🐄 मेरा खेत और पशु पालन
जानिए सबसे ज्यादा दूध देने वाली पंढरपुरी भैंस के बारे मे *** पंढरपुरी भैंस मुलतः भारत में पाई जाने वाली जल भैंस की एक नस्ल है। यह नस्ल अधिकतर पंढरपुर, पश्चिम सोलापुर, पूर्व सोलापुर, बार्शी, अक्कलकोट ,सांगोला, मंगलवेड़ा, मिराज, कर्वी, शिरोल, रत्नागिरी इन जगहों पर पाई जाती है। इस भैंस का नाम पंढरपुर नामक गांव से पड़ा है जो सोलापुर जिले में आता है। इस भैंस के सिंग बहुत लंबे होते हैं, जोकि 45-50 सेंटीमीटर तक होते हैं। जिन्हें कई बार मोड़ दिया जाता है। इसके सीगों की आकर्षक सरचना के कारण भी यह काफी मशहूर है। पंढरपुरी भैंस हल्के से गहरे काले रंग की पाई जाती है। कुछ पंढरपुरी भैंस केसर और पैर पर सफेद निशान भी पाए जाते हैं। इस भैंस का सर लंबा और पतला होता है साथ ही नाक की हड्डी बड़ी होती है। पंढरपुरी भैंसों का वजन 450 से 470 किलो होता है। पंढरपुरी नस्ल डेयरी के लिए काफी उपयुक्त मानी जाती है। यह भैंस औसतन 6 से 7 लीटर दूध देती है, और इन्हें अच्छा खाद दिया जाए तो यह 15 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है। पंढरपुरी नस्लें अपनी प्रजनन क्षमता के लिए प्रसिद्ध है। यह हर 12-13 महीने में बछड़ा जन्म देने की क्षमता रखती है। प्रजनन के बाद 305 दिन तक यह दूध दे सकती है, जो कि इन्हें अन्य नस्लो से पृथककरता है। इनकी दूध में 8% वसा की मात्रा पाई जाती है। पंढरपुरी भैंस एक बहुत ही कठोर और मजबूर जानवर है। इसको धारवाड़ी नाम से भी जाना जाता है। यह सुखे क्षेत्रो के लिए एक अनुकूल जानवर है।
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10 महीने पहले
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