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#whatsaap status कबीर साहेब ने बताया—सतलोक ही अंतिम सत्य है। संत रामपाल जी महाराज आज उसी सत्य को समझा रहे हैं। हिंदू राजा बीर सिंह बघेल और मुस्लिम राजा बिजली खाँ—दोनों कबीर साहेब के शिष्य थे। कबीर साहेब ने कहा—जो मिलेगा आधा-आधा बाँट लेना। कबीर साहेब ने लाखों लोगों के सामने इतिहास रच दिया। आज जरूरत है उस सच्चे ज्ञान को समझने की। #पहचान_अविनाशी_प्रभु_की #GodKabirNirvanDiwas #कबीर_परमेश्वर_निर्वाण_दिवस #NirvanDiwasOfGodKabir #moksha #salvation #ganges #maghar #kashi #banaras #varanasi #nirvana #jaishreeram #hanumanchalisa #sanatandharma #SantRampalJiMaharaj
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#whatsaap status #पहचान_अविनाशी_प्रभु_की Kabir Sahib Ji = The greatest proof of religious unity. Jai Kabir Sahib 🙏 The message of truth, courage, and Satlok is still alive today. 5Days Left For Nirvan Diwas
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#whatsaap status #पहचान_अविनाशी_प्रभु_की Kabir Sahib Ji = The greatest proof of religious unity. Jai Kabir Sahib 🙏 The message of truth, courage, and Satlok is still alive today. 5Days Left For Nirvan Diwas
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#whatsaap status #SacrificedAll_LostMoksha गीता कहती है— तद्विद्धि प्रणिपातेन… तत्त्वदर्शी संत के बिना ज्ञान नहीं। पूर्ण संत की शरण में गए बिना मुक्ति संभव नहीं। अधिक जानकारी के लिए Sant Rampal Ji Maharaj App डाउनलोड करें। God KabirJi Nirvan Diwas
whatsaap status - EVEN THE ULTIMATE GACRIFICE OFTHESELF DID NOT BRING HOKSHA 0 ITTITTTTITITTISTETTT At one time the deceitful priests of Koshi propogoted the belief thot deothin Koshi ensures 0 they toheaven Conversely direct claimed that poth dyingin Moghor prevents solvotion leading one to be reborn in the form of a donkey: The Supreme God Kobir Sohib Ji would tell them engoge in true worship;your place of death--beit Kashior Maghar does not dictateyour soul's journey Sant Rampal Ji YOUTUBE free Buuk :  Maharaj CHANNEL 7496801825 | @ SaintRampalJiMahnra EVEN THE ULTIMATE GACRIFICE OFTHESELF DID NOT BRING HOKSHA 0 ITTITTTTITITTISTETTT At one time the deceitful priests of Koshi propogoted the belief thot deothin Koshi ensures 0 they toheaven Conversely direct claimed that poth dyingin Moghor prevents solvotion leading one to be reborn in the form of a donkey: The Supreme God Kobir Sohib Ji would tell them engoge in true worship;your place of death--beit Kashior Maghar does not dictateyour soul's journey Sant Rampal Ji YOUTUBE free Buuk :  Maharaj CHANNEL 7496801825 | @ SaintRampalJiMahnra - ShareChat
#whatsaap status #गला_भी_कटाया_मोक्ष_नहींपाया True spiritual practice = a true Guru + scriptural evidence. Garibdas Ji's message is clear: Without devotion, there is nothing, even if it is Kashi or Karaunt. God Kabir Nirvan Diwas
