दुर्गेश जायसवाल 'चमन'
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दुर्गेश जायसवाल 'चमन'
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लेखक, कवि (साहित्यकार)
बचपन... #kavi #kavichaman #durgeshjaiswalchaman
kavi - 444#.., भी होतीं है बरसातें 314 अनव भी बहता है पानी अब भी होत्ा हे कोचड भी बोलते हैं मेढ़क  अब अब भी बोलते हें मोर  और होता है तरह- तरह के जीवों का शोर पर सबको अब नहीं है उससे मतलब सबकी व्यस्तताऐं अलग हैं नहीं बहाता अब कोई कागज की बनाकर नाव  नर्हीं देखने जाता कोई हरिजनों की बस्ती का जल-भराव न्हीं आता याद अब नह चौमासे का माह नहीं होता था जब लोगों के घर खाने का अन्न जब आती आती गाँन र्मे बाढ. .- केसे बहा ले जाती अपने साथ फसले जाननर पूरे  और अनेरकों स्वप्न ঘ-ন  किसको  पर याद आता है उन बच्चों को जो कभी थे छोटे हो गये हैं बूढ़े पर -अब उनको याद आता हे बचपन दुर्गेश जायसवाल चमन @durgeshjaiswalchaman 2025-09-14 444#.., भी होतीं है बरसातें 314 अनव भी बहता है पानी अब भी होत्ा हे कोचड भी बोलते हैं मेढ़क  अब अब भी बोलते हें मोर  और होता है तरह- तरह के जीवों का शोर पर सबको अब नहीं है उससे मतलब सबकी व्यस्तताऐं अलग हैं नहीं बहाता अब कोई कागज की बनाकर नाव  नर्हीं देखने जाता कोई हरिजनों की बस्ती का जल-भराव न्हीं आता याद अब नह चौमासे का माह नहीं होता था जब लोगों के घर खाने का अन्न जब आती आती गाँन र्मे बाढ. .- केसे बहा ले जाती अपने साथ फसले जाननर पूरे  और अनेरकों स्वप्न ঘ-ন  किसको  पर याद आता है उन बच्चों को जो कभी थे छोटे हो गये हैं बूढ़े पर -अब उनको याद आता हे बचपन दुर्गेश जायसवाल चमन @durgeshjaiswalchaman 2025-09-14 - ShareChat
#🌞 Good Morning🌞 #📚कविता-कहानी संग्रह #✍मेरे पसंदीदा लेखक #👋🏻अलविदा 2025 🥳 @writer chaman #😍न्यू ईयर : countdown Start⌛
🌞 Good Morning🌞 - क्या लिखता..., बहुत से दोस्त विछड़े तो दूर जिन्हे कभी विछडना सोंचा तक नहीं होगा। ऐसे लोगों से विश्वासघात विश्वास। जिसपर परिजनों जितना किया होगा कुछ लोगों ने तीखे व्यंग থাাযন सुनाये तरह- तरह की व्याख्याएँ लोगों से। अपनी सुनी होगी और इससे अधिक क्या हो सकता है कि परिजनों में अपने पसंदीदा लोगों को दिया हो तुमने कंधा और हृदय की घोर हताशा भी अंतर को कचोटती हुई মন बार्बार देती हो जबाब या सामना करना पड़ा हो किसी जानलेवा हमले का a& गाली गलौज तक बातें न पहुंची हों जिसर्में लड़ाई या हुम्हे मिली हो कुछ असफलताएँ 3193 గెఖా గెఖా # अनवरत मेहनत के बाद भी॰ छुपा राखी हो अपनी कलाएँ अलंकरण 377 যা और अनेक प्रतिभाएँ अपने सपनों के लिए दुर्गेश जायसवाल चमन क्या लिखता..., बहुत से दोस्त विछड़े तो दूर जिन्हे कभी विछडना सोंचा तक नहीं होगा। ऐसे लोगों से विश्वासघात विश्वास। जिसपर परिजनों जितना किया होगा कुछ लोगों ने तीखे व्यंग থাাযন सुनाये तरह- तरह की व्याख्याएँ लोगों से। अपनी सुनी होगी और इससे अधिक क्या हो सकता है कि परिजनों में अपने पसंदीदा लोगों को दिया हो तुमने कंधा और हृदय की घोर हताशा भी अंतर को कचोटती हुई মন बार्बार देती हो जबाब या सामना करना पड़ा हो किसी जानलेवा हमले का a& गाली गलौज तक बातें न पहुंची हों जिसर्में लड़ाई या हुम्हे मिली हो कुछ असफलताएँ 3193 గెఖా గెఖా # अनवरत मेहनत के बाद भी॰ छुपा राखी हो अपनी कलाएँ अलंकरण 377 যা और अनेक प्रतिभाएँ अपने सपनों के लिए दुर्गेश जायसवाल चमन - ShareChat