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#whatsaap status #GodMorningThursday #Kalyug_Mein_SatyugKiShuruat6 👆👆राजस्थान के संत हरिसागर को कबीर परमात्मा मिले थे, और उनको नाम उपदेश दिया था...... Watch Factful Debates Yt
whatsaap status - कबीर सागर ज्ञान बोध पृष्ठ १९ कवीर मूल राम ना काहू पाये। शाखा डार मे जगत भमाय।। डार शाखा मे थ्यान जो धरही। निश्चय जाय नरक मे परही।। वेद पढे और भेद न जाने। डार शाखा को पुरूष (प्रभु) बखाने।  पढें पुरान और बेद बखाने | सतपुरूष का भेद न जाने। । बेद पुराण यह करे पुकारा। सबही से एक पुरुष (प्रभु) नियारा ताहि न यह जग जाने भाई। तीन देव में ध्यान लगाई। । तीन देव की करि हैं भक्ति। उनकी कबहु ना होवे मुक्ति।।  तीन देव का अजव ख्याला। देवी देव प्रपंची काला। । इनमे मत भटको अज्ञानी। काल झपट पकडेगा प्राणी।। तीन देव पुरूष गम्य ना पाई। जग के जीव सव फिरैं भुलाई।।  जो कोई सतपुरुष भजे भाई। ताको देख डर जम राई।।  कबीर सागर ज्ञान बोध पृष्ठ १९ कवीर मूल राम ना काहू पाये। शाखा डार मे जगत भमाय।। डार शाखा मे थ्यान जो धरही। निश्चय जाय नरक मे परही।। वेद पढे और भेद न जाने। डार शाखा को पुरूष (प्रभु) बखाने।  पढें पुरान और बेद बखाने | सतपुरूष का भेद न जाने। । बेद पुराण यह करे पुकारा। सबही से एक पुरुष (प्रभु) नियारा ताहि न यह जग जाने भाई। तीन देव में ध्यान लगाई। । तीन देव की करि हैं भक्ति। उनकी कबहु ना होवे मुक्ति।।  तीन देव का अजव ख्याला। देवी देव प्रपंची काला। । इनमे मत भटको अज्ञानी। काल झपट पकडेगा प्राणी।। तीन देव पुरूष गम्य ना पाई। जग के जीव सव फिरैं भुलाई।।  जो कोई सतपुरुष भजे भाई। ताको देख डर जम राई।। - ShareChat
#whatsaap status #GodNightWednesday #Kalyug_Mein_SatyugKiShuruat6 , #गर्भावस्था कबीर, वो दिन याद कर, पग ऊपर तले शीश। मृत मंडल में आय कर, भूल गया जगदीश।। कबीर साहिब जी कहते हैं कि जब इंसान मा के गर्भ मे होता है तब वहा पर जठरअग्नि की तपत, बदबू, शीलन जलन, आदि समस्या से ग्रस्त प्राणी परमात्मा से भजन करता है कि मुझे एक बार मा के गर्भ से बाहर निकल दो फिर मै आपका भजन करूगा। बाहर आते ही जीव पांच महाविकार मे उलझ जाता है। परमात्मा को याद नही रखता। थे उपर न पैर तलै नै सिर तेरा,रोव था भजन करूँगा हर तेरा! ओटी थी के भजन करूँगा हर तेरा..............................! नाभ कमल में नीर जमया तेरा, दिन्या महल बनाय............! नीचै जठरा अग्नि जले थी,तेरे लगी न ताती बाय..............! निचे शीश चरण ऊपर कू, वो दिन याद कराय.................! थे उपर न पैर तलै नै सिर तेरा, रोव था भजन करूँगा हर तेरा! ओटी थी के भजन करूँगा हर तेरा...............................! नैन नाक मुख दुवारा देहि, यो नक्षक साज बनाय..............! दाँत नही जबदूध दिया था,अमीमहारस खाया भरया उदर तेरा! थे उपर न पैर तलै नै सिर तेरा, रोव था भजन करूँगा