत नहीं , कोर्ट ने कहा - पूर्व वित्त मंत्री पर गंभीर आरोप । पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम । ( फाइल फोटो ) । - ShareChat
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1 दिन पहले
#📰 शुक्रवार की ताज़ा ख़बरें #😷 दिल्ली में लौटा ज़हर #📰 समाचार एवं न्यूज़ पेपर क्लिप नई दिल्ली.दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार कोकेंद्र को निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि सरकारदिल्ली में एयर प्यूरीफाइंग टॉवर लगाने का खाका तैयार करे। सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार से भी पूछा है कि उसकी ऑड-ईवन योजना से वायु प्रदूषण में कुछ कमी आई है या नहीं। सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि दिल्ली बुरी तरह से कष्ट उठा रही है। आज(शुक्रवार को) भी एयर क्वालिटी इंडेक्स 600 के आसपास था। आखिर लोग सांस कैसे लेंगे। ऑड-ईवन स्कीम वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने का तरीका नहीं है।इस योजना से वायु प्रदूषण में कुछ कमी आई है या नहीं, ये हमें बताया जाए। ‘वायु प्रदूषण में कारों का सिर्फ 3% योगदान’ केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि प्रदूषण स्तर बढ़ाने में कारों का सिर्फ 3% योगदान है, जबकि सभी वाहनों को मिलाकर प्रदूषण स्तर में 28% की बढ़ोतरी होती है। दिल्ली सरकार की ओर से पैरवी करते हुए मुकुल रोहतगी ने शीर्ष अदालत को बताया कि अगर ऑड-ईवन स्कीम में दी जा रही कुछ छूटें खत्म कर दी जाएं- जैसे टू व्हीलर्स को दी गई छूट, तो प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। हम इसी योजना पर काम कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऑड-ईवन प्रदूषण कम करने का स्थायी हल नहीं हो सकता। खासकर तब जब सीपीसीबी कह चुका है कि वायु प्रदूषण में कारों का सिर्फ 3% योगदान है। कचरा फैलाना, निर्माण के दौरान गिरने वाला कूड़ा और सड़क से उड़ने वाली धूल भी प्रदूषण स्तर बढ़ने का बड़ा कारण है। आज ऑड-ईवन स्कीम का आखिरी दिन दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में शुक्रवार सुबह हवा की गुणवत्ता गंभीर स्तर पर पहुंच गई। ज्यादातर इलाकों मेंएयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 700केऊपर दर्ज हुआ। इसे वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति है। दिल्ली में गुरुवार को एक्यूआई 472 था। दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद के स्कूलों में 14 और 15 नवंबर को छुट्टी घोषित की गई थी। प्रदूषण से निपटने के लिए केजरीवाल सरकार ने 4 नवंबर को ऑड-ईवन फॉर्मूला लागू किया था, आज इसका आखिरी दिन है। मुख्यमंत्री अरविंदकेजरीवाल ने कहा- मौसम विभाग का अनुमान है कि 2 से 3 दिन में प्रदूषण के हालात में सुधार आएगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो हम ऑड-ईवन को 18 नवंबर तक बढ़ा सकते हैं। उधर, शहरी विकास के लिए बनी संसदीय समिति ने प्रदूषण पर चर्चा के लिए आवास मंत्रालय, डीडीए, एनडीएमसी, सीपीडब्ल्यूडी और दिल्ली के पार्षदों की बैठक बुलाई थी। लेकिन एमसीडी के 3 आयुक्त, डीडीए के उपाध्यक्ष, पर्यावरण विभाग के सचिव नहीं पहुंचे। इस वजह से मीटिंग आगे बढ़ा दी गई। समिति ने अनुपस्थितअधिकारियों के जवाब तलब किया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, सुबह दिल्ली के लोधी रोड इलाके में प्रदूषक कण पीएम2.5 और पीएम10 का स्तर 501से ज्यादा है। इसी तरह आईटीओ इलाके में भी पीएम2.5 का स्तर 490दर्ज हुआ। लोधी गार्डन और एम्स के आसपास धुंध और स्मॉग के बीच लोग मॉर्निंग वॉक करते नजर आए। शहर 15 नवंबर (एक्यूआई) 14 नवंबर (एक्यूआई) दिल्ली 712 472 नोएडा 650 488 गाजियाबाद 592 486 गुड़गांव 799 412 फरीदाबाद 554 437 एयर क्वालिटी इंडेक्स के मानक एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) को 0-50 के बीच ‘बेहतर’, 51-100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘सामान्य’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है। वहीं, हवा में पीएम 10 का स्तर 100 और पीएम 2.5 60 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। 