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#🇧🇷प्रधानमंत्री मोदी का ब्राजील दौरा 🇮🇳 #📰 समाचार एवं न्यूज़ पेपर क्लिप #📺 देश-विदेश की ख़बरें #📰 मंगलवार की ताज़ा ख़बरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्राजील रवाना होने से पहले कैबिनेट की बैठक बुलाई। मोदी 11वें ब्रिक्स सम्मेलन(13 और 14 नवंबर) में हिस्सा लेने के लिए मंगलवार को ब्राजील रवाना हुए। वेछठी बार समिट में हिस्सा लेंगे।इस बारसमिट कीथीम ‘उन्नत भविष्य के लिए आर्थिक वृद्धि’है। मोदी पहली बार ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने 2014 में ब्राजील के शहर फोर्टलेजा गए थे। सरकार के सूत्रों के मुताबिक, मोदी की ब्राजील यात्रा के दौरान उनके साथ एक बड़ा व्यापार प्रतिनिधियों का दल भी शामिल होगा। यह प्रतिनिधि विशेषकर ब्रिक्स बिजनेस फोरम में हिस्सा लेगा। मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय वार्ता करेंगे अधिकारियों ने बताया, समिट के दौरान मोदी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।मोदी का ब्रिक्स बिजनेस फोरम के समापन और ब्रिक्स के मुख्यसत्र और समापन समारोह दोनों में हिस्सा लेने का कार्यक्रम है। समिटमें समकालीन विश्व में राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए चुनौतीऔर अवसरों पर बातचीत होने की संभावना है। व्यापार और निवेश प्रमोशन एजेंसियों के बीच ब्रिक्स एमओयू परहस्ताक्षर होंगे ब्रिक्स के मुख्य अधिवेशन में सभी नेता आपस मेंआर्थिक विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर बातचीत करेंगे। मोदीब्रिक्स बिजनेस काउंसिल में भी हिस्सा लेंगे। इसमें ब्राजीलियन ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल के चेयरमैन और न्यू डेवलपमेंट बैंक के अध्यक्ष अपनी-अपनी रिपोर्ट भी सौंपेंगे। इसमें व्यापार और निवेश प्रमोशन एजेंसियों के बीच ब्रिक्स एमओयू पर भी हस्ताक्षर होंगे। ब्रिक्स विश्व की पांच बड़ी अर्थव्यवस्था ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से मिलकर बना है। ब्रिक्सदेशों कीदुनिया की कुल आबादी में 42% और जीडीपी में23% हिस्सेदारी है।पांचों देशों का विश्व व्यापार में हिस्सा 17% है।
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🇧🇷प्रधानमंत्री मोदी का ब्राजील दौरा 🇮🇳

🇧🇷प्रधानमंत्री मोदी का ब्राजील दौरा 🇮🇳 - कूटनीति / मोदी ब्रिक्स सम्मेलन के लिए ब्राजील रवाना , इससे पहले कैबिनेट के साथ बैठक की - ShareChat
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1 दिन पहले
#🏥लता मंगेशकर की तबीयत बिगड़ी #📰 मंगलवार की ताज़ा ख़बरें #📰 समाचार एवं न्यूज़ पेपर क्लिप मुंबई. भारतरत्न लता मंगेशकर (90)की तबीयत दूसरे दिन भी नाजुक बनी हुई है। वेआईसीयू में भर्ती हैं।सोमवार तड़के सांस लेने में तकलीफ होने के बाद उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। न्यूज एजेंसी ने बताया, ‘‘लता मंगेशकर की हालत चिंताजनक बनी हुई है। उन पर दवाओं का धीमे-धीमेअसर हो रहा है।’’ रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें फेफड़ों में इन्फेक्शन हुआ है और निमोनिया की शिकायत भी बताई गई है।डॉ. पतित समधानी उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। लताबीमारी से उबर रहीं हैं: पीआर स्वर कोकिला लता की पब्लिक रिलेशन टीम ने मंगलवार को एक बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि उनकी हालत स्थिर है। धीरे-धीरे सुधार भी हो रहा है। ईमानदारी से कहें तो लता जी ने बीमारी से लड़ने के लिए बेहतरीन जज्बा दिखाया है। हम आपको उनसे जुड़ी हर पल-पल की जानकारी देते रहेंगे। हमें आशा है कि आप उनके परिवार की निजता का सम्मान करेंगे। आशा भोसले भी पहुंची थीं सोमवार को लता मंगेशकर की बहन आशा भोसले भी उनका हाल-चाल लेने के लिए अस्पताल पहुंची थीं। बॉलीवुड के सितारे भी उनके जल्द ठीक होने की दुआ मांग रहे हैं। लता मंगेशकर ने 28 सितंबर को अपना 90वां जन्मदिन मनाया था। हिंदी फिल्म जगत में 25 हजार से ज्यादा गीत गा चुकी लता मंगेशकर भारतरत्न से सम्मानित हो चुकी हैं।