हर तेरा! ओटी थी के भजन करूँगा हर तेरा...............................! थे उपर न पैर तलै नै सिर तेरा,रोव था भजन करूँगा हर तेरा! ओटी थी के भजन करूँगा हर तेरा...............................! दाई आई रे घूंटी प्याई, माता गोद खिलाय......................! बाहर आया भ्रम भुलाया, तेरे बाजे तुर शहनाय................! तुंही तुंही तो छोड़ दिया, इब चल्या अधम किस राह...........! जो दिन आज सो काल नही रे, आगे फिर धर्मराय............! कहा गया डर तेरा, ओटी थी के भजन करूँगा हर तेरा टेक..! थे उपर न पैर तलै नै सिर तेरा, रोव था भजन करूँगा हर तेरा! ओटी थी के भजन करूँगा हर तेरा...............................! काले काग गए घर अपने, ये बैठे श्वेत बुगाय...................! जाड़ दाँत तेरे उखड गई या, जीभ गयी ततुलाय...............! जम किंकर तेरे सिराणे रे बैठाया, यो खर्च कदे का खाय.....! रसना बीच जो मेख मार दे, फिर सेनो दाम बताय.............! ऎसे सुम भतेरे जगत में, धरया ढक्या रह जाय.................! कहा गया जर तेरा,ओटी थी के भजन करूँगा हर तेरा........! थे उपर न पैर तलै नै सिर तेरा, रोव था भजन करूँगा हर तेरा! ओटी थी के भजन करूँगा हर तेरा...............................! कुल के लोग जंगल में लेज्या कै, तू दिन्या ठोक जलाय......! फिर पीछे तो पशुआ कीजे, दीजे बैल बनाय...................! चार पहर जंगल में डोले, तेरा तो न उदर भरै...................! सिर पर सिंग दिए मन बहुरे, एक दुम ते मछर मत उड़ाय.....! काँधे जुआ रे जोते कुआँ, कोन्दो का भुस खाय................! थे उपर न पैर तलै नै सिर तेरा,रोव था भजन करूँगा हर तेरा.! ओटी थी के भजन करूँगा हर तेरा...............................! जब थे उपर न पैर तलै नै सिर तेरा..............................! रोव था भजन करूँगा हर तेरा....................................! फिर पीछे तू खर कीजे गा, कितै कुरडी चरने जाय.............! टूटी कमर पजावै रे चढ़ै, तेरा काग माँस गीलावै................! कहा गया घर वासा तेरा, आटि थी भजन करूंगा हर तेरा....! थे उपर न पैर तलै नै सिर तेरा,रोव था भजन करूँगा हर तेरा! ओटी थी के भजन करूँगा हर तेरा...............................! सुखदेव न चौरासी रे भुगती, कहा रंक कहा राय..............! ऐसी माया राम बली की, ये नारद मुनि भरमाय...............! ध्रुव प्रहलाद कबीर नाम दे, रहे निशान घुराय..................! दास गरीब चरण का चेरा, शब्द् शब्द समाय, अमरापुर होया डेरा.................................................! थे उपर न पैर तलै नै सिर तेरा,रोव था भजन करूँगा हर तेरा.! ओटी थी के भजन करूँगा हर तेरा...............................! भाई वो दिन करले याद गर्भ में था डेरा...........................! रोवै था के भजन करूँगा हर तेरा..................................! जब मां के पेट मे थे, वहां भी हमारी देखभाल