दिमाग़ी नक्सल — आखिर इस शब्द का मतलब क्या है? सवाल पूछना, असहमति जताना या व्यवस्था से जवाब माँगना क्या किसी को “दिमाग़ी नक्सल” बना देता है?
यह गीत इसी सवाल को उठाता है। बेरोज़गारी, महँगाई, शिक्षा, न्याय और लोकतंत्र पर सवाल करने वाली आवाज़ों को किसी लेबल में बाँधने के बजाय उनके सवालों का जवाब देने की ज़रूरत है।
यह किसी भी प्रकार की हिंसा या सशस्त्र उग्रवाद का समर्थन नहीं करता। यह गीत असहमति, सवाल पूछने की आज़ादी और लोकतांत्रिक संवाद पर एक व्यंग्यात्मक/प्रश्नात्मक प्रस्तुति है।
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