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🏥लता मंगेशकर की तबीयत बिगड़ी

🏥लता मंगेशकर की तबीयत बिगड़ी - मुंबई | लता मंगेशकर की हालत नाजुक , फेफड़ों में इन्फेक्शन के बाद आईसीयू में भर्ती - ShareChat
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1 दिन पहले
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📰महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन

मुंबई. सरकार गठन को लेकर असमंजस की स्थिति के बीच महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कैबिनेट की सिफारिश को मंजूरी दे दी। राज्यापाल भगत सिंह कोश्यारी ने भी राष्ट्रपति शासन लगाने को लेकर राष्ट्रपति के पास रिपोर्ट भेजी थी। राष्ट्रपति शासन को लेकर शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दाखिल कर तत्काल सुनवाई की मांग की है। बताया जा रहा है कि कपिल सिब्बल शिवसेना की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पैरवी कर सकते हैं। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सबसे पहले सबसे बड़े दल भाजपा को सरकार बनाने का न्योता सौंपा था। लेकिन, भाजपा ने सरकार गठन की इच्छा जाहिर नहीं की। इसके बाद शिवसेना को न्योता दिया गया। लेकिन, शिवसेना ने 2 दिन का वक्त मांगा था। राजभवन ने इससे इनकार कर दिया। इसके बाद तीसरे सबसे बड़े दल राकांपा से राज्यपाल ने सरकार बनाने की इच्छा के बारे में पूछा। राकांपा ने कहा कि हमें मंगलवार रात 8:30 बजे तक का वक्त सौंपा गया है। अब कांग्रेस की सरकार बनाने में दिलचस्पी सोमवार को दो बैठकों के दौरान सोनिया ने महाराष्ट्र विधायकों से सरकार बनाने पर राय मांगी और साथ ही राकांपा से भी चर्चा की। सूत्रों का कहना है कि अब कांग्रेस की दिलचस्पी महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर बढ़ रही है। मंगलवार को हुई कांग्रेस की बैठक में सरकार बनाने को लेकर ही चर्चा हुई। इसके बाद सोनिया गांधी ने केसी वेणुगोपाल, मल्लिकार्जुन खड़गे और अहमद पटेल को राकांपा के साथ समन्वय का जिम्मा सौंपा है। वेणुगोपाल ने बताया कि हम सभी राकांपा अध्यक्ष शरद पवार से मिलने मुंबई रवाना हो रहे हैं। सत्ता गठन को लेकर फैसला सोनिया और पवार की बातचीत के बाद ही होगा। राकांपा नेता अजित पवार ने मंगलवार को कहा कि हमने (राकांपा और कांग्रेस) साथ-साथ चुनाव लड़ा है, इसलिए सरकार बनाने का फैसला हम अकेले नहीं ले सकते। उन्होंने कहा- कल 10 बजे से शाम 7 बजे तक हम उनके पत्र की राह देखते रहे, लेकिन शाम तक वह नहीं मिला। हमारा अकेले पत्र देना ठीक नहीं था। हमारे पास कुल 98 विधायक हैं। आज शाम को राकांपा और कांग्रेस नेताओं की मुंबई में बैठक होगी। राष्ट्रपति शासन के सवाल पर अजित ने कहा- अगर हम एक साथ चर्चा कर रहे हैं, तो आगे किसी चीज का कोई सवाल ही नहीं उठता। शिवसेना को समर्थन के पक्ष में 44 में से 26 कांग्रेस विधायक न्यूज एजेंसी एनएनआई के मुताबिक, महाराष्ट्र कांग्रेस के 44 में से 26 विधायक इस पक्ष में हैं कि शिवसेना को समर्थन दिया जाए। राज्य में राकांपा-शिवसेना और कांग्रेस की सरकार बने। ये 26 विधायक मराठा है। इनके अलावा भी ज्यादातर विधायक इस पक्ष में नहीं हैं कि नए सिरे से चुनाव होंे। राउत बोले- हम होंगे कामयाब Sanjay Raut ✔ @rautsanjay61 "लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशीश करने वालों की कभी हार नही होती ।' बच्चन. हम होंगे कामयाब.. जरूर होंगे... 14.5 हज़ार 9:11 am - 12 नव॰ 2019 Twitter Ads की जानकारी और गोपनीयता 6,811 लोग इस बारे में बात कर रहे हैं शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस साथ आए तो बहुमत कुल सीटें: 288 बहुमत: 145 दल सीटें शिवसेना 56 एनसीपी 54 कांग्रेस 44 कुल 154 निर्दलीय 9 विधायक साथ होने का दावा तब कुल संख्या बल 163 महाराष्ट्र में अन्य दलों की स्थिति पार्टी सीट भाजपा 105 बहुजन विकास अघाड़ी 3 एआईएमआईएम 2 निर्दलीय और अन्य दल 15 कुल 125 #📰महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन #👊विपक्ष की राजनीति⚡ #📰 मंगलवार की ताज़ा ख़बरें #📰 समाचार एवं न्यूज़ पेपर क्लिप #शिवसेना-बीजेपी