उसी कबीर साहब ने की। कोई मां बाप वहां भोजन नही कराने आता था। वहां तो बडी बडी कसमें खा लेते थे भगवान मुझे इस कैद से बाहर करो मै आपकी भक्ति करूंगा। राम जी कृष्ण जी भी इसी गर्भ से आये है स्वयंभू तो सिर्फ एक कबीर साहब है जो सशरीर आते है और सशरीर जाते है। जिसका वेद भी गुणगान करते है और कुरान‌, गुरू ग्रन्थ साहेब भी, हम ने पहचाना अब आपको बता रहे है। कहीं कल मर के धर्मराज को यह ना कहो हमे तो कबीर साहब का ज्ञान बताने वाला कोई मिला नही। वहा सब हिसाब किताब देना पडेगा। अपराधों को आधार बनाकर, कर्म समझ कर करते है पापी को ऊपर ले जाकर, यमराज पकौड़े तलते है।। जन्म से लेकर मृत्यु तक, पलपल का न्याय भी करते है सुना है ऊपर ले जाकर, यमराज पकौड़े तलते हैं।। देखा है मैंने माँ को भी,आलू में बेसन का लपटाना, तेल गरम करके बर्तन में, लाल पकौड़े तल जाना।। छीटा जरा भी पड़े तेल का, हाय फफोले पड़ते है, सुना है ऊपर ले जाकर, यमराज पकौड़े तलते है।। लिया हाथ में कलम औ पत्री, अपना एक हिसाब किया, खण्ड बाँट कर पापपुण्य का,कर्मो पे गहन विचार किया। पुण्य तो याद रहे न इक भी, पापों को मैंने स्वीकार किया, स्मरण शक्ति पर जोर डालकर, लेखाजोखा तैयार किया।। कटु वचन कहे किस से, कितनो से मैंने दुर्व्यवहार किया, बाल्यकाल की माया में, छोटों पर है अनुचित वार किया। भय ग्रसित ह्रदय अब डरता है, प्रतिकार नही ये करता है, चूक से चीटी कुचली न जाये, ये कदम फूंक कर रखता है सतगुरू जी दिया नाममन्त्र, घन्टो जुबां पर लाता था। जो पाप हुए वो माफ़ करो, हर वाक्य यही दोहराता हूँ।। पल दो पल बीते कुछ पल में, निद्रा ने मुझको घेर लिया, शिथिल पड़े ललाट पटल पर,स्वप्नों ने फिर आखेट किया यमराज थे कोई और थे, उज्जवल सी थी उनकी काया। मैं सिर पर पाँव राखा, बोला, भागो! दंडाधिकारी आया।। वो रोकें और मुझे बोले, क्यों भय तेरे मुख पे है छाया। दण्ड से क्यों तू डरती है, अभी तेरा वक्त नही आया।। लेखाजोखा कर्ता में सबका, मैं ही पुर्ण ब्रह्म सुन प्यारा हूँ दण्ड कभी देता नही मैं, मैं तो केवल तारणहारा हूँ।। सीर नीचे किये करजोड़ खड़ा,सतगुरू को प्रणाम किया। नीचसी युक्ति सूझी मुझको,मेरी मूड़ अक्ल ने काम किया। हे गुरू! एक है बिनती मेरी, काट दीजिये मेरे सारे पाप। ऐसा लेखा लिखिए मेरा, पुण्य बढ़ जाएँ अपने आप।। जोखिम इसमें है बहुतेरे, पर हो सके तो थोड़ी दया दे दो। मन भाप मेरा सतगुरू कहे, ये अक्ल कहा से लातो हो। उलटी सीधी तिकड़म करता, फिर दण्ड से क्यों घबराते हो। धन दौलत का मुझे मोह नही,मैं न्याय सदैव ही करवाता हूँ। सिर्फ तेरे पाप और पुण्य नही, ब्रम्हांड का करता धर्ता हूँ। कहा सुना सब बिसरा दे, तेरी पाप डिलीट में करता हूँ।। फिर ऐसा सोची तो पाप लगेगा,यह बात रिपीट मैं करता हूँ चल जाता हूँ है काम मुझे, एक पल का नही विश्राम मुझे।। Watch Factful Debates Yt