400 एक्यूआई में ऑक्सीजन कम हो जाती है दिल्ली स्कूल हेल्थ स्कीम के ईस्ट डिस्ट्रिक्ट इंचार्ज डॉक्टर अनूपनाथ के मुताबिक, वायु प्रदूषण के कारण वरिष्ठ नागरिकों को सबसे ज्यादा दिक्कतें होती हैं। प्रदूषण का जो स्तर है, इसमें ऑक्सीजन की कमी होती है। धीरे-धीरे इंफेक्शन, ब्रॉनकाइटिस की बीमारी बढ़ जाती है। आंख की जलन स्मॉग के कारण बढ़ती है।
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📰 शुक्रवार की ताज़ा ख़बरें

📰 शुक्रवार की ताज़ा ख़बरें - प्रदूषण / सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को निर्देश दिल्ली में एयर प्यूरीफाइंग टॉवर लगाने का खाका तैयार करें m . प्रदूषण कम न कर पाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त एयर क्वालिटी इंडेक्स 600 पहुंच गया है , लोग सांस कैसे ले पा रहे हैं । दिल्ली बुरी तरह कष्ट उठा रही है ऑड - ईवन स्कीम वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने का तरीका नहीं । इससे प्रदूषण में कुछ कमी आई या नहीं , हमें बताएं - ShareChat
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1 दिन पहले
#📰महाराष्ट्र की राजनीति #📰 शुक्रवार की ताज़ा ख़बरें #📰 समाचार एवं न्यूज़ पेपर क्लिप #👊विपक्ष की राजनीति⚡ महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार बनाने के लिए शिवसेना, राकांपा औरकांग्रेस की समन्वय समिति की पहली बैठक में न्यूनतमसाझा कार्यक्रम (सीएमपी) की रूपरेखा तय हो चुकी है। शुक्रवार को शरद पवार ने कहा- सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू, 5 साल पूरे करेंगे। हमने मुलाकात के लिए राज्यपाल से शनिवार दोपहर 3 बजे का वक्त मांगा है। पवार ने कहा- पार्टियां स्थिर सरकार चाहती हैं, जिनका मकसद विकास करना होगा।मध्यावधि चुनाव की कोई गुंजाइश नहीं है। यह सरकार बनेगी और अपना पांच सालों का कार्यकाल पूरा करेगी। हम सभी यह सुनिश्चित करते हैं कि सरकार पांच साल तक चलेगी।हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस का गठबंधन 6 महीने से ज्यादा नहीं चलेगा। इस पर पूछे गए सवाल के जवाब में पवार ने कहा- मैं देवेंद्र जी को कुछ सालों से जानता हूं। मगर मुझे इस बात का पता नहीं था कि वे एक ज्योतिषी भी हैं। साझा कार्यक्रम में महाराष्ट्र के हितों का ध्यान रखा जाएगा: शिवसेना इससे पहले शिवसेना प्रवक्तासंजय राउत ने कहा था कि साझा कार्यक्रम में महाराष्ट्र के हितों को ध्यान में रखा जाएगा। पूरे 5 साल शिवसेना का ही मुख्यमंत्रीहोगा। वहीं, राकांपा नेता नवाब मलिक ने कहा कि शिवसेना के साथ आने में कांग्रेस कुछ हिचकिचा रहीहै। ड्राफ्ट की कॉपी सोनिया गांधी को भेजी है, अगर कांग्रेस साथ नहीं आई तो सरकार नहीं बनाएंगे। मुख्यमंत्री पद के मुद्दे पर ही शिवसेना ने भाजपा से गठबंधन तोड़ा: मलिक मलिक ने कहा- ''मुख्यमंत्री पद के मुद्दे पर ही शिवसेना ने भाजपा से गठबंधन तोड़ाहै। इसलिए उसके सम्मान और स्वाभिमान को जीवित रखना हमारी जिम्मेदारी है। महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए सभी दलों को साथ आना होगा। लेकिन कांग्रेस इससे कुछ हिचकिचा रही है। साझा कार्यक्रम का ड्राफ्ट सोनिया गांधी को भेजा गया है। अगर वो साथ नहीं आएगी तो सरकार नहीं बनाएंगे। राष्ट्रपति शासन लगने से प्रशासनिक व्यवस्थाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं। राज्य के किसान परेशान हैं, उन्हें फसल की बुआई करनी है। तीनों पार्टियों ने इस मुद्दे पर राष्ट्रपति से मुलाकात करने की योजना बनाई है।'' ड्राफ्ट में किसानों का मुद्दा प्रमुखता से शामिल तीनों दलों की समन्वय समिति की गुरुवार को बैठक हुई। इसके बाद कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने