भगवान उवाच:
*यथाकाशस्थितो नित्यं वायुः सर्वत्रगो महान्।*
*तथा सर्वाणि भूतानि मत्स्थानीत्युपधारय।।6।।*
जैसे आकाश से उत्पन्न सर्वत्र विचरने वाला महान वायु सदा आकाश में ही स्थित है,
वैसे ही मेरे संकल्प द्वारा उत्पन्न होने से सम्पूर्ण भूत मुझमें स्थित हैं, ऐसा जान।
*(श्लो 6 अध. 09भगवत गीता)*
*🙏🌹 शुभ प्रभात १🌹
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