Geeta ka gyan 🙏🙏
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Deepak Kumar
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भगवान उवाच: *यथाकाशस्थितो नित्यं वायुः सर्वत्रगो महान्।* *तथा सर्वाणि भूतानि मत्स्थानीत्युपधारय।।6।।* जैसे आकाश से उत्पन्न सर्वत्र विचरने वाला महान वायु सदा आकाश में ही स्थित है, वैसे ही  मेरे संकल्प द्वारा उत्पन्न होने से सम्पूर्ण भूत मुझमें स्थित हैं, ऐसा जान। *(श्लो 6 अध. 09भगवत गीता)* *🙏🌹 शुभ प्रभात १🌹 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 *
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