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#whatsaap status #GodNightWednesday #Kalyug_Mein_SatyugKiShuruat6 , भक्ति रूपी पौधा अक्षर पुरुष एक पेड है निरंजन वकी डार। तीनों देवा शाखा भये, ये पात रुप संसार।। गीता अध्याय 15 श्लोक 1.4 को इस अमृतवाणी में संक्षिप्त कर बताया है किः-जो ऊपर को मूल वाला तथा नीचे को तीनों गुण रजगुण ब्रह्मा, सतगुण विष्णु, तमगुण शिव रूपी शाखा वाला संसार रूपी वृक्ष है। कबीर, अक्षर पुरूष एक पेड़ है, निरंजन वाकी डार। तीनों देवा शाखा हैं, पात रूप संसार।। जैसे पौधे को मूल की ओर से पृथ्वी में रोपण करके मूल की सिंचाई की जाती है तो उस मूल परमात्मा (परम अक्षर ब्रह्म) की पूजा से पौधे की परवरिश होती है। तब तना, डार, शाखाओं तथा पत्तों का विकास होकर पेड़ बन जाता है। छाया, फल तथा लकड़ी सर्व प्राप्त होती है जिसके लिए पौधा लगाया जाता है। यदि पौधे की शाखाओं को मिट्टी में रोपकर जड़ों को ऊपर करके सिंचाई करेंगे तो भक्ति रूपी पौधा नष्ट हो जाएगा। इसी प्रकार एक मूल (परम अक्षर ब्रह्म) रूप परमेश्वर की पूजा करने से सर्व देव विकसित होकर साधक को बिना माँगे फल देते रहेंगे। जिसका वर्णन गीता अध्याय 3 श्लोक 10 से 15 में भी है। इस प्रकार ज्ञान होने पर साधक का प्रयोजन उसी प्रकार अन्य देवताओं से रह जाता है जैसे झील की प्राप्ति के पश्चात् छोटे जलाश्य में रह जाता है। छोटे जलाश्य पर आश्रित को ज्ञान होता है कि यदि एक वर्ष बारिश नहीं हुई तो छोटे तालाब का जल समाप्त हो जाएगा। उस पर आश्रित भी संकट में पड़ जाऐंगे। झील के विषय में ज्ञान है कि यदि दस वर्ष भी बारिश न हो तो भी जल समाप्त नहीं होता। वह व्यक्ति छोटे जलाश्य को छोड़कर तुरंत बड़े जलाश्य पर आश्रित हो जाता है। भले ही छोटे जलाशय जल पीने में झील के जल जैसा ही स्वादिष्ट है, परंतु पर्याप्त व चिर स्थाई नहीं है। इसी प्रकार अन्य देवताओं (रजगुण ब्रह्मा जी, सतगुण विष्णु जी तथा तमगुण शिव जी) की भक्ति से मिलने वाले स्वर्ग का सुख बुरा नहीं है, परंतु क्षणिक है, पर्याप्त नहीं है। इन देवताओं तथा इनके अतिरिक्त किसी भी देवी-देवता, पित्तर व भूत पूजा करना गीता अध्याय 7 श्लोक 12 से 15, 20 से 23 में मना किया है। इसलिए भी इनकी भक्ति करना शास्त्र विरूद्ध होने से व्यर्थ है जिसका गीता अध्याय 16 श्लोक 23,24 में प्रमाण है। कहा है कि शास्त्र विधि को त्यागकर मनमाना आचरण करने वालों को न तो सुख प्राप्त होता है, न सिद्धि प्राप्त होती है और न ही परम गति यानि पूर्ण मोक्ष की प्राप्ति होती है अर्थात् व्यर्थ प्रयत्न है।(गीता अध्याय 16 श्लोक 23) इससे तेरे लिए अर्जुन! कर्तव्य यानि जो भक्ति कर्म करने चाहिऐ और अकर्तव्य यानि जो भक्ति कर्म न करने चाहिऐ, उसके लिए शास्त्र ही प्रमाण हैं यानि शास्त्रों को आधार मानकर निर्णय लेकर शास्त्रों में वर्णित साधना करना योग्य है।(गीता अध्याय 16 श्लोक 24) Watch Factful Debates Yt