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1 दिन पहले
गुरदासपुर/इस्लामाबाद.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को पंजाब के गुरदासपुर मेंकरतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन किया। उन्होंने डेरा बाबा नानक स्थित कॉरिडोर के चेकपोस्‍ट से 550 श्रद्धालुओं कापहला जत्था करतारपुर रवाना किया। मोदी ने पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और अन्य नेताओं के साथ लंगर भी छका। उन्होंने रैली में कहा कि कॉरिडोर को कम वक्त में तैयार करने के लिए इमरान खान को धन्यवाद देता हूं। पाकिस्तान के श्रमिक साथियों का भी आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने इतनी तेजी से अपनी तरफ के कॉरिडोर को पूरा करने में मदद की। इस कॉरिडोर का निर्माण कार्य 11 महीने में पूरा हुआ है। उन्होंने कहा कि ये मेरा सौभाग्य है कि मैं आज देश को करतारपुर साहिब कॉरिडोर समर्पित कर रहा हूं। जैसी अनुभूति आप सभी को कार सेवा के समय होती है, वही, मुझे इस वक्त हो रही है। मैं आप सभी को, पूरे देश को, दुनिया भर में बसे सिख भाई-बहनों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। गुरु नानक देव हमारे प्रेरणा पुंज हैं: मोदी प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरु नानक देव जी, सिर्फ सिख पंथ की, भारत की ही धरोहर नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा पुंज हैं। गुरु नानक देव एक गुरु होने के साथ-साथ एक विचार हैं, जीवन का आधार हैं। उन्होंने सीख दी कि धर्म तो आता जाता रहता है लेकिन सत्य मूल्य हमेशा रहते हैं। उन्होंने सीख दी है कि अगर हम मूल्यों पर रह कर काम करते हैं तो समृद्धि स्थायी होते हैं। करतारपुर के कण-कण में गुरु नानक देवजी के पसीने की महक मिली है। यहां की वाणी में उनकी वाणी की गूंज मिली हुई है। मोदी ने कहा कि संसार में सेवा का मार्ग अपनाने से ही मोक्ष मिलता है और जीवन सफल होता है। हम समाज के भीतर सद्भाव पैदा करने की हर कोशिश करेंगे। हम भारत का अहित सोचने वाली ताकतों से सावधान रहेंगे, सतर्क रहेंगे। नशे जैसी समाज को खोखला करने वाली आदतों से दूर रहेंगे। अपनी आने वाली पीढ़यो को दूर रखेंगे। विकास के पथ को सशक्त करेंगे। मोदी ने बेर साहिब गुरुद्वारे में माथा टेका वेसुबह करीब 11 बजे डेरा बाबा नानक पहुंचे थे। उन्होंने सुल्तानपुर लोधी में बेर साहिब गुरुद्वारे में माथा टेका। उधर, सिख श्रद्धालुओं का पहला जत्था भारत से पाकिस्तान स्थित करतारपुर कॉरिडोर पहुंचा। डेरा बाबा नानक में अकाली नेता सुखबीर बादल, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी, गुरदासपुर से सांसद सन्नी देयोल ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया। यहां मोदी ने भजन-कीर्तन में हिस्सा लिया। उधर, पंजाब के पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू करतारपुर कॉरिडोर टर्मिनल पहुंचे, जहां से वे पहले जत्थे के साथ करतारपुर साहिब के दर्शन करने पाकिस्तान रवाना हुए। करतारपुर कॉरिडोर: भारत-पाकिस्तान में सद्‌भाव का 5वां सबसे बड़ा कदम सिंधु जल संधि: 1960 में नेहरू-अयूब में समझौता - जल विवाद पर एक सफल उदाहरण है। कराची में 19 सितंबर, 1960 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे। दोनों देशों में दो युद्धों के बावजूद ये संधि कायम है। सिंधु का इलाका करीब 11.2 लाख किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। पाक में 47%, भारत (39%), चीन (8%) और अफगानिस्तान (6%) में है। समझौता एक्सप्रेस: 1976 में अटारी-वाघा के बीच चली ट्रेन - दोनों देशों में सौहार्द बढ़ाने के लिए 22 जुलाई 1976 को अटारी-लाहौर के बीच शुरू की गई थी। समझौता एक्सप्रेस अटारी-वाघा के बीच 3 किमी का रास्ता तय करती है। इस ट्रेन के लोको पायलट और गार्ड चेंज नहीं होते। शताब्दी और राजधानी जैसी ट्रेनों के ऊपर प्राथमिकता दी जाती है। फिलहाल ट्रेन बंद है। मैत्री बस सेवा : करगिल युद्ध में भी बस बंद नहीं की - 19 फरवरी 1999 को मैत्री बस की शुरुआत की गई। उद्घाटन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था। वह पाकिस्तान भी गए थे। 1999 में जब करगिल हुआ, तो भी बस को बंद नहीं किया गया। हालांकि, 2001 में संसद पर हमले के इसे रद्द कर दिया गया। यह 2003 में फिर से चली। फिलहाल, बस सेवा है। सीजफायर संधि : सीमा पर शांति के लिए बढ़ाए हाथ - सीमा पर शांति के लिए दोनों देशों ने 2003 में युद्धविराम का ऐलान किया था। 25 नवंबर 2003 की आधी रात से युद्धविराम लागू हुआ था। अटल बिहारी वायपेयी की पहल के बाद एक औपचारिक युद्धविराम का ऐलान किया था। हालांकि, इसका उल्लंघन भी किया जा रहा है। पाकिस्तान के वो 4 गुरुद्वारे जहां कण-कण में नानक गुरुद्वारा ननकाना साहिब (लाहौर) - लाहौर से करीब 80 किलोमीटर दूर गुरु नानक जी का जन्म स्थान है। पहले इसे राय भोए दी तलवंडी के नाम से जानते थे। नानक जी के जन्म स्थान से जुड़ा होने से अब यह ननकाना साहिब बन गया है। गुरुद्वारा ननकाना साहिब लगभग 18,750 एकड़ में है। ये जमीन तलवंडी गांव के एक मुस्लिम मुखिया राय बुलार भट्टी ने दी थी। करतारपुर साहिब (नारोवाल) - सिखों के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। गुरु नानक 4 यात्राओं को पूरा करने के बाद यहीं बसे थे। यहां उन्होंने हल चलाकर खेती की। गुरु जी अपने जीवन काल के अंतिम 18 वर्ष यहीं रहे और यहीं अंतिम समाधि ली। यहीं गुरु जी ने रावी नदी के किनारे ‘नाम जपो, किरत करो और वंड छको’ का उपदेश दिया था। लंगर की शुरुआत भी यहीं से हुई थी। यह नारोवाल जिले में है। गुरुद्वारा पंजा साहिब (रावलपिंडी) - रावलपिंडी से 48 किलोमीटर दूर है। बताते हैं कि एक बार गुरु जी अंतरध्यान में थे, तभी वली कंधारी ने पहाड़ के ऊपर से एक विशाल पत्थर को गुरु जी पर फेंका। जब पत्थर उनकी तरफ आ रहा था, तभी गुरु जी ने अपना पंजा उठाया और वह पत्थर वहीं हवा में ही रुक गया। इस कारण गुरुद्वारे का नाम 'पंजा साहिब' पड़ा। आज भी पंजे के निशान ज्यों के त्यों है। गुरुद्वारा चोआ साहिब (पंजाब प्रांत) - यहां श्री गुरु नानक देव जी ठहरे थे, यह जगह 72 साल बाद 550वें प्रकाश पर्व पर श्रद्धालुओं के लिए खोली गई है। यह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में मौजूद है। इस गुरुद्वारा साहिब को महाराजा रणजीत सिंह ने बनवाने का काम शुरू किया था, जो 1834 में बनकर पूरा हुआ। 72 वर्ष बंद रहे इस गुरुद्वारे में बनी भित्ति चित्रकला लगभग लुप्त हो चुकी है। #🙏🏻करतारपुर साहिब कॉरिडोर 📰 #🙏 BBC Live: करतारपुर साहिब #📰शनिवार की ताज़ा ख़बरें #📰 समाचार एवं न्यूज़ पेपर क्लिप #📺 देश-विदेश की ख़बरें
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🙏🏻करतारपुर साहिब कॉरिडोर 📰

🙏🏻करतारपुर साहिब कॉरिडोर 📰 - पंजाब / करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन ; मोदी ने 550 श्रद्धालुओं का पहला जत्था रवाना किया , इमरान खान को शुक्रिया कहा TATE - ShareChat
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4 दिन पहले
