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#om shanti brahmakumari
om shanti   brahmakumari - চগভজঞঙ্ন छङढ्यत 5பச ஏ7 চগভজঞঙ্ন छङढ्यत 5பச ஏ7 - ShareChat
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om shanti   brahmakumari - निराकारी ffft निरहंकारी निराकारी ffft निरहंकारी - ShareChat
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om shanti   brahmakumari - #ঞ্ভীজযরেত্ভশু 28 S& डबलुलाईट %fிQதி! #ঞ্ভীজযরেত্ভশু 28 S& डबलुलाईट %fிQதி! - ShareChat
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om shanti   brahmakumari - Om Shanti Parwano kaeroup Gನd Service यूं॰तो तैरने में माहिर हैं हम, फिर भी डूब जाते हैं अक्सर खयालों में নুদ্কাই Good Morning Om Shanti Parwano kaeroup Gನd Service यूं॰तो तैरने में माहिर हैं हम, फिर भी डूब जाते हैं अक्सर खयालों में নুদ্কাই Good Morning - ShareChat
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om shanti   brahmakumari - ओम शान्ति 23|2|26 Parwano ka Broup Godly service अपने स्वरूप द्वारा शिक्षा देने वाली मैं आत्मा योग्य शिक्षक 8 ओम शान्ति 23|2|26 Parwano ka Broup Godly service अपने स्वरूप द्वारा शिक्षा देने वाली मैं आत्मा योग्य शिक्षक 8 - ShareChat
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om shanti   brahmakumari - ओम शान्ति 23|2|26 Parwano ka group Godly service तुम बच्चे जानते हो कि कल्पन्कल्प सारी दुनिया जो पतित बन जाती है, उनको पावन करने वाला एक ही निराकार बाप है।. देह में रहने वाली जो आत्मा है उनको तुम्हारी परमात्मा बैठ समझाते हैं। आत्मा ही संस्कार ले जाती है। आत्मा है आरगन्स द्वारा कहती कि मैं फलाना हूँ।॰ मनुष्य देह अभिमानी ফ্৪ন ৯ हैं, देही अभिमानी रहना भूल आदती जाते हैं इसलिए बाप घड़ी घडी कहते हैं देही अभिमानी बनो। आत्मा ही भिन्न-भिन्न चोला लेकर पार्ट बजाती है। मुरली साकार ओम शान्ति 23|2|26 Parwano ka group Godly service तुम बच्चे जानते हो कि कल्पन्कल्प सारी दुनिया जो पतित बन जाती है, उनको पावन करने वाला एक ही निराकार बाप है।. देह में रहने वाली जो आत्मा है उनको तुम्हारी परमात्मा बैठ समझाते हैं। आत्मा ही संस्कार ले जाती है। आत्मा है आरगन्स द्वारा कहती कि मैं फलाना हूँ।॰ मनुष्य देह अभिमानी ফ্৪ন ৯ हैं, देही अभिमानी रहना भूल आदती जाते हैं इसलिए बाप घड़ी घडी कहते हैं देही अभिमानी बनो। आत्मा ही भिन्न-भिन्न चोला लेकर पार्ट बजाती है। मुरली साकार - ShareChat
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om shanti   brahmakumari - ओम शान्ति 23|2|26 Parwano ka Broup Godly service अव्यक्त इशारे संगठन को एकता के सूत्र में पिरोने के लिए वाणी की शक्ति पर विशेष ध्यान दो। वाणी सदा निर्मल हो, कम बोलो, धीरे बोलो और मीठा बोलो। सम्मानजनक बोल ही बोलो। अभी तक साधारण बोल ज्यादा हैं। अलौकिक बोल हों, फरिश्तों के बोल हों' , हर बोल मधुर होे। अभी इस बात पर अन्डरलाइन करो तब प्रत्यक्षता होगी। ओम शान्ति 23|2|26 Parwano ka Broup Godly service अव्यक्त इशारे संगठन को एकता के सूत्र में पिरोने के लिए वाणी की शक्ति पर विशेष ध्यान दो। वाणी सदा निर्मल हो, कम बोलो, धीरे बोलो और मीठा बोलो। सम्मानजनक बोल ही बोलो। अभी तक साधारण बोल ज्यादा हैं। अलौकिक बोल हों, फरिश्तों के बोल हों' , हर बोल मधुर होे। अभी इस बात पर अन्डरलाइन करो तब प्रत्यक्षता होगी। - ShareChat
