Yogesh Sontakke
ShareChat
click to see wallet page
@yogeshsontakke
yogeshsontakke
Yogesh Sontakke
@yogeshsontakke
मैत्री, मस्ती आणि शेअरचॅट 👌
#बुद्ध सकाळ 🙏नमो बुद्धाय 🌺
बुद्ध सकाळ 🙏नमो बुद्धाय 🌺 - ~l శళనా आयुष्यात गैरसमज न होण्यासाठी सर्वात गुणकारी औषध म्हणजे कानापेक्षा डोळ्यावर विश्वास ठेवा. जास्त्त ~l శళనా आयुष्यात गैरसमज न होण्यासाठी सर्वात गुणकारी औषध म्हणजे कानापेक्षा डोळ्यावर विश्वास ठेवा. जास्त्त - ShareChat
#दीन विशेष #बुद्ध सकाळ 🙏नमो बुद्धाय 🌺
दीन विशेष - एकाच तारखेला आलेले तिन्ही दिवस खूप भारी ! कामगार fa gjes ?1?0?& पौर्णिमा GRI ( १पे २०२६ १मे २०२६ एकाच तारखेला आलेले तिन्ही दिवस खूप भारी ! कामगार fa gjes ?1?0?& पौर्णिमा GRI ( १पे २०२६ १मे २०२६ - ShareChat
#बुद्ध सकाळ 🙏नमो बुद्धाय 🌺
बुद्ध सकाळ 🙏नमो बुद्धाय 🌺 - ٤٤ ؟٧٢ की हार्दिक शुभकामनाएं ! ٤٤ ؟٧٢ की हार्दिक शुभकामनाएं ! - ShareChat
#बुद्ध सकाळ 🙏नमो बुद्धाय 🌺
बुद्ध सकाळ 🙏नमो बुद्धाय 🌺 - भगवान बुद्ध के विचार व उनकी शिक्षा सदैव हमें प्रेरित करती रहे बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं भगवान बुद्ध के विचार व उनकी शिक्षा सदैव हमें प्रेरित करती रहे बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं - ShareChat
#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - ज़िन्दगी में तूफान का आना भी जरूरी होता है क्युंकि, तभी पता चलता है कि कौन हाथ पकड़ता है छोड़ और कौन हाथ देता है | ज़िन्दगी में तूफान का आना भी जरूरी होता है क्युंकि, तभी पता चलता है कि कौन हाथ पकड़ता है छोड़ और कौन हाथ देता है | - ShareChat
#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - आपकीजिन्दगी का हर एकदिन अच्छा होये कोई जरुरीनहींहै लेकिन हरदिन हमेशा से बेहतर 8453821 आपकीजिन्दगी का हर एकदिन अच्छा होये कोई जरुरीनहींहै लेकिन हरदिन हमेशा से बेहतर 8453821 - ShareChat
#बुद्ध सकाळ 🙏नमो बुद्धाय 🌺
बुद्ध सकाळ 🙏नमो बुद्धाय 🌺 - ShareChat
01:04
#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - जिसकी फितरत हमेशा बदलने की हो वह कभी किसी का नही हो सकता, चाहे वह समय हो या इंसान. ( जिसकी फितरत हमेशा बदलने की हो वह कभी किसी का नही हो सकता, चाहे वह समय हो या इंसान. ( - ShareChat
#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - उम्र भर के लिए यहां ना कोई अपना है ना कोई पराया है। वक़्त के साथ ज़रूरतें बदलती रहती हैं और ज़रूरतों के मुताबिक लोग अपने या पराये बनते रहते हैं। उम्र भर के लिए यहां ना कोई अपना है ना कोई पराया है। वक़्त के साथ ज़रूरतें बदलती रहती हैं और ज़रूरतों के मुताबिक लोग अपने या पराये बनते रहते हैं। - ShareChat