महिला आरक्षण बिल २०२७ वोट लेने की नई तरकीब
जनक्रांति कार्यालय से केंद्रीय ब्यूरो चीफ प्रमोद कुमार सिन्हा की रिपोर्ट
समाज शिक्षित होगा औऱ समाज ज़ब शिक्षित होगा तो राजनितिक पार्टियों को वोट पाने में काफ़ी दिक्क़तों का करना पडेगा सामना
इंडिया जनक्रांति न्यूज़ डेस्क (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन 13 अप्रैल 2026)।
संसद में महिला आरक्षण बिल आने वाला है जिसमें पक्ष औऱ विपक्ष में घमासान होना स्वाभाबिक है, लेकिन महिला आरक्षण बिल पास हो या ना हो दोनों अवस्था में बी जे पी को लाभ मिलना ही मिलना है। ये बिल वास्तविक रूप से महिला हितकारी है। ऐसी बात नहीं है यदि महिला पर सरकार इतना ही मेहरबान है तो रोज आये दिन महिला पर अत्याचार, व्यभिचार औऱ बलात्कार एबं अन्य घटना क्यों होती है ? जाहिर है की महिला क़े हित की चिंता किसी भी पार्टी को नहीं है, वरण सभी अपने अपने वोट बैंक क़े लिये इसका प्रयोग करते रहते हैँ। आये दिन कोई राम राम तो कोई अल्लाह अल्लाह कोई हिन्दू मुस्लिम कोई बैक वार्ड फॉरवर्ड कोई यू जी सी एबं अन्य अन्य फिकरे से वोट बैंक की खरीदारी में लगे हुए हैँ जबकि संसार में मात्र दो किस्म की ही जाती हैँ एक अमीर दूसरे गरीब परन्तु लोगों को इससे भटकना औऱ वोट क़े लिये फिक्रेबाजी करना आम बात है नीतीश जी ने तो एक जबरदस्त कार्ड खेला दलित औऱ महादलित यही तो यहाँ की राजनीति है। आम जन हितैषी कोई भी नहीं है। अब बी जे पी महिला आरक्षण बिल लेकर आ रही है पास हो या ना हो इससे कोई मतलब नहीं है मतलब केवल इस बात पर है कि महिला का वोट २०२७ में कैसे इनके पक्ष में हो जाये ये दीगर बात है की अभी N D A बहुमत में है बिल पास होना ही है यदि नहीं भी पास होता है तो ठीकरा विरोधियों पर ही फोरा जायेगा जिससे विरोधियों को महिला वोट का लाभ नहीं मिल सके वोट खरीदने का बेहतरीन बेहतरीन तरीके इस्तेमाल किये जाते रहे हैँ सभी पार्टियों क़े द्वारा जिससे अमीर औऱ अमीर होता जा रहा है औऱ गरीब औऱ गरीब होता जा रहा है ये क्या तरीका है गरीब को पाँच किलो अनाज देकर कामचोर बना भीखमंगा बना दो या आरक्षण पर आरक्षण देकर भारत की प्रतिभा को ही कुचल डालो बाबा भीमराव अम्बेडकर ने तो मात्र पाँच वर्ष के लिये ही आरक्षण की वकालत की थी लेकिन पीछे वोट की खातिर समाज को बाँटना सिखाया औऱ ये द्रोपदी की चीड़ की तरह बढ़ता ही चला जा रहा है वोट क़े लिये ये सभी पार्टियां लोगों को बिभक्त कर फुट डालो औऱ राज्य करो की नियति औऱ नियत में विश्वास रखती है।