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om shanti   brahmakumari - भा त Fb | OM Shanti किसी के बुरे वक्त में उसका हाथ पकड़ो , उसे सहारा दो और उसे हिम्मत दो, क्यूंकि ব্রুয়া নক নী থীউ মসয স Fb | OM Shanti चला जाएगा , लेकिन वो व्यक्ति आपको दुआ जिंदगी भर देता रहेगा। भा त Fb | OM Shanti किसी के बुरे वक्त में उसका हाथ पकड़ो , उसे सहारा दो और उसे हिम्मत दो, क्यूंकि ব্রুয়া নক নী থীউ মসয স Fb | OM Shanti चला जाएगा , लेकिन वो व्यक्ति आपको दुआ जिंदगी भर देता रहेगा। - ShareChat
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om shanti   brahmakumari - ओम् शान्ति 23-02-26 संगमयुग है चढ़ती कला का #8 4<4  यह सभी का भला होता है इसलिए कहा इसमें युग , चढ़ती कला तेरे भाने सर्व का भला' जाता सभी ब्राह्मण बच्चों को बहुत- बहुत সংন:- बाबा बधाईयाँ देते हैं - क्यों ? उत्तर : क्योंकि बाबा कहते तुम मेरे बच्चे मनुष्य से हो। तुम अभी रावण की जंजीरों से छूटते নৈনা ননন हो, तुम स्वर्ग की राजाई पाते हो, पास विद् ऑनर बनते हो, मैं नहीं इसलिए बाबा तुम्हें बहुत- बहुत बधाईयाँ देते हैं तुम आत्मायें पतंग हो, डोर तुम्हारी मेरे हाथ में हैं | मैं तुम्हें स्वर्ग का मालिक बनाता हूँ । गीतः आखिर वह दिन आया आज.... ओम् शान्ति धारणा के लिए मुख्य सारः- fg १ ) पास विद् ऑनर होने के एक बाप को याद करना है, किसी भी देहधारी को नहीं इन आंखों से जो दिखाई देता है , उसे देखते भी नहीं देखना है। २ ) हम अमरलोक की यात्रा पर जा रहे हैं इसलिए का कुछ भी याद न रहे, इन कर्मेन्द्रियों से मृत्युलोक कोई भी विकर्म न हो, यह ध्यान रखना है। ओम् शान्ति 23-02-26 संगमयुग है चढ़ती कला का #8 4<4  यह सभी का भला होता है इसलिए कहा इसमें युग , चढ़ती कला तेरे भाने सर्व का भला' जाता सभी ब्राह्मण बच्चों को बहुत- बहुत সংন:- बाबा बधाईयाँ देते हैं - क्यों ? उत्तर : क्योंकि बाबा कहते तुम मेरे बच्चे मनुष्य से हो। तुम अभी रावण की जंजीरों से छूटते নৈনা ননন हो, तुम स्वर्ग की राजाई पाते हो, पास विद् ऑनर बनते हो, मैं नहीं इसलिए बाबा तुम्हें बहुत- बहुत बधाईयाँ देते हैं तुम आत्मायें पतंग हो, डोर तुम्हारी मेरे हाथ में हैं | मैं तुम्हें स्वर्ग का मालिक बनाता हूँ । गीतः आखिर वह दिन आया आज.... ओम् शान्ति धारणा के लिए मुख्य सारः- fg १ ) पास विद् ऑनर होने के एक बाप को याद करना है, किसी भी देहधारी को नहीं इन आंखों से जो दिखाई देता है , उसे देखते भी नहीं देखना है। २ ) हम अमरलोक की यात्रा पर जा रहे हैं इसलिए का कुछ भी याद न रहे, इन कर्मेन्द्रियों से मृत्युलोक कोई भी विकर्म न हो, यह ध्यान रखना है। - ShareChat