#🚩अयोध्या पर फ़ैसला #📰 समाचार एवं न्यूज़ पेपर क्लिप #📺 देश-विदेश की ख़बरें #📰शनिवार की ताज़ा ख़बरें अयोध्या/नई दिल्ली. अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संविधान पीठ शनिवार को सुबह 10:30 बजे फैसला पढ़ना शुरू किया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि संविधान पीठ सर्वसम्मति से फैसला सुना रही है। सीजेआई ने कहा कि हिंदू-मुस्लिम विवादित स्थान को जन्मस्थान मानते हैं, लेकिन आस्था से मालिकाना हक तय नहीं किया जा सकता। पीठ ने कहा कि ढहाया गया ढांचा ही भगवान राम का जन्मस्थान है, हिंदुओं की यह आस्था निर्विवादित है। अदालत ने 6 अगस्त से 16 अक्टूबर तक 40 दिन तक हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा कि मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए वैकल्पिक जमीन आवंटित की जाए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रमुख बातें चीफ जस्टिस ने कहा- हम सर्वसम्मति से फैसला सुना रहे हैं। इस अदालत को धर्म और श्रद्धालुओं की आस्था को स्वीकार करना चाहिए। अदालत को संतुलन बनाए रखना चाहिए। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा- मीर बाकी ने बाबरी मस्जिद बनवाई। धर्मशास्त्र में प्रवेश करना अदालत के लिए उचित नहीं होगा। विवादित जमीन रेवेन्यू रिकॉर्ड में सरकारी जमीन के तौर पर चिह्नित थी। राम जन्मभूमि स्थान न्यायिक व्यक्ति नहीं है, जबकि भगवान राम न्यायिक व्यक्ति हो सकते हैं। विवादित ढांचा इस्लामिक मूल का ढांचा नहीं था। बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनाई गई थी। मस्जिद के नीचे जो ढांचा था, वह इस्लामिक ढांचा नहीं था। ढहाए गए ढांचे के नीचे एक मंदिर था, इस तथ्य की पुष्टि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) कर चुका है। पुरातात्विक प्रमाणों को महज एक ओपिनियन करार दे देना एएसआई का अपमान होगा। हालांकि, एएसआई ने यह तथ्य स्थापित नहीं किया कि मंदिर को गिराकर मस्जिद बनाई गई। हिंदू इस स्थान को भगवान राम का जन्मस्थान मानते हैं, यहां तक कि मुस्लिम भी विवादित जगह के बारे में यही कहते हैं। प्राचीन यात्रियों द्वारा लिखी किताबें और प्राचीन ग्रंथ इस बात को दर्शाते हैं कि अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि रही है। ऐतिहासिक उद्धहरणों से भी संकेत मिलते हैं कि हिंदुओं की आस्था में अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि रही है। ढहाया गया ढांचा ही भगवान राम का जन्मस्थान है, हिंदुओं की यह आस्था निर्विवादित है। हालांकि, मालिकाना हक को धर्म, आस्था के आधार पर स्थापित नहीं किया जा सकता। ये किसी विवाद पर निर्णय करने के संकेत हो सकते हैं। यह सबूत मिले हैं कि राम चबूतरा और सीता रसोई पर हिंदू अंग्रेजों के जमाने से पहले भी पूजा करते थे। रिकॉर्ड में दर्ज साक्ष्य बताते हैं कि विवादित जमीन का बाहरी हिस्सा हिंदुओं के अधीन था। 1946 के फैजाबाद कोर्ट के आदेश को चुनौती देती शिया वक्फ बोर्ड की विशेष अनुमति याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया। शिया वक्फ बोर्ड का दावा विवादित ढांचे पर था। इसी को खारिज किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज किया। निर्मोही अखाड़े ने जन्मभूमि के प्रबंधन का अधिकार मांगा था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित जमीन को 3 हिस्सों में बांटने के लिए कहा था 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अयोध्या का 2.77 एकड़ का क्षेत्र तीन हिस्सों में समान बांट दिया जाए। एक हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड, दूसरा निर्मोही अखाड़ा और तीसरा रामलला विराजमान को मिले। