sant Ram pal jee mahraj ka satsang

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Vijay Dass
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#GodNightWednesday #किसानमजदूरबचेगा_तभी_देशबचेगा . बाखबर/ तत्त्वदर्शी संत कुरान शरीफ के ज्ञान का दाता एक बाखबर/ इल्मवाला/ तत्त्वदर्शी संत से पूर्ण परमेश्वर/अल्लाह की जानकारी पूछने का विकल्प छोड़ देता है। वह सर्वोच्च ईश्वर की जानकारी नहीं रखता है। वह किसी 'बाखबर' अर्थात 'तत्त्वदर्शी संत' से अल्लाह की जानकारी प्राप्त करने का निर्देश दे रहा है। कुरान शरीफ- सूरत अल फुरकान 25:59 कबीर प्रभु वही है जिसने जमीन तथा आसमान के बीच में जो भी विद्यमान है सर्व सृष्टी की रचना छः दिन में की तथा सातवें दिन अपने सत्यलोक(अविनाशी लोक) के सिंहासन पर विराजमान हो(बैठ) गया। उसके बारे में किसी बाख़बर से पूछो। बाख़बर अल्लाह से परिचित महात्मा हैं जिन्हें सभी पवित्र ग्रंथों का पूरा ज्ञान है। उन्हें तत्त्वदर्शी संत/धीरानाम कहा जाता है। वह इस सृष्टि की रचना का जानने वाला है, इसका मतलब है कि वह इस ब्रह्मांड के निर्माण के बारे में पूरी तरह से जानता है। अल्लाहु अकबर की सच्ची परिभाषा और अर्थ क्या है? अल्लाहु अकबर' का अर्थ है 'ईश्वर सबसे महत्वपूर्ण है या अल्लाह/ईश्वर सबसे महान है’। यह इस्लाम में एक प्रचलित उद्गार है। इसका उपयोग किसी भी स्थिति में अल्लाह के ऊपर विश्वास की घोषणा के तौर पर किया जाता है। आगे अदान/अजान के कुछ भाग दिए गए है। इसमें 'अल्ला' का अर्थ है सबका मालिक/सर्वशक्तिमान। "अल्लाहु अकबर, आशादू अल्ला इलाहा इल्लल्लाह" भावार्थ: भगवान की शान सभी से अधिक होती है, मैं इस बात का गवाह हूं कि उस अल्लाह के सिवा कोई भगवान नहीं है। अज़ान/अदान (पूजा करने का आह्वान) एक प्रार्थना समारोह है जो इस्लाम में काफी प्रचलित है। इसमें 'अल्लाहु अकबर' से बार-बार एक छोटी प्रार्थना छंद के जरिये फरियाद जाता है। सूक्ष्मवेद में इस तरह की पूजा के बारे में उल्लेख है। उल्ट मोहम्मद महल पठाया, गुज़ बिरज एक कलमा ले आया। रोज़ा बंग नमाज़ दई रे, बिस्मिल की नहीं बात कही रे।।" पूर्ण परमात्मा कबीर ने बताया है, कि मैं मोहम्मद को वहाँ शाश्वत स्थान (सतलोक) में लेकर गया और जब हज़रत मोहम्मद जी वापस आए, तो उन्होंने तीन बातें बताईं- रोजा रखना, बंग देना और नमाज करना। पर उन्होंने बिस्मिल की बात बिल्कुल भी नहीं कही। इस्लाम में अल्लाह का क्या अर्थ है? अल्लाह शब्द इस्लाम में सर्वोच्च/सर्वशक्तिमान ईश्वर का पर्याय है जो दुनिया का निर्माता, नियंत्रक और संयोजक है। क़ुरान शरीफ़- सूरत फुरकान 25, आयत-52 इस बात का प्रमाण देता है कि अल्लाह ही वह 'एक' ईश्वर है। “फला-तूतिईल-काफिरिन-व-जाहिदुम-बिहि-जिहादन-कबीरन” यहां स्पष्ट रूप से 'कबीरन' शब्द वर्णित है। हम इसे 'कबीर/ कबीरा/ कबीरन/ खबीरा/ खबीरन' कह सकते हैं। इस आयत से यह स्पष्ट है कि ब्रह्मांड का निर्माता, सर्वशक्तिमान अल्लाह कबीर है। इस्लाम में अल्लाहु अकबर या भगवान कौन