गया की खबरें
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Naman News
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#गुमशुदा #लापता #📰 बिहार अपडेट #पटना बिहार न्यूज #वृद्ध 🚨 गुमशुदा की सूचना 🚨 📌 नाम: डालती देवी 📌 पति का नाम: मुनींद्र लाल सिन्हा 📌 उम्र: 95 वर्ष 📌 पता: सीडीए कॉलोनी, निज़ाम डाकघर के सामने 📌 थाना: शास्त्री नगर 📌 जिला: पटना 🔎 पहचान: बुजुर्ग महिला चश्मा लगाती हैं साड़ी (नारंगी रंग) पहने हुए उम्र अधिक होने के कारण पहचानने में सरल 👉 यदि किसी को इनके बारे में कोई जानकारी मिले तो कृपया तुरंत नज़दीकी थाना शास्त्री नगर, पटना में सूचना दें या परिवार से संपर्क करें। 📲84097 95483 🙏 कृपया इस संदेश को अधिक से अधिक शेयर करें।
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पांच डिसमिल वाले बने रजिस्टर्ड किसान,चार एकड़ वाले का रजिस्ट्रेशन नहीं। गुरारू - प्रखण्ड सहित राज्य में फार्मर रजिस्ट्री का कार्य जोर शोर से चल रहा है। सरकार द्वारा भी पचास प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री हो जाने का दावा किया गया है, परन्तु बड़ा रकवाधारी रह जा रहे वंचित । मात्र दो, चार, दस डिसमिल वाले का हो रहा रजिस्ट्रेशन। सरकारी स्तर पर हो रहा है खानापूर्ति। इस संबंध में दर्जनों किसानों सहित कृषि विभाग के पदाधिकारियों एवं इस कार्य में जुटे कर्मचारियों ने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री के लिए ऑनलाइन एप में किसान का नाम, आधार संख्या , लगान रशीद सहित जमीन का खेसरा नंबर डालना होता है। किसान रजिस्ट्री ज़मीन का खाता नंबर से नहीं बल्कि खेसरा नंबर से होता है।उस खेसरा में जमीन का रकवा मायने नहीं रखता है। आगे बताया कि अधिकांश किसानों के जमाबंदी में एवं लगान रशीद में खाता संख्या लिखा हुआ है परन्तु खेसरा संख्या के कॉलम में जीरो,जीरो है तथा रकवा कॉलम में रकवा भी वर्णित है और अधतन राजस्व रशीद भी कट रहा है। अधतन राजस्व रशीद में खाता नंबर नहीं रहने से किसानों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो रहा है। कुछ लोग जिनका रकवा कम है और राजस्व रशीद में खाता एवं प्लाट नंबर चढ़ा हुआ है उन्हीं का रजिस्ट्रेशन हो पा रहा है। वहीं अधिकांश किसानों ने बताया कि मेरे द्वारा खेसरा संख्या चढ़ाने के लिए परिमार्जन प्लस महिनों पूर्व किया गया है परन्तु आज तक नहीं हो सका है। यहां तक कि राजस्व कर्मचारी एवं अंचल अधिकारी के लॉग-इन पर महीनों से सैंकड़ों आवेदन लंबित पड़ा है। साथ ही साथ अधिकांश आवेदनों को सीओ द्वारा अस्वीकृत कर दिया जाता है। इस संबंध में पूछे जाने पर अंचल अधिकारी श्रीमती नुपुर ने बताया कि अधिकांश आवेदनों में आवेदकों द्वारा खेसरा नंबर अंकित करने हेतु संतोषजनक कागजातों को नहीं लगाया जाता है। जिससे पता चल सके कि फलां खाता,प्लाट की भूमि आवेदक की है।परिणामत: अस्वीकृत करना मजबूरी रहती है। पुनः इस संबंध में किसानों सह आवेदकों ने बताया कि अंचल अधिकारी द्वारा खतियान की मांग की जाती है जो नहीं हमलोगों के पास मौजूद है और नहीं सरकार के पास। गौरतलब है कि किसान रजिस्ट्री में दर्शाये गये रकवा के अनुसार हीं फ़सल बीमा सहित अन्य सरकारी लाभ किसानों को मिलने का प्रावधान है। इस तरह के छद्म रजिस्ट्रेशन से प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना का लाभ हो सकता है कम रकवाधारी किसानों को मिल जाए परन्तु अन्य कृषि संबंधित लाभों से वंचित हो सकते हैं । जबकि सरकारी नियमानुसार पांच डिसमिल तक की जमीन को आवासीय माना गया है। ऐसे में कम रकवा पर फार्मर रजिस्ट्री करवाना या करना कहां तक न्यायोचित है? ज्ञात हो कि किसान रजिस्ट्री का दायित्व राजस्व विभाग एवं कृषि विभाग को सामान्य रूप से है। #गया_की_खबरें .
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