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मेरे कान्हा जी

मोरे कान्हा मोरे कान्हा तू जल्दी लौट आना, गोपिन तेरी राह देखती सूना मधुबन है सूना जग सारा, गोपिन तेरी राह देखती तुम गए जिस्म से जान जैसे गयी बिन बने फूल कलियाँ भी मुरझा गयी मेघ नयनों से बरसे बहुत ही मगर मन-धरा की तपन को मिटा ना सके बन के वृष्टि, अगन तन बुझाना, गोपिन तेरी राह देखती मोरे कान्हा तू जल्दी लौट आना, गोपिन तेरी राह देखती सूना मधुबन है सूना जग सारा, गोपिन तेरी राह देखती कब हुई भोर और साँझ कब ढल गयी रजनी तारों की ओढ़े चुनर कब गयी दरस की आस में एकटक-अपलक राह तक-तक सिन्दूरी नयन अब हुए बन के कजरा, नयन में समाना, गोपिन तेरी राह देखती मोरे कान्हा तू जल्दी लौट आना, गोपिन तेरी राह देखती सूना मधुबन है सूना जग सारा, गोपिन तेरी राह देखती शांत यमुना का जल, मौन है अब पवन चहकते नहीं हैं खग, विचरते न अब विहग कुञ्ज में नित जो करती थी अटखेलियाँ बैठी गुमसुम हैं तेरी सभी सखियाँ झूमे नभ-थल, तू ऐसी धुन बजाना, गोपिन तेरी राह देखती मोरे कान्हा तू जल्दी लौट आना, गोपिन तेरी राह देखती सूना मधुबन है सूना जग सारा, गोपिन तेरी राह देखती
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12 महीने पहले
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