है? सातवीं शताब्दी ईसवी में अरब में पैगंबर मुहम्मद द्वारा फैलाया गया इस्लाम, अल्लाह को एकमात्र ईश्वर के रूप में देखता है और वे मानते हैं कि वह दुनिया का निर्माता, नियंत्रक और संयोजक है। वे कुरान शरीफ/मज़ीद को सबसे पवित्र ग्रंथ मानते हैं जो अल्लाह ने अपने पैगंबर मुहम्मद को दिया था। इस्लाम में पैगम्बर की प्रथा को समझने के लिए आदम, नूह, अब्राहम, मूसा और सुलेमान का उल्लेख करना अनिवार्य है। हज़रत मुहम्मद इस श्रृंखला में अंतिम स्थान पर आते हैं। Farmers Savior SantRampalJi #sant ram pal ji maharaj #me follow
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Vijay Dass
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#GodNightWednesday #किसानमजदूरबचेगा_तभी_देशबचेगा . समर्थ पनमेश्वर कबीर श्री ब्रह्मा जी रजगुण हैं, श्री विष्णु जी सतगुण हैं तथा श्री शिव जी तमगुण हैं। यह तीनों प्रभु नाशवान हैं तथा इनका जन्म-मृत्यु होता है यही प्रमाण गीता अध्याय 14 श्लोक 3 से 5 में है। गीता ज्ञान दाता काल भगवान अथार्त ज्योतनिरंजन अथार्त ब्रह्म कह रहा है कि प्रकृति दुर्गा तो मेरी पत्नी है। मैं उसकी योनि अथार्त गर्भ स्थान में बीज स्थापना करता हूं जिससे सब प्राणियों की उत्पत्ति होती है। मैं सर्व 21 ब्रह्मांड के प्राणियों का पिता हूं तथा प्रकृति दुर्गा सबकी माता है। इसी दुर्गा से उत्पन्न तीनों गुण अन्य प्राणियों को कर्मों के बंधन में बांधते हैं। गीता ज्ञान दाता काल कहता है कि मैं केवल 21 ब्रह्मांड में ही मालिक हूँ। इसलिए तीनों गुणों से जो कुछ भी हो रहा है उसका मुख्य कारण मैं काल, ब्रह्म ही हूं क्योंकि काल को एक लाख मानव शरीर धारी प्राणियों के शरीर को मारकर मैल को खाने का शाप लगा है जो साधक मेरी साधना करके त्रिगुण माया की साधना करते हैं क्षणिक लाभ प्राप्त करते हैं जिससे ज्यादा कष्ट उठाते रहते हैं। गीता अध्याय 2 श्लोक 46 में कहा है कि अर्जुन! बहुत बड़े जलाशय की (जिसका जल 10 वर्ष भी वर्षा ना हो तो समाप्त नहीं होता) प्राप्ति के पश्चात छोटे जलाशय (जिसका जल एक वर्षा न होने से ही समाप्त हो जाता है) में जैसी आस्था रह जाती है उसी प्रकार पूर्ण परमात्मा से मिलने वाले लाभ के ज्ञान से परिचित होने के पश्चात तेरी आस्था अन्य प्रभु में वैसी ही रह जाएगी। छोटा जलाशय बुरा नहीं लगता परंतु उस की क्षमता का पता है कि यह तो कामचलाऊ है। पूर्ण परमात्मा तो बड़ा जलाशय जानो और ब्रह्मा, विष्णु,महेश छोटे जलाशय । गीता ज्ञान दाता अपनी साधना को भी घटिया बता रहा है। गीता अध्याय 15 श्लोक 4 तथा अध्याय 18 श्लोक 62 में कहा है कि उस परमेश्वर की शरण में जा जिसकी कृपा से तू परम शांति को तथा सतलोक शाश्वत स्थान को प्राप्त होगा वहां जाने के बाद साधक का पुनर्जन्म नहीं होता गीता ज्ञान दाता भी उसी आदि पुरुष परमेश्वर की शरण में है। इससे स्पष्ट है की ब्रह्मा, विष्णु, महेश नाशवान हैं तथा उनकी मुक्ति से मोक्ष संभव नहीं है। कबीर परमेश्वर अविनाशी हैं जिनकी भक्ति से ही