whatsaap status - Even theultimate sacrifice of the self didnot bringMokshd Kobir, Tilbhor mochhli khoyke koti gou de doon Kashi karaut le marai tau bhi narak nidaan killing God kobir Sohib Ji teoches thot the sin of living being for food cannot be offset by charity Even the supreme act of giving away millions of cows in 'Gou Doon' becomes worthless if one consumes flesh No amount of religious penance; holy death in Kashi can save such even dyingd soul from the depths of hell Jagatguru Tattvadarshi Sant Rampal Ji Maharaj Sant Rampal Ji Free | YOUTUBE Boo Maharaj 7496801825 CHANNEL @S nIRamaaJah I .u Even theultimate sacrifice of the self didnot bringMokshd Kobir, Tilbhor mochhli khoyke koti gou de doon Kashi karaut le marai tau bhi narak nidaan killing God kobir Sohib Ji teoches thot the sin of living being for food cannot be offset by charity Even the supreme act of giving away millions of cows in 'Gou Doon' becomes worthless if one consumes flesh No amount of religious penance; holy death in Kashi can save such even dyingd soul from the depths of hell Jagatguru Tattvadarshi Sant Rampal Ji Maharaj Sant Rampal Ji Free | YOUTUBE Boo Maharaj 7496801825 CHANNEL @S nIRamaaJah I .u - ShareChat
#whatsaap status #GodMorningTuesday #Annapurna_Muhim_SantRampalJi . काशी तज गुरु मगहर गये, दोनों दीन के पीर। कोई गाड़े कोई अग्नि जरावे, ढुंढा ना पाया शरीर॥ आदरणीय मलूकदास जी ने बताया कि परमेश्वर ने भ्रम तोड़ने के लिए काशी छोड़कर मगहर स्थान से अपने निज धाम सतलोक गमन किया। उनका शरीर नहीं मिला था अर्थात कबीर परमेश्वर अविनाशी है। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज Visit Annapurna Muhim YouTube
whatsaap status - SATOKASHRANA TUO काशी तज गुरू मगहर गये , दोनों दीन के पीर | कोई गाड़े कौई अग्नि जरावे , ढुंसा ना पाया शरीर |l -91 7198801825 Gel Frce Book SATLOK ASHRAM MUNDKA OFFICIAL FOLLOW US ON : SAMUNDKADELHI SADELHIMUNDKA SATOKASHRANA TUO काशी तज गुरू मगहर गये , दोनों दीन के पीर | कोई गाड़े कौई अग्नि जरावे , ढुंसा ना पाया शरीर |l -91 7198801825 Gel Frce Book SATLOK ASHRAM MUNDKA OFFICIAL FOLLOW US ON : SAMUNDKADELHI SADELHIMUNDKA - ShareChat
#whatsaap status #GodMorningMonday #Annapurna_Muhim_SantRampalJi ‘. ‘सेऊ-सम्मन की कथा’’ एक समय साहेब कबीर अपने भक्त सम्मन के यहाँ अचानक दो सेवकों कमाल व शेखफरीद के साथ पहुँच गए। सम्मन के घर कुल तीन प्राणी थे। सम्मन, सम्मन की पत्नी नेकी और सम्मन का पुत्र सेऊ। भक्त सम्मन इतना गरीब था कि कई बार अन्न भी घर पर नहीं होता था। सारा परिवार भूखा सो जाता था। आज वही दिन था। भक्त सम्मन ने अपने गुरुदेव कबीर साहेब से पूछा कि साहेब खाने का विचार बताएँ, खाना कब खाओगे? कबीर साहेब ने कहा कि भाई भूख लगी है। भोजन बनाओ। सम्मन अन्दर घर में जा कर अपनी पत्नी नेकी से बोला कि अपने घर अपने गुरुदेव भगवान आए हैं। जल्दी से भोजन तैयार करो। तब नेकी ने कहा कि घर पर अन्न का एक दाना भी नहीं है। सम्मन ने कहा पड़ोस वालों से उधार मांग लाओ। नेकी ने कहा कि मैं मांगने गई थी लेकिन किसी ने भी उधार आटा नहीं दिया। उन्होंने आटा होते हुए भी जान बूझ कर नहीं दिया और कह रहे हैं कि आज तुम्हारे घर तुम्हारे गुरु जी आए हैं। तुम कहा करते थे कि हमारे गुरु जी भगवान हैं। आपके गुरु जी