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 याचिकाएं दाखिल की गई थीं। ये फैसला भारत की शांति, एकता और सद्भावना को और बल दे: मोदी फैसले से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया था- अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा, वो किसी की हार-जीत नहीं होगा। देशवासियों से मेरी अपील है कि हम सब की यह प्राथमिकता रहे कि ये फैसला भारत की शांति, एकता और सद्भावना की महान परंपरा को और बल दे। Narendra Modi ✔ @narendramodi देश की न्यायपालिका के मान-सम्मान को सर्वोपरि रखते हुए समाज के सभी पक्षों ने, सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों ने, सभी पक्षकारों ने बीते दिनों सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए जो प्रयास किए, वे स्वागत योग्य हैं। कोर्ट के निर्णय के बाद भी हम सबको मिलकर सौहार्द बनाए रखना है। 56 हज़ार 10:27 pm - 8 नव॰ 2019 Twitter Ads की जानकारी और गोपनीयता 15.2 हज़ार लोग इस बारे में बात कर रहे हैं 40 दिन तक सुनवाई के दौरान 6 प्रमुख बिंदुओं पर हिंदू-मुस्लिम पक्ष की दलीलें kk संविधान पीठ के न्यायाधीश अयोध्या मामले पर सुनवाई कर रही संविधान पीठ की अध्यक्षता चीफ जस्टिस रंजन गोगोई कर रहे हैं। उनके अलावा इस बेंच में जस्टिस एसए बोबोडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। अयोध्या विवाद : 1526 से अब तक 1526 : इतिहासकारों के मुताबिक, बाबर इब्राहिम लोदी से जंग लड़ने 1526 में भारत आया था। बाबर के सूबेदार मीरबाकी ने 1528 में अयोध्या में मस्जिद बनवाई। बाबर के सम्मान में इसे बाबरी मस्जिद नाम दिया गया। 1853 : अवध के नवाब वाजिद अली शाह के समय पहली बार अयोध्या में साम्प्रदायिक हिंसा भड़की। हिंदू समुदाय ने कहा कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई। 1949 : विवादित स्थल पर सेंट्रल डोम के नीचे रामलला की मूर्ति स्थापित की गई। 1950 : हिंदू महासभा के वकील गोपाल विशारद ने फैजाबाद जिला अदालत में अर्जी दाखिल कर रामलला की मूर्ति की पूजा का अधिकार देने की मांग की। 1959 : निर्मोही अखाड़े ने विवादित स्थल पर मालिकाना हक जताया। 1961 : सुन्नी वक्फ बोर्ड (सेंट्रल) ने मूर्ति स्थापित किए जाने के खिलाफ कोर्ट में अर्जी लगाई और मस्जिद व आसपास की जमीन पर अपना हक जताया। 1981 : उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने जमीन के मालिकाना हक के लिए मुकदमा दायर किया। 1885 : फैजाबाद की जिला अदालत ने राम चबूतरे पर छतरी लगाने की महंत रघुबीर दास की अर्जी ठुकराई। 1989 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित स्थल पर यथास्थिति बरकरार रखने को कहा। 1992 : अयोध्या में विवादित ढांचा ढहा दिया गया। 2002 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित ढांचे वाली जमीन के मालिकाना हक को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की। 2010 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2:1 से फैसला दिया और विवादित स्थल को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच तीन हिस्सों में बराबर बांट दिया। 2011 : सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई। 2016 : सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण की इजाजत मांगी। 2018 : सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद को लेकर दाखिल विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की। 6 अगस्त 2019 : सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर हिंदू और मुस्लिम पक्ष की अपीलों पर सुनवाई शुरू की। 16 अक्टूबर 2019 : सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई पूरी हुई।
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🚩अयोध्या पर फ़ैसला

🚩अयोध्या पर फ़ैसला - अयोध्या केस LIVE / सुप्रीम कोर्ट ने नई मस्जिद बनाने के लिए मुस्लिमों को वैकल्पिक जमीन आवंटित करने के निर्देश दिए 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित भूमि 3 हिस्सों में बांटने का आदेश दिया 14 याचिकाएं हाईकोर्ट के इस | फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर की गईं 40 दिन तक सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा - ShareChat
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