पूर्ण मोक्ष संभव है गीता दाता ज्ञान दाता काल ब्रह्म भी उन्हीं की शरण में है। महाभारत के युद्ध में पांडवों की तरफ से अभिमन्यु मुख्य युवा योद्धा थे। चक्रव्यूह में उनकी मृत्यु के बाद सभी को उम्मीद थी कि भगवान श्रीकृष्ण उन्हें जिंदा कर देंगे लेकिन वह अपने भांजे को जीवित नहीं कर पाए क्योंकि उनका जीवन शेष नहीं था। वही पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब ने ऐसी असंख्य लीलाएं की जिनमें उन्होंने मृत लोगों को भी जीवित किया। कमाल नाम का बालक जो मृत्यु के उपरान्त जल प्रवाह कर दिया था, उसको जीवित किया । शेखतकी की लड़की जिसे मृत्यु के उपरांत कब्र में दफना दिया था, उसे कब्र से निकालकर जिंदा किया और उसका नाम कमाली रखा और भी ऐसे कई चमत्कार कबीर परमात्मा ने किये, जिससे सिद्ध होता है कि वही पूर्ण परमात्मा हैं। अमर /अविनाशी भगवान कौन है ? परम अक्षर ब्रह्म/ परमेश्वर/ सतपुरुष/ कविर्देव/ कबीर) परम् अक्षर ब्रह्म कविर्देव अमर और अविनाशी परमात्मा हैं। सर्वोच्च सत्ता के स्वामी कविर्देव सदा से विद्यमान हैं। परमेश्वर कविर्देव की जन्म मृत्यु नहीं होती। गीता अध्याय 15 श्लोक 16-17 तथा अध्याय 8 श्लोक 20 से 22 में गीता ज्ञान दाता ने परम अक्षर ब्रह्म, अविनाशी परमात्मा के बारे में कहा है। श्रीमद्देवी भागवत (गीताप्रेस गोरखपुर), तृतीय स्कंद, पृष्ठ 114 -115 मे स्पष्टीकरण मिलता है कि ब्रह्म (काल/क्षर पुरूष) माँ दुर्गा (प्रकृति देवी/आदिमाया/अष्टांगी/शेरांवाली) के पति हैं। चाहे कितनी भी अधिक आयु क्यों न हो अंततः पूर्ण अविनाशी परमेश्वर के अतिरिक्त सभी देवता भी मरेंगे। यदि सतगुरु से भेंट हो जाये तो सतलोक पहुँचेंगे जो अमर स्थान है जहां जन्म-मृत्यु नहीं होती है। आइए जानें सभी प्रभुओं की आयु कितनी है। सबसे पहले चारों युगों की आयु जान लें जो कि निम्न प्रकार है: सतयुग की आयु=1728000 (17 लाख 28 हजार) वर्ष द्वापरयुग की आयु=1296000 (12 लाख 96 हज़ार) वर्ष त्रेता युग की आयु=864000 (8 लाख 64 हज़ार) वर्ष कलयुग की आयु = 432000 (4 लाख 32 हज़ार) वर्ष इस तरह एक चतुर्युग में = 4320000 (43 लाख 20 हजार) वर्ष होते हैं। सभी देवताओं की आयु v/s पूर्ण परमात्मा इंद्र- 72 चतुर्युग या 1 मन्वन्तर शची- 1008 चतुर्युग या एक कल्प (इतने समय मे 14 इन्द्रों का जीवन समाप्त हो जाता है ) ब्रह्मा जी –72000000 (सात करोड़ बीस लाख) चतुर्युग विष्णु जी- 504000000 (पचास करोड़ चालीस लाख) चतुर्युग शिवजी- 3528000000 (तीन अरब बावन करोड़ अस्सी लाख) चतुर्युग क्षर पुरुष/ काल ब्रह्म काल- 70 हजार शिव जी के बराबर आयु परब्रह्म – काल के एक जीवन के बराबर एक युग और ऐसे हजार युगों का एक दिन बनता है परब्रह्म का। ऐसे दिनों से बने 100 वर्षों की आयु परब्रह्म की होती है। पूर्णब्रह्म कविर्देव- अमर अविनाशी जिसकी कभी मृत्यु नहीं होती। Farmers Savior SantRampalJi #sant ram pal ji maharaj #me follow
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Vijay Dass
560 views 4 days ago