भगवान हैं तो तुम्हें माँगने की आवश्यकता क्यों पड़ी? ये ही भर देगें तुम्हारे घर को आदि-2 कह कर मजाक करने लगे। सम्मन ने कहा लाओ आपका चीर गिरवी रख कर तीन सेर आटा ले आता हूँ। नेकी ने कहा यह चीर फटा हुआ है। इसे कोई गिरवी नहीं रखता। सम्मन सोच में पड़ जाता है और अपने दुर्भाग्य को कोसते हुए कहता है कि मैं कितना अभागा हूँ। आज घर भगवान आए और मैं उनको भोजन भी नहीं करवा सकता। हे परमात्मा! ऐसे पापी प्राणी को पृथ्वी पर क्यों भेजा। मैं इतना नीच रहा हूँगा कि पिछले जन्म में कोई पुण्य नहीं किया। अब सतगुरु को क्या मुंह दिखाऊँ? यह कह कर अन्दर कोठे में जा कर फूट-2 कर रोने लगा। तब उसकी पत्नी नेकी कहने लगी कि हिम्मत करो। रोवो मत। परमात्मा आए हैं। इन्हें ठेस पहुँचेगी। सोचेंगे हमारे आने से तंग आ कर रो रहा है। सम्मन चुप हुआ। फिर नेकी ने कहा आज रात्रि में दोनों पिता पुत्र जा कर तीन सेर आटा चुरा कर लाना। केवल संतों व भक्तों के लिए। तब लड़का सेऊ बोला माँ - गुरु जी कहते हैं चोरी करना पाप है। फिर आप भी मुझे शिक्षा दिया करती कि बेटा कभी चोरी नहीं करनी चाहिए। जो चोरी करते हैं उनका सर्वनाश होता है। आज आप यह क्या कह रही हो माँ? क्या हम पाप करेंगे माँ? अपना भजन नष्ट हो जाएगा। माँ हम चौरासी लाख योनियों में कष्ट पाएंगे। ऐसा मत कहो माँ। आपको मेरी कसम। तब नेकी ने कहा पुत्र तुम ठीक कह रहे हो। चोरी करना पाप है, परंतु पुत्र हम अपने लिए नहीं बल्कि संतों के लिए करेंगे। जिस नगर में निर्वाह किया है, इसकी रक्षा के लिए चोरी करेंगे। नेकी ने कहा बेटा - ये नगर के लोग अपने से बहुत चिड़ते हैं। हमने इनको कहा था कि हमारे गुरुदेव कबीर साहेब पृथ्वी पर आए हुए हैं। इन्होंने एक मृतक गऊ तथा उसके बच्चे को जीवित कर दिया था जिसके टुकड़े सिंकदर लौधी ने करवाए थे। एक लड़के तथा एक लड़की को जीवित कर दिया। सिंकदर लौधी राजा का जलन का रोग समाप्त कर दिया तथा श्री स्वामी रामानन्द जी (कबीर साहेब के गुरुदेव) को सिंकदर लौधी ने तलवार से कत्ल कर दिया था वे भी कबीर साहेब ने जीवित कर दिए थे। इस बात का ये नगर वाले मजाक कर रहे हैं और कहते हैं कि आपके गुरु कबीर तो भगवान हैं तुम्हारे घर को भी अन्न से भर देंगे। फिर क्यों अन्न के लिए घर घर डोलती फिरती हो? बेटा! ये नादान प्राणी हैं। यदि आज साहेब कबीर इस नगरी का अन्न खाए बिना चले गए तो काल भगवान भी इतना नाराज हो जाएगा कि कहीं इस नगरी को समाप्त न कर दे। हे पुत्रा! इस अनर्थ को बचाने के लिए अन्न की चोरी करनी है। हम नहीं खाएंगे। केवल अपने सतगुरु तथा आए भक्तों को प्रसाद बना कर खिलाएगें। यह कह कर नेकी की आँखों में आँसू भर आए और कहा पुत्र नाटियो मत अर्थात मना नहीं करना। तब अपनी माँ की आँखों के आँसू पौंछता हुआ लड़का सेऊ कहने लगा - माँ रो मत, आपका पुत्र आपके आदेश का पालन करेगा। माँ आप तो बहुत अच्छी हो न। अर्ध रात्रि के समय दोनों पिता सम्मन पुत्र सेऊ चोरी करने के लिए चल दिए। एक सेठ की दुकान की दीवार में छिद्र किया। सम्मन ने कहा कि पुत्र मैं अन्दर जाता हूँ। यदि कोई व्यक्ति आए तो धीरे से कह देना मैं आपको आटा पकड़ा दूंगा और ले कर भाग जाना। तब सेऊ ने कहा नहीं पिता जी, मैं अन्दर जाऊँगा। यदि मैं पकड़ा भी गया तो बच्चा समझ कर माफ कर दिया जाऊँगा। सम्मन ने कहा पुत्र! यदि आपको पकड़ कर मार दिया तो मैं और तेरी माँ कैसे जीवित रहेंगे? सेऊ प्रार्थना करता हुआ छिद्र द्वार से अन्दर दुकान में प्रवेश कर गया। तब सम्मन