जय राजपूताना ,, अमित राजपूत

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सुनो प्रिये !! मे पहरा देना चाहता हू तुम्हारी आंखों के उन खूबसूरत जज्बातों पर जहां हर नजर मे एक अधूरी कहानी ठहरती हे !! मे ठहरना चाहता हू खुद को तुम्हारी झुकी पलकों की उस दहलीज पर जहां हजारों सवाल चुपचाप सांस लेते हे !! मुझमें अब खालीपन नही तुम्हारा ख्याल बसने लगा हे हर धड़कन में तुम्हारा नाम धीरे-धीरे धड़कने लगा हे !! इन अधूरी जगहो को भरने के लिए तुम्हारी पलकों को यूं झुकना जरूरी हे जैसे चांद को रात का सहारा वैसे ही मुझको तुम्हारी मौजूदगी जरूरी हे !! मे हिफाजत हू तुम्हारी ख्वाहिशो और अरमानों की बस इजाजत चाहता हू इतना की ये सब मेरी निगहबानी में रहे‌ !! अगर अमानत हो तुम मेरी तो मेरा साया खुद से जुदा ना कर पाओगी और अगर जुनून हो मेरे इश्क का तो दुनिया से बेखोफ खुद को पाओगी !! आज मे झुकता हू तुम्हारे सामने ना कोई शर्त ना कोई सवाल लिए बस दिल से रुह से तुम्हें अपना बनाने की दुआ लिए !! #💞जीवनसाथी #अमित राजपूत जय राजपूताना
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