#GodNightWednesday #किसानमजदूरबचेगा_तभी_देशबचेगा . सत भक्ति संदेश ये सच्चाई का मार्ग हमेशा ही कठिन होता है लेकिन जब सामने आता है तो महान परिवर्तन होता है। संत रामपाल जी हमे सत्य साधना और सत्यज्ञान बता रहे हैं जो आज तक किसी भी धर्म के ठेकेदारों ने, पंडित, मौलवी, गुरु, मंडलेश्वर , आचार्य , पादरी आदि किसी भी धर्म के प्रचारक ने कभी भी हमारे धर्मिक पुस्तको को पढ़ने को नहीं कहा। संत रामपाल जी एकमात्र ऐसे संत है जो सभी धार्मिक पुस्तकों को पढ़ना और उसमे लिखी सारी बातों को समझना बताया। आज तक कोई भी किसी भी धर्म के ठेकेदारों ने नशा मुक्त ,दहेज मुक्त भारत का अभियान नहीं चलाया ,यदि चलाया भी है तो उनके शिष्य बिल्कुल भी नहीं मानते और नशे और दहेज में लीन रहते। संत रामपाल जी हमे ऐसी सत्य राह और ज्ञान बताते है जहा सारे धार्मिक पुस्तकों में प्रमाणित है और बिल्कुल सत्य है। आप भी जरा विचार करे कि क्या आपके धर्म गुरु ने कभी आपकी धार्मिक पुस्तकों को पढ़ने और समझने की बात कही है और उनके द्वारा बताए सत्य मार्ग जैसे नशा त्यागना, दहेज मुक्त, लड़ाई नहीं करना और सेवा भाव लाए हो आप अपने जीवन में??? Farmers Savior SantRampalJi #sant ram pal ji maharaj #me follow
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Vijay Dass
904 views 1 months ago
#GodNightThursday #Kalyug_Mein_SatyugKiShuruat6 . आशा और तृष्णा भगत आत्माऔ,! देखो आशा और तृष्णा दोनों बहनें हैं और इन दोनों का जोड़ा है। ये दोनों ही काल के हुक्म में बंधी रहती हैं और उसके हुकम से कभी बाहर नहीं जाती । ये दोनों बंदे के अंदर घुसकर व अपने जाल में फंसा कर उसको 84 लाख योनियों में भर्मा देती हैं । यह इनका नित्य, रोज का कर्म है। आशा कहती है कि अपनी बहन तृष्णा को बोलती है कि सुन बहन तृष्णा, देख ! मैं कितनी चालाक हूं । मैं इस बंदे के अंदर रम कर इसको सारी उम्र पैसे, औलाद, ठाठ-बाठ , खाने-पीने आदि की आशा ही आशा में रख देती हूं और सतगुरु का कभी खोज नहीं करने देती । अंत समय में इसको यम के दूत पकड़ ले जाते हैं और चौरासी में डाल देते हैं। फिर तृष्णा कहती है कि सुन बहन आशा अब तू मेरी भी सुन, मैं तुझ से कितनी ज्यादा चालाक और तगड़ी हूं । जब मैं बंदे के अंदर बैठ जाती हूं तो बंदे को ऐसी तृष्णा लगाती हूं कि वो सब बातों को भूल जाता है और तृष्णा में फंस कर मन व इंद्रियों का यार हो जाता है तथा अपनी सारी उम्र विषय विकारों में बिता देता है। बंदा जितनी भी आशाएं लेकर चलता है उन सब पर पानी फेर देती हूं। जब अंत समय आता है तो बंदा अपने किये हुए पर सिर धुन धुन कर पछताता है। इसलिए परम संत रामपाल दास महाराज जी कहते है कि आशा व तृष्णा से बचो। ये सबके मन मे काल के दूत बनकर निवास करते है। और जीवआत्मा को भगती मार्ग पर नही लगने देते। "फिर जीव इनके चक्र मे चौरासी मे चला जाता है।" Watch Factful Debates Yt #sant ram pal ji maharaj #me follow
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