#📜 સ્પેશ્યલ સ્ટોરી #✍️ જીવન કોટ્સ #🔍 જાણવા જેવું #👌 જીવનની શીખ #☺ જીવનની વાસ્તવિક્તા आइए भारतीय कानून की शर्मनाक हरकत दिखाता हूं
जो इतिहास कभी माफ नहीं करेगा
पहली तस्वीर हरीश राणा कि ह जिन्हें कोर्ट ने इच्छा मृत्यु की अनुमति दी ह जिसके बारे में आजकल लगभग सभी ने जान ही लिया ह
लेकिन मैं बात कर रहा हूं दूसरी तस्वीर की शायद ही जिसके बारे में बहुत कम लोगों को पता ह
दूसरी तस्वीर में नजर आ रही महिला का नाम अरुणा सानबाग ह जिनका जन्म 1जून 1948 को कर्नाटक में हुआ था पढ़ लिख कर नर्स बनी और मुंबई के एक अस्पताल में नौकरी करती थी
वहीं पर कुत्तों की देखभाल करने और सफाई करने का कार्य करने वाले कर्मचारी सोहनलाल वाल्मीकि ने 27 नवंबर 1973 को इनके साथ रेप किया ओर कुत्ते बांधने वाली चैन से गला घोंटा
जिसका नतीजा यह हुआ कि अरुणा कोमा में चली गई ठीक हरीश राणा की तरह
2009 में एक पत्रकार द्वारा इनकी इच्छा मृत्यु हेतु याचिका डाली गई लेकिन कोर्ट ने खारिज कर दी
और अंततः 2015 के अरुणा की स्वाभाविक लेकिन दर्दनाक 42 साल तड़पने के बाद मौत हुई
यानी 42 साल वह तड़पती रही उस दर्द से जो सोहनलाल वाल्मीकि ने दिया था
दूसरी तरफ सोहनलाल को मर्डर की कोशिश में मुकदमा दर्ज हुआ क्योंकि उस वक्त रेप की जांच टू फिंगर से होती थी जिसकी पुष्टि प्रमाणिक नहीं हुई
सोहनलाल 7 साल जेल ( 7 साल जेल का मतलब 3.5 साल ही होता ह) काटकर बरी ओर रिहा हो गए
अरुणा की मौत के बाद सोहनलाल यूपी के हापुड़ में मिला अपने दो बच्चों ओर पत्नी के साथ , उसने रेप की बात से इनकार किया लेकिन हमले की बात स्वीकारी हमले के वक्त 28 वर्षीय सोहनलाल शादीशुदा था
कुलमिलाकर कानून व्यवस्था का शर्मनाक कृत्य ये था कि एक नौजवान युवती को 42 साल वो यातना झेलकर मरना पड़ा
जिसे सुनकर भी रूह कांप जाती ह
कलेजा हाथ में आ जाता ह
अरुणा की की तकदीर देखिए उनकी लाश भी लेने कोई नहीं आया
अरुणा के साथ यह हादसा हुआ तब सगाई की हुई थी वे भी काफी समय तक अस्पताल आते रहे लेकिन फिर वे भी दूसरी शादी करके अपना जीवन बसा चुके थे
दूसरी तरफ अपराधी 7 साल की जेल काटकर अपना जीवन हंसी खुशी आजादी के साथ बिताता रहा
अभी भी संभाव्यता लगभग 80 साल उम्र में जिंदा ह
ना कानून सजा दे पाया ना अत्याचार रोक पाया
ना इच्छा मृत्यु दे पाया
अगर देश का यह कानून ह तो अत्याचार किसे कहेंगे??
आपकी इस पर क्या राय ह बताए ?
#vaghela292