ने कहा पुत्र केवल तीन सेर आटा लाना, अधिक नहीं। लड़का सेऊ लगभग तीन सेर आटा अपनी फटी पुरानी चद्दर में बाँध कर चलने लगा तो अंधेरे में तराजू के पलड़े पर पैर रखा गया। जोर दार आवाज हुई जिससे दुकानदार जाग गया और सेऊ को चोर-चोर करके पकड़ लिया और रस्से से बाँध दिया। इससे पहले सेऊ ने वह चद्दर में बँधा हुआ आटा उस छिद्र से बाहर फैंक दिया और कहा पिता जी मुझे सेठ ने पकड़ लिया है। आप आटा ले जाओ और सतगुरु व भक्तों को भोजन करवाना। मेरी चिंता मत करना। आटा ले कर सम्मन घर पर गया तो सेऊ को न पा कर नेकी ने पूछा लड़का कहाँ है? सम्मन ने कहा उसे सेठ जी ने पकड़ कर थम्ब से बाँध दिया। तब नेकी ने कहा कि आप वापिस जाओ और लड़के सेऊ का सिर काट लाओ। क्योंकि लड़के को पहचान कर अपने घर पर लाएंगे। फिर सतगुरु को देख कर नगर वाले कहेंगे कि ये हैं जो चोरी करवाते हैं। हो सकता है सतगुरु देव को परेशान करें। हम पापी प्राणी अपने दाता को भोजन के स्थान पर कैद न दिखा दें। यह कह कर माँ अपने बेटे का सिर काटने के लिए अपने पति से कह रही है वह भी गुरुदेव जी के लिए। सम्मन ने हाथ में कर्द लिया तथा दुकान पर जा कर कहा सेऊ बेटा, एक बार गर्दन बाहर निकाल। कुछ जरूरी बातें करनी हैं। कल तो हम नहीं मिल पाएंगे। हो सकता है ये आपको मरवा दें। तब सेऊ उस सेठ से कहता है कि सेठ जी बाहर मेरा बाप खड़ा है। कोई जरूरी बात करना चाहता है। कृप्या करके मेरे रस्से को इतना ढीला कर दो कि मेरी गर्दन छिद्र से बाहर निकल जाए। तब सेठ ने उसकी बात कोस्वीकार करके रस्सा इतना ढीला कर दिया कि गर्दन आसानी से बाहर निकल गई। तब सेऊ ने कहा पिता जी मेरी गर्दन काट दो। यदि आप मेरी गर्दन नहीं काटोगे तो आप मेरे पिता नहीं हो। मेरे को पहचानकर घर तक सेठ पहुँचेगा। राजा तक इसकी पहुँच है। यह अपने गुरूदेव को मरवा देगा। पिताजी हम क्या मुख दिखाऐंगे? सम्मन ने एकदम करद मारी और सिर काट कर घर ले गया। सेठ ने लड़के का कत्ल हुआ देख कर उसके शव को घसीट कर साथ ही एक पजावा (ईटें पकाने का भट्ठा) था उस खण्डहर में डाल गया। जब नेकी ने सम्मन से कहा कि आप वापिस जाओ और लड़के का धड़ भी बाहर मिलेगा उठा लाओ, तब सम्मन दुकान पर पहुँचा। उस समय तक सेठ ने उस दुकान की दीवार के छिद्र को बंद कर लिया था। सम्मन ने शव की घसीट (चिन्हों) को देखते हुए शव के पास पहुँच कर उसे उठा लाया। ला कर अन्दर कोठे में रख कर ऊपर पुराने कपड़े (गुदड़) डाल दिए और सिर को अलमारी के ताख (एक हिस्से) में रख कर खिड़की बंद कर दी। कुछ समय के बाद सूर्य उदय हुआ। नेकी ने स्नान किया। फिर सतगुरु व भक्तों का खाना बनाया। फिर सतगुरु कबीर साहेब जी से भोजन करने की प्रार्थना की। नेकी ने साहेब कबीर व दोनों भक्त (कमाल तथा शेख फरीद), तीनों के सामने आदर के साथ भोजन परोस दिया। साहेब कबीर ने कहा इसे छः दोनों में डाल कर आप तीनों भी साथ बैठो। यह प्रेम प्रसाद पाओ। बहुत प्रार्थना करने पर भी साहेब कबीर नहीं माने तो छः दौनों में प्रसाद परोसा गया। पाँचों प्रसाद के लिए बैठ गए। तब साहेब कबीर ने कहा कि कबीर, आओ सेऊ जीम लो, यह प्रसाद प्रेम। शीश कटत हैं चोरों के, साधों के नित्य क्षेम।। साहेब कबीर ने कहा कि सेऊ आओ भोजन पाओ। सिर तो चोरों के कटते हैं। संतो भक्तों के नहीं। उनको तो क्षमा होती है। साहेब कबीर ने इतना कहा था उसी समय सेऊ के धड़ पर सिर लग गया। कटे हुए का कोई निशान भी गर्दन पर नहीं था तथा पंगत (पंक्ति) में बैठ कर भोजन करने लगा। गरीब, सेऊ धड़ पर शीश चढ़ा, बैठा पंगत मांही। नहीं घरैरा गर्दन पर, औह सेऊ अक नांही।। सम्मन तथा नेकी ने देखा कि गर्दन पर कोई चिन्ह भी नहीं है। लड़का जीवित कैसे हुआ? शंका हुई कि यह वही सेऊ है या कोई और। अन्दर जा कर देखा तो वहाँ शव तथा शीश नहीं था। केवल रक्त के छीटें लगे थे जो इस पापी मन के संश्य को समाप्त करने के लिए प्रमाण बकाया था। ऐसी-2 बहुत लीलाएँ साहेब कबीर (कविरग्नि) ने की हैं जिनसे यह स्वसिद्ध है कि ये ही पूर्ण परमात्मा हैं। सामवेद संख्या नं. 822 तथा ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 16 मंत्रा 2 में कहा है कि कविर्देव अपने विधिवत् साधक साथी की आयु बढ़ा देता है। Visit Annapurna Muhim YouTube
whatsaap status - सतभक्ति सन्देश गुरु का परमात्मा मानने से मोक्ष संभव है, अन्यथा नहीं। बन्दीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज कबीर गुरू को मानुष कर जानते, वे नर कहिए अंधा होयें সমাংস; 3যা তাম ক কতাা दुःखी SPIRITUAL LEADER SanT RamPAL Ji m@n @ @SAINTRAMPALJIM SUPREHEGODORG SAINT RAMPAL JI MAHARAJ सतभक्ति सन्देश गुरु का परमात्मा मानने से मोक्ष संभव है, अन्यथा नहीं। बन्दीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज कबीर गुरू को मानुष कर जानते, वे नर कहिए अंधा होयें সমাংস; 3যা তাম ক কতাা दुःखी SPIRITUAL LEADER SanT RamPAL Ji m@n @ @SAINTRAMPALJIM SUPREHEGODORG SAINT RAMPAL JI MAHARAJ - ShareChat
#whatsaap status #Annapurna_Muhim_SantRampalJi अन्नपूर्णा मुहिम से हजारों परिवारों के चूल्हे फिर से जल उठे। अधिक जानकारी के लिए Visit Annapurna Muhim YouTube
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#whatsaap status #GodNightFriday #MakaraSankranti26 . कबीर साहिब जी भगवान है पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब जी चारों युगों में आए हैं। सृष्टी व वेदों की रचना से पूर्व भी अनामी लोक में मानव सदृश कविर्देव नाम से विद्यमान थे। परमात्मा कबीर साहिब जी ने फिर सतलोक की रचना की, बाद में परब्रह्म, ब्रह्म के लोकों व वेदों की रचना की इसलिए वेदों में कविर्देव का विवरण है। यजुर्वेद के अध्याय नं. 29 के श्लोक नं. 25 जिस समय पूर्ण परमात्मा प्रकट होता है उस समय सर्व ऋषि व सन्त जन शास्त्र विधि त्याग कर मनमाना आचरण अर्थात् पूजा कर रहे होते हैं। तब अपने तत्वज्ञान का संदेशवाहक बन कर स्वयं ही कबीर प्रभु ही आता है। कबीर परमेश्वर चारों युगों में अपने सत्य ज्ञान का प्रचार करने आते हैं। सतगुरु पुरुष कबीर हैं, चारों युग प्रवान। झूठे गुरुवा मर गए, हो गए भूत मसान।। श्रीमद्भगवद गीता अध्याय 8 का श्लोक 3 में गीता ज्ञान दाता ब्रह्म भगवान ने कहा है कि वह परम अक्षर ‘ब्रह्म‘ है जो जीवात्मा के साथ सदा रहने वाला है। वह परम अक्षर ब्रह्म गीता ज्ञान दाता से अन्य है, वह कबीर परमात्मा हैं। परमात्मा शिशु रूप में प्रकट होकर लीला करता है। तब उनकी परवरिश कंवारी गायों के दूध से होती है। ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 यह लीला कबीर परमेश्वर ही आकर करते हैं। ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 17 में कहा गया है कि कविर्देव शिशु रूप धारण कर लेता है। लीला करता हुआ बड़ा होता है। कविताओं द्वारा तत्वज्ञान वर्णन करने के कारण कवि की पदवी प्राप्त करता है अर्थात् उसे ऋषि, सन्त व कवि कहने लग जाते हैं, वास्तव में वह पूर्ण परमात्मा कविर् (कबीर साहेब जी) ही है। पूर्ण परमात्मा कविर्देव (कबीर परमेश्वर) वेदों के ज्ञान से भी पूर्व सतलोक में विद्यमान थे तथा अपना वास्तविक ज्ञान (तत्वज्ञान) देने के लिए चारों युगों में भी स्वयं प्रकट हुए हैं। सतयुग में सतसुकृत नाम से, त्रेतायुग में मुनिन्द्र नाम से, द्वापर युग में करूणामय नाम से तथा कलयुग में वास्तविक कविर्देव (कबीर प्रभु) नाम से प्रकट हुए हैं। कबीर परमात्मा अन्य रूप धारण करके कभी भी प्रकट होकर अपनी लीला करके अन्तर्ध्यान हो जाते हैं। उस समय लीला करने आए परमेश्वर को प्रभु चाहने वाले श्रद्धालु नहीं पहचान पाते, क्योंकि सर्व महर्षियों व संत कहलाने वालों ने प्रभु को निराकार बताया है। वास्तव में परमात्मा आकार में है। मनुष्य सदृश शरीर युक्त है। परमेश्वर का शरीर नाड़ियों के योग से बना पांच तत्व का नहीं है। एक नूर तत्व से बना है। पूर्ण परमात्मा जब चाहे यहाँ प्रकट हो जाते हैं वे कभी मां से जन्म नहीं लेते क्योंकि वे सर्व के उत्पत्ति करता हैं। ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 अभी इमं अध्न्या उत श्रीणन्ति धेनवः शिशुम्। सोममिन्द्राय पातवे।।9।। पूर्ण परमात्मा अमर पुरुष जब लीला करता हुआ बालक रूप धारण करके स्वयं प्रकट होता है उस समय कंवारी गाय अपने आप दूध देती है जिससे उस पूर्ण प्रभु की परवरिश होती है। ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 17 शिशुम् जज्ञानम् हर्य तम् मृजन्ति शुम्भन्ति वह्निमरूतः गणेन। कविर्गीर्भि काव्येना कविर् सन्त् सोमः पवित्रम् अत्येति रेभन्।। विलक्षण मनुष्य के बच्चे के रूप में प्रकट होकर पूर्ण परमात्मा कविर्देव अपने वास्तविक ज्ञानको अपनी कविर्गिभिः अर्थात् कबीर बाणी द्वारा पुण्यात्मा अनुयाइयों को कवि रूप में कविताओं, लोकोक्तियों के द्वारा वर्णन करता है। वह स्वयं सतपुरुष कबीर ही होता है। कबीर परमात्मा हर युग में आते हैं ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 18 कविर्देव शिशु रूप धारण कर लेता है। लीला करता हुआ बड़ा होता है। कविताओं द्वारा तत्वज्ञान वर्णन करने के कारण कवि की पदवी प्राप्त करता है अर्थात् उसे कवि कहने लग जाते हैं, वास्तव में वह पूर्ण परमात्मा कविर् (कबीर प्रभु) ही है। परमात्मा कबीर जी सतयुग में सत सुकृत नाम से प्रकट हुए थे। उस समय अपनी एक प्यारी आत्मा सहते जी को अपना शिष्य बनाया ओर अमृत ज्ञान समझाकर सतलोक का वासी बनाया। त्रेता युग में परमात्मा कबीर मुनींद्र नाम से आए थे उस समय एक लीलामय तरीके से बंके नाम की एक प्यारी आत्मा को अपनी शरण में लिया,सत्य ज्ञान समझाया ओर पार किया। परमेश्वर कबीर साहिब जी चारों युगों में नामांतर करके शिशु रूप में प्रकट होते हैं और एक-एक शिष्य बनाते हैं जिससे कबीर पंथ का प्रचार होता है। सतयुग - सहते जीत्रेता - बंके जी द्वापर - चतुर्भुज जी कलियुग - धर्मदास जी कलयुग में कबीर परमेश्वर अपने वास्तविक नाम कबीर रूप में काशी नगरी में लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर अवतरित हुए। कलयुग में निसंतान दंपति नीरू और नीमा ने उनका पालन पोषण किया। परमेश्वर कबीर जी त्रेतायुग में ऋषि मुनीन्द्र जी के रूप में लीला करने आए तब हनुमान जी से मिले। तथा सतलोक के बारे में बताया हनुमानजी को विश्वास हुआ कि ये परमेश्वर हैं। सत्यलोक सुख का स्थान है। परमेश्वर मुनीन्द्र जी से दीक्षा ली। अपना जीवन धन्य किया। मुक्ति के अधिकारी हुए। द्वापर युग में कबीर परमेश्वर की दया से पांडवों का अश्वमेध यज्ञ संपन्न हुआ। पांडवों की अश्वमेघ यज्ञ में अनेक ऋषि, महर्षि, मंडलेश्वर उपस्थित थे यहां तक कि भगवान कृष्ण भी उपस्थित थे फिर भी उनका शंख नहीं बजा। कबीर परमेश्वर ने सुदर्शन सुपच वाल्मीकि के रूप में शंख बजाया और पांडवों का यज्ञ संपन्न किया।