इसका सबसे प्रमुख कारण शिक्षा है। यहाँ शिक्षा क़े नाम पर खिलबाड़ हो रहा है अमीरों क़े लिये अलग शिक्षा औऱ गरीबों क़े लिये अलग शिक्षा, मेरा मानना है भारत सरकार द्वारा शिक्षा बिभाग को ही समाप्त कर देना चाहिये ज़ब स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक शिक्षा पर इतना खर्च किया जा रहा है तो शिक्षा क़े नाम पर कुकुरमुत्ते की तरह प्राइवेट सिक्षा का क्या काम है यह तो अमीर औऱ गरीब को बाँटने बाली शिक्षा है अमीर स्टैंडर्ड शिक्षा हासिल करेंगे औऱ गरीब स्कूली सरकारी शिक्षा इसका क्या मतलब है ? शिक्षा देना ही है तो प्राइवेट शिक्षा बन्द करो या स्कूली शिक्षा बन्द करो, शिक्षा पर सबको समान अधिकार हो चाहे वो अमीर हो या गरीब सबको शिक्षा की जरूरत है औऱ समाज समानता क़े लिये अनाज या कोई भी धन केवल उसे ही मिले जिसके बच्चे पढ़ाई कर रहे हैँ उसे नहीं मिले जिसको पढ़ाई में दिलचस्पी नहीं हो इससे ये होगा समाज शिक्षित होगा औऱ समाज ज़ब शिक्षित होगा तो राजनितिक पार्टियों को वोट पाने में काफ़ी दिक्क़तों का सामना करना पड़ेगा अभी तो ये हो रहा है चोर डकैत औऱ बाहुबली ही राजनीति करते हैँ, जो जितने घोटालेबाज हैँ वो उतने बड़े राजनीतिज्ञ हैँ सबों को आई ए एस ही नचा रहे हैँ औऱ शिक्षा क़े अभाव में वे विवश नज़र आ रहे हैं सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर इतना खर्च होने क़े बाद भी ये शिक्षा का प्राइवेटी करण क्यों ? फिर मानव संसाधन विकाश मंत्रालय की जरूरत क्यों है ? क्या शिक्षा माफिया क़े आगे शिक्षा बिभाग नतमस्तक है या उसका थैली से संतुष्ट है जो बड़े बड़े लोग पैसे बाले मनमानी फीस औऱ मनमानी ड्रेस और मनमानी किताबों का बोझ छोटे छोटे बच्चे क़े कंधे पर लादकर उसका बचपन छीन रहे हैँ ये कहाँ तक जाइज है ? ये सोचनीय प्रश्न है आज इस सम्बदादाता द्वारा देखा जा रहा है गाँव से लेकर शहर तक मुफ्त में अनाज क़े बदौलत लोग ताश खेलते नज़र आते हैँ कामचोर हो गये हैँ इसका जिम्मेबार ये रसजनितिक पार्टी हैँ जो चाहते हैँ लोग ऐसे ही अशिक्षित औऱ गरीब रहे ताकी वोट क़े समय उनके खाली कटोरे में कुछ देकर या रूपया देकर वोट खरीदा जा सके अतएब सबसे पहला कदम शिक्षा को व्यवस्थित करने की है ताकी कोई अशिक्षित नहीं हो।
दुसरा मुख्य कारण है अमीरी औऱ ग़रीबी यहाँ मात्र दो किस्म की ही जाती हैँ अमीर औऱ गरीब अब हम इस पर विचार करते हैँ क्या कारण है आज अमीर औऱ अमीर होता जा रहा है औऱ गरीब औऱ गरीब इसका प्रमुख कारण है सरकार, सरकार अमीरों का संरक्षण देती है उसका कर्जा चाहे अरबों मेंही क्यों ना हो उसे माफ कर देती है चाहे वो बैंक का बैंक डूबा जाये औऱ गरीब का झोपड़ा उजार देती है थोड़े से पैसे क़े लिये ही क्यों ? आज जो घोटाले क़े नाम पर जेल जाने बाले होते हैँ दबंग होते हैँ उसने यदि संभावित पार्टी का दामन थाम लेते हैँ तो वो स्वच्छ हो जाते हैँ ऐसा क्यों ? क्योंकि जनता जगरूक नहीं है यानी जनता शिक्षित नहीं है शिक्षा एक अहम मुद्दा है तब अमीरी जो गरीबों का धन हड