बताया कि ड्राफ्ट में किसानों का मुद्दा प्रमुखता से शामिल है। केवल एक-दो मुद्दों पर चर्चा होनी बाकी है। नई सरकार में मुख्यमंत्री पद शिवसेना के पास ही रहेगा। सूत्रों के मुताबिक, राकांपा उपमुख्यमंत्री पद पर मान गई है। बैठक में राकांपा प्रदेश प्रमुख जयंत पाटिल, राकांपा नेता छगन भुजबल और पार्टी के प्रवक्ता नवाब मलिक, कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण, मणिकराव ठाकरे, विजय वडेट्टीवर, शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे और सुभाष देसाई शामिल हुए। शिवसेना के सामने रखीकट्‌टरपंथी छवि से बाहर आने की शर्त कांग्रेस और राकांपा ने शिवसेना के सामने कट्टरपंथी हिंदूवादी पार्टी की छवि से बाहर आने की शर्त रखी है। कांग्रेस को शिवसेना को समर्थन देने से सबसे ज्यादा हिचक उसकी इसी छवि को लेकर है। वहीं राकांपा प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी 17 नवंबर को दिल्ली में शिवसेना के साथ गठबंधन सरकार बनाने के मुद्दे पर चर्चा करेंगे। तीनों दलों के बीच सहमति बनी है कि प्रत्येक पार्टी के हर चार विधायकों पर एक मंत्री हाेगा। यह फाॅर्मूला लगभग तय है। शिवसेना के 56 विधायक हैं, उन्हें सात अन्य विधायकों का समर्थन है यानी शिवसेना के कुल 63 विधायक हैं। ऐसे में उसके 15 या 16 मंत्री होंगे। राकांपा के 11 या 12 मंत्री होंगे। वहीं कांग्रेस के 44 विधायक हैं, ताे उसे खाते में 11 मंत्री हाेंगे। शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस साथ आए तो बहुमत कुल सीटें: 288/बहुमत: 145 दल सीटें शिवसेना 56 एनसीपी 54 कांग्रेस 44 कुल 154 निर्दलीय 9 विधायक साथ होने का दावा तब कुल संख्या बल 163 महाराष्ट्र में अन्य दलों की स्थिति पार्टी सीट भाजपा 105 बहुजन विकास अघाड़ी 3 एआईएमआईएम 2 निर्दलीय और अन्य दल 15 कुल 125
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📰महाराष्ट्र की राजनीति

📰महाराष्ट्र की राजनीति - महाराष्ट्र | शरद पवार ने कहा - सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू , 5 साल पूरे करेंगे ; मुलाकात के लिए राज्यपाल से वक्त मांगा - शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और राकांपा प्रमुख शरद पवार । ( फाइल फोटो ) । - ShareChat
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1 दिन पहले
#🚩केरल: सबरीमाला मंदिर केस #📰गुरूवार की ताज़ा ख़बरें #📰 समाचार एवं न्यूज़ पेपर क्लिप #🌐 राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय खबरें सबरीमाला केस में पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केस सात जजों की बेंच के पास भेज दिया है। बेंच ने यह फैसला 3:2 से किया। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि अंतिम फैसले तक उसका पिछला आदेश बरकरार रहेगा। अदालत ने 28 सितंबर 2018 को 4:1 के बहुमत से मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को मंजूरी दी थी। फैसले पर 56 पुनर्विचार समेत 65 याचिकाएं दायर की गई थीं।इन पर 6 फरवरी को अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। पुनर्विचार याचिकाएंचीफ जस्टिसरंजन गोगोई की अगुआई वाली 5 जजों की बेंच में दायर की गई थीं। चीफ जस्टिस,जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस एएम खानविलकर ने केस बड़ी बेंच को भेजने का फैसला दिया। जस्टिस फली नरीमन और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने इसके खिलाफ फैसला दिया। ‘याचिका दायर करने वाले का मकसद धर्म और आस्था पर वाद-विवाद शुरू कराना’ पुनर्विचार याचिकाओं पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा- यह याचिका दायर करने वाले का मकसद धर्म और आस्था पर वाद-विवाद शुरू कराना है। महिलाओं के धार्मिक स्थलों में प्रवेश पर लगा प्रतिबंध सिर्फ सबरीमाला तक सीमित नहीं, यह दूसरे धर्मों में भी प्रचलित है। सुप्रीम कोर्ट को सबरीमाला जैसे धार्मिक स्थलों के लिए एक सार्वजनिक नीति बनानी चाहिए।