गरीबदास जी महाराज की वाणी में इसका प्रमाण है गरीब ~सुपच रुप धरि आईया, सतगुरु पुरुष कबीर। तीन लोक की मेदनी, सुर नर मुनि जन भीर।। कबीर साहेब हीं पूर्ण परमात्मा हैं। लगभग एक दर्जन संतो ने इनकी गवाही ठोककर दी है।आएं देखें परमात्मा प्राप्त संतो की वाणी में क्या प्रमाण है। 1. सतगुरु पुरुष कबीर हैं, चारों युग प्रवान। झूठे गुरुवा मर गए, हो गए भूत मसान।। -गरीबदास जी अनंत कोटि ब्रम्हांड में, बंदीछोड़ कहाये। सो तो पुरष कबीर है, जननी जने न माय।। -गरीबदास जी हम सुल्तानी नानक तारे, दादु को उपदेश दिया। जाति जुलाहा भेद न पाया,कशी मे कबीर हुआ। -गरीबदास जी 2. और संत सब कूप हैं, केते झरिता नीर। दादू अगम अपार है, दरिया सत्य कबीर।। -दादु दयाल जी जिन मोको निज नाम दिया,सोई सतगुरु हमार।भ दादु दूसरा कोई नहीं, कबीर सृजनहार।। -दादु दयाल जी 3. खालक आदम सिरजिआ आलम बडा कबीर॥ काइम दिइम कुदरती सिर पीरा दे पीर॥ सजदे करे खुदाई नू आलम बडा कबीर॥ -नानक जी यक अर्ज गुफ्तम पेश तोदर कून करतार। हक्का कबीर करीम तू बेऐब परवरदिगार।। -नानक जी नानक नीच कह विचार, धाणक रूप रहा करतार। -नानक जी 4. वाणी अरबो खरवो, ग्रन्थ कोटी हजार। करता पुरुष कबीर है, रहै नाभे विचार।। नाभादास जी 5. साहेब कबीर समर्थ है, आदी अन्त सर्व काल। ज्ञान गम्य से दे दीया, कहै रैदास दयाल॥ -रविदास जी 6. नौ नाथ चौरसी सिद्धा, इनका अन्धा ज्ञान। अविचल ज्ञान कबीर का, यो गति विरला जान॥ -गोरखनाथ जी 7. बाजा बाजा रहितका, परा नगरमे शोर। सतगुरू खसम कबीर है, नजर न आवै और॥ -धर्मदास जी 8. सन्त अनेक सन्सार मे, सतगुरू सत्य कबीर। जगजीवन आप कहत है, सुरती निरती के तीर॥ -जगजीवन जी 9. तुम स्वामी मै बाल बुद्धि, भर्म कर्म किये नाश। कहै रामानन्द निज हमरा दृढ़ विश्वास।। -रामानन्द जी 10 जपो रे मन साहिब नाम कबीर एक समय सतगुरू बंशी बजाई काल इन्द्री के तीर - मुलक दास जी 11. बंदीछोड़ हमारा नामम्, अजर अमर अस्थिर ठामम्।। -कबीर साहिब तारण तरण अभय पद दाता, मैं हूँ कबीर अविनाशी। -कबीर साहिब कबीर इस संसार को, समझांऊ के बार । पूंछ जो पकङे भेड़ की, उतरया चाहे पार ॥ -कबीर साहिब జ్ఞాన గంగా
whatsaap status - कबीर, यद्यपि उत्तम कर्म करि, रहै रहित अभिमान| साधु देखी सिर नावते, करते आदर मान।। भावार्थ अभिमान त्यागकर श्रेष्ठ _ कर्म करने चाहिऐं | संत, भक्त को आता देखकर शीश झुकाकर प्रणाम चाहिए। ೯OTIORR सतगुरु रामपाल जी महाराज SupremeGod.org Satlok Ashram BETUL कबीर, यद्यपि उत्तम कर्म करि, रहै रहित अभिमान| साधु देखी सिर नावते, करते आदर मान।। भावार्थ अभिमान त्यागकर श्रेष्ठ _ कर्म करने चाहिऐं | संत, भक्त को आता देखकर शीश झुकाकर प्रणाम चाहिए। ೯OTIORR सतगुरु रामपाल जी महाराज SupremeGod.org Satlok Ashram BETUL - ShareChat