whatsaap status - गीता अध्याय 45 {    व 2 तश श्लोक 7 16-17 13122 (रजगुण) शिव   (तमगुण) बह्मा विष्णु (सतगुण) క कबीर हे अक्षर पुरुष एक निरंजन बाकी डार। तीनों देवा शाखा हिं डार 2 पात रूप ससारी ] ब्रह्म अर्थात 8R डार ~ೆಕ  क्षर पुरुष (कालब्रह्म) নেনা अक्षर ब्रह्म अर्थात (39ಷ)] तना अक्षर पुरुष कबीर साहेब (मूल जड़) साधना शास्त्रानुकूल भक्ति रूपी पौधा अर्थात सीधा बीजा हुआ गीता अध्याय 45 {    व 2 तश श्लोक 7 16-17 13122 (रजगुण) शिव   (तमगुण) बह्मा विष्णु (सतगुण) క कबीर हे अक्षर पुरुष एक निरंजन बाकी डार। तीनों देवा शाखा हिं डार 2 पात रूप ससारी ] ब्रह्म अर्थात 8R डार ~ೆಕ  क्षर पुरुष (कालब्रह्म) নেনা अक्षर ब्रह्म अर्थात (39ಷ)] तना अक्षर पुरुष कबीर साहेब (मूल जड़) साधना शास्त्रानुकूल भक्ति रूपी पौधा अर्थात सीधा बीजा हुआ - ShareChat
https://youtube.com/live/v-DPRA3ujWw?si=SezV64P6DCfyfSzo #whatsaap status
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#whatsaap status #Kalyug_Mein_SatyugKiShuruat6 सुदामा केवल कृष्ण भक्त नहीं थे? अगले जन्म की कहानी खोलती है बड़ा रहस्य। देखिए "कलयुग में सतयुग की शुरुआत — भाग 6"। Watch Factful Debates Yt
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01:34
#whatsaap status #GodMorningMonday #कलयुगमेंसतयुगकीशुरुआत_भाग6 सुदामा, कृष्ण के भक्त नहीं थे। यह बात खुद सुदामा की आत्मा ने अगले जन्म में लिखकर बताई। जानने के लिए देखिए कलयुग में सतयुग की शुरुआत — भाग 6, Factful Debates यूट्यूब चैनल पर Visit Factful Debates YT
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01:50
#whatsaap status How will peace come to the world? To find out, watch *The Dawn of the Golden Age in the Age of Kali* — Part 6, on the Factful Debates YouTube channel. #VisitFactfulDebatesYT #Haryana #flood #floodrelief #flooding #farmer #AnnapurnaMuhimSantRampalJi #kalyug #satyug #goldenage #help #humanity #AnnapurnaMuhim #SantRampalJiMaharaj #TrueGuru #TatvdarshiSant
whatsaap status - নিংত্র ম থানি নথা आपसी भाईचारा कैसे स्थापित होगा? कलयुग में सतयुग की शुरुआत |l भाग - ६ विश्व में शांति लाने का क्या है आध्यात्मिक और वैज्ञानिक मॉडल? SPIRITUALITY SCIENCE WORLD PEACE जानने के लिए देखिए कलयुग में सतयुग कीशुरुआत भाग 6 विज्ञान आर तकनीक का सदुपयोग आध्यात्मक जागरुकता साथ संतुलन একৃনি ক} Fd Neorl Factful Debates यूट्यूब चैनल पर নিংত্র ম থানি নথা आपसी भाईचारा कैसे स्थापित होगा? कलयुग में सतयुग की शुरुआत |l भाग - ६ विश्व में शांति लाने का क्या है आध्यात्मिक और वैज्ञानिक मॉडल? SPIRITUALITY SCIENCE WORLD PEACE जानने के लिए देखिए कलयुग में सतयुग कीशुरुआत भाग 6 विज्ञान आर तकनीक का सदुपयोग आध्यात्मक जागरुकता साथ संतुलन একৃনি ক} Fd Neorl Factful Debates यूट्यूब चैनल पर - ShareChat