सबरीमाला, मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश और फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन से जुड़े धार्मिक मुद्दों पर बड़ी बेंच फैसला करेगी। बेंच की इकलौती महिला जज ने कहा था- धार्मिक मुद्दों को नहीं छेड़ना चाहिए सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में महिलाओं के प्रवेश को मंजूरी देते हुए कहा था- दशकों पुरानी हिंदू धार्मिक प्रथा गैरकानूनी और असंवैधानिक थी। जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने कहा था- धर्मनिरपेक्षता का माहौल कायम रखने के लिए कोर्ट को धार्मिक अर्थों से जुड़े मुद्दों को नहीं छेड़ना चाहिए। जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा था- शारीरिक वजहों से मंदिर आने से रोकना रिवाज का जरूरी हिस्सा नहीं। ये पुरूष प्रधान सोच दर्शाता है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा था- महिला को माहवारी के आधार पर प्रतिबंधित करना असंवैधानिक है। यह मानवता के खिलाफ है। 1990 में मामला सामने आया 29 साल पहले 1990 में मंदिर परिसर में 10-50 साल के बीच की उम्र की महिलाओं के प्रवेश का मामला सामने आया। इन्हें रोकने के लिए केरल हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई। कोर्ट ने सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश पर रोक की सदियों पुरानी परंपरा को सही ठहराया। 2006 में इस रोक को चुनौती मिली। तभी से सबरीमाला बार-बार सुर्खियों में आने लगा। 2006 में कन्नड़ अभिनेत्री जयमाला ने दावा कि उन्होंने 1987 में भगवान अय्यप्पा के दर्शन किए। मंदिर प्रमुख ने कहा था कि भगवान नाराज हैं, क्योंकि मंदिर में युवा महिला आई थी। 2007 में केरल की लेफ्ट की सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर यंग लॉयर एसोसिएशन की याचिका के समर्थन में हलफनामा दाखिल किया। फरवरी 2016 में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार आई तो महिलाओं को प्रवेश देने की मांग से पलट गई। कहा कि परंपरा की रक्षा होनी चाहिए। 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने मामला संविधान पीठ को सौंप दिया। 28 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी। केरल के राजपरिवार और मंदिर के मुख्य पुजारियों समेत कई हिंदू संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। सबरीमाला कार्यसमिति ने आरोप लगाया था कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी आयु की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति देकर उनके रीति-रिवाज और परंपराओं को नष्ट किया। मान्यता है कि 12वीं सदी के भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी हैं। जिसकी वजह से मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं का प्रवेश वर्जित किया गया।
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🚩केरल: सबरीमाला मंदिर केस

🚩केरल: सबरीमाला मंदिर केस - सबरीमाला / सुप्रीम कोर्ट ने केस 7 जजों की बेंच को भेजा , महिलाओं के प्रवेश की अनुमति का फैसला बरकरार रहेगा - ShareChat
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2 दिन पहले
#शिवसेना-बीजेपी #📰गुरूवार की ताज़ा ख़बरें #👊विपक्ष की राजनीति⚡ #📰 समाचार एवं न्यूज़ पेपर क्लिप #📰महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन महाराष्ट्र में सियासी उठापठक के बीच गुरुवार को शिवसेना सांसद संजय राउत ने एक बार फिर भाजपा पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा के साथ 50-50 फॉर्मूले पर बात हुई थी। उद्धव ठाकरे और अमित शाह के बीच यह बात जिस कमरे में हुई थी, वह सामान्य कमरा नहीं है। वह पूज्य बालासाहेब ठाकरे का कमरा है, जिसे हम मंदिर मानते हैं। हम बालासाहेब की कसम खाते हैं। हम झूठ नहीं बोल रहे। उन्होंने यह भी कहा कि शिवसेना प्राण जाए, पर वचन न जाए वाले सिद्धांत की पार्टी