#whatsaap status #GodNightThursday #MakaraSankranti26 . ‘रंका-बंका का प्रभु पर अटल विश्वास’ एक दिन रंका तथा बंका दोनों पति-पत्नी गुरू जी के सत्संग में गए हुए थे जो कुछ दूरी पर किसी भक्त के घर पर चल रहा था। बेटी अवंका झोंपड़ी के बाहर एक चारपाई परबैठी थी। अचानक झोंपड़ी में आग लग गई। सर्व सामान जलकर राख हो गया। अवंका दौड़ी-दौड़ी सत्संग में गई। गुरू जी प्रवचन कर रहे थे। अवंका ने कहा कि माँ! झोंपड़ी में आग लग गई। सब जलकर राख हो गया। सब श्रोताओं का ध्यान अवंका की बातों पर हो गया। माँ बंका जी ने पूछा कि क्या बचा है? अवंका ने बताया कि केवल एक खटिया बची है जो बाहर थी। माँ बंका ने कहा कि बेटी जा, उस खाट को भी उसी आग में डाल दे और आकर सत्संग सुन ले। कुछ जलने को रहेगा ही नहीं तो सत्संग में भंग ही नहीं पड़ेगा। बेटी सत्संग हमारा धन है। यदि यह जल गया तो अपना सर्वनाश हो जाएगा। लड़की वापिस गई और उस चारपाई को उठाया और उसी झोंपड़ी की आग में डालकर आ गई और सत्संग में बैठ गई। सत्संग के पश्चात् अपने ठिकाने पर गए। वहाँ एक वृक्ष था। उसके नीचे वह सामान जो जलने का नहीं था जैसे बर्तन, घड़ा आदि-आदि पड़े थे। उस वृक्ष के नीचे बैठकर भजन करने लगे। उनको पता नहीं चला कि कब सो गये? सुबह जागे तो उस स्थान पर नई झोंपड़ी लगी थी। सर्व सामान रखा था। आकाशवाणी हुई कि भक्तो! आप परीक्षा में सफल हुए। यह भेंट मेरी ओर से है, इसे स्वीकार करो। तीनों सदस्य उठकर पहले आश्रम में गए और झोंपड़ी जलने तथा पुनः बनने की घटना बताई तथा कहा कि हे प्रभु! हम तो नामदेव की तरह ही आपको कष्ट दे रहे हैं। हम उसको नसीहत देते थे। आज वही मूर्खता हमने कर दी। सतगुरू जी ने कहा, हे भक्त परिवार! नामदेव उस समय मर्यादा में रहकर भक्ति नहीं कर रहा था। फिर भी उसकी पूर्व जन्म की भक्ति के प्रतिफल में उसके लिए अनहोनी करनी पड़ती थी जो मुझे कष्ट होता था। आप मर्यादा में रहकर भक्ति कर रहे हो। इसलिए आपकी आस्था परमात्मा में बनाए रखने के लिए अनहोनी की है। आग भी मैंने लगाई थी, आपका दृढ़ निश्चय देखकर झोंपड़ी भी मैंने बनाई है। आप उसे स्वीकार करें। परमात्मा की महिमा भक्त समाज में बनाए रखने के लिए ये परिचय (चमत्कार देकर परमात्मा की पहचान) देना अनिवार्य है। आपकी झोंपड़ी जीर्ण-शीर्ण थी। आप भक्ति में भंग होने के भय से नई बनाने में समय व्यर्थ करना नहीं चाहते थे। मैं आपके लिए पक्का मकान भी बना सकता हूँ। स्वर्ण का भी बना सकता हूँ क्योंकि आप प्रत्येक परीक्षा में सफल रहे हो। उस दिन रास्ते में धन मैंने ही डाला था। नामदेव मेरे साथ था। आप उस कुटी में रहें और परमात्मा की भक्ति करें। रंका-बंका ने उस मर्यादा का पालन किया :- कबीर, गुरू गोविंद दोनों खड़े, किसके लागूं पाय। बलिहारी गुरू आपणा, गोविन्द दियो बताय।। आकाशवाणी को परमात्मा की आज्ञा माना, परंतु गुरू जी के पास आकर गुरू जी की क्या आज्ञा है? यह गुरू पर बलिहारी होना है। गोविन्द (प्रभु) की आज्ञा स्वीकार्य नहीं हुई। गुरू की आज्ञा का पालन करके यहाँ भी परीक्षा में खरे उतरे। उस गाँव के व्यक्तियों ने भक्त रंका की कुटिया जलती तथा जलकर राख हुई देखी थी। सुबह नई और बड़ी जिसमें दो कक्ष थे, बनी देखी तो पूरा गाँव देखने आया। आसपास के क्षेत्र के स्त्री-पुरूष भी देखने आए। रंका-बंका की महिमा हुई तथा उनके गुरू जी की शरण में बहुत सारे गाँव तथा आसपास के व्यक्ति आए और अपना कल्याण करवाया। జ్ఞాన గంగా
whatsaap status - रंका बंका का प्रभु पर अटल विश्वास | मुक्तिबोध पुस्तक (८८) SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGOD.ORG in MAHARAJ SAINT RAMPAL JI रंका बंका का प्रभु पर अटल विश्वास | मुक्तिबोध पुस्तक (८८) SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGOD.ORG in MAHARAJ SAINT RAMPAL JI - ShareChat