है। यह महाराष्ट्र के सम्मान की बात है। ये वही कमरा है, जहां से बालासाहेब नरेंद्र मोदी को आशीर्वाद दिया करते थे। यह वही कमरा है जहां से विश्व में कोई भी नेता आता है तो चाहता है कि उस कमरे में बालासाहेब का नमन करे। मोदी देश के सबसे बड़े नेता: राउत राउत ने यह भी कहा कि- हमने मोदी जी के नाम पर वोट मांगे हैं। वे देश के सबसे बड़े नेता हैं। हम उनका हमेशा आदर करते रहेंगे। हम मोदी जी से उतना ही प्यार करते हैं जितना देश के कार्यकर्ता और जनता करती है। Sanjay Raut ✔ @rautsanjay61 अब हारना और डरना मना है.. Twitter पर छबि देखें 8,139 8:14 am - 14 नव॰ 2019 Twitter Ads की जानकारी और गोपनीयता 3,291 लोग इस बारे में बात कर रहे हैं इससे पहले बुधवार को न्यूज एजेंसी को दिए एक इंटरव्यू में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि महाराष्ट्र में चुनाव के पहले और चुनाव के समय मैंने सौ बार कहा था, नरेंद्र मोदी जी ने कई बार कहा था कि अगर गठबंधन की सरकार बनती है तो हमारे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ही होंगे। तब किसी ने कोई विरोध दर्ज नहीं कराया था। अब वे (शिवसेना) नई मांगें लेकर आ रहे हैं और यह हमें स्वीकार नहीं है। हमने विश्वासघात नहीं किया है। शिवसेना विधायकों ने रिजॉर्ट छोड़ा इस बीच, बुधवार देर रात शिवसेना विधायकों ने रिजॉर्ट छोड़ दिया। शिवसेना विधायक कई दिनों से मलाड स्थित रिसॉर्ट में थे। बताया जा रहा है कि उद्धवने सभीविधायकों को अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में जाने का निर्देश दिया। इससे पहले न्यूनतम साझा कार्यक्रम को लेकर राकांपा और कांग्रेस नेताओं के बीच देर रात तक बैठक हुई। देर रात तक हुई राकांपा-कांग्रेस की बैठक न्यूनतम साझा कार्यक्रम को लेकर मुंबई में राकांपा और कांग्रेस के बीच देर रात बैठक जारी रही।इस बैठक में कांग्रेस की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण, पृथ्वीराज चव्हाण, मानिकराव ठाकरे, बालासाहेब थोराट और विजय वादेत्तिवार शामिल हुए। वहीं, राकांपा की ओर से जयंत पाटिल, अजित पवार, छगन भुजबल, धनंजय मुंडे और नवाब मलिक शामिल हुए। ये कमेटी सरकार में पोर्टफोलियो समेत विभिन्न मुद्दों पर सहमती बनाने का प्रयास करेगी। कमेटी में शामिल कांग्रेस नेताओं से शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने भी मुलाकात की। पवार ने कहा- अजित ने जानबूझकर बारामती जाने की बात कही इससे पहले राकांपा नेता अजित पवार के एक बयान से खलबली मच गई थी। बुधवार दोपहर अजित ने कह दिया कि कांग्रेस के साथ होने वाली बैठक रद्द हो गई। मैं बारामती जा रहा हूं। ऐसे में सियासी गलियारे में खबर उड़ गई कि राकांपा अब शिवसेना को समर्थन नहीं देगी। हालांकि, इसके आधे घंटे बाद ही राकांपा प्रमुख शरद पवार ने इन सभी अटकलों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा-'अजीत पवार यदि कोई बात मजाकिया लहजे में भी कहते हैं, तो भी तुम्हारी (मीडिया) गाड़ियां उनके पीछे लग जाती हैं। इसकी वजह से उनकी प्राइवेसी नहीं रहती है। इसी वजह से उन्होंने जानबूझकर बारामती जाने की बात कही।'इस बात की पुष्टि करने के लिए बाद में राकांपा की ओर से मीटिंग का फोटो भी सार्वजनिक किया गया। शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस साथ आए तो बहुमत कुल सीटें: 288 बहुमत: 145 दल सीटें शिवसेना 56 एनसीपी 54 कांग्रेस 44 कुल 154 निर्दलीय 9 विधायक साथ होने का दावा तब कुल संख्या बल 163 महाराष्ट्र में अन्य दलों की स्थिति पार्टी सीट भाजपा 105 बहुजन विकास अघाड़ी 3 एआईएमआईएम 2 निर्दलीय और अन्य दल 15 कुल 125
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शिवसेना-बीजेपी

शिवसेना-बीजेपी - महाराष्ट्र / संजय राउत बोले - बालासाहेब की कसम खाते हैं कि उन्हीं के कमरे में भाजपा के साथ 50 - 50 फॉर्मूले पर चर्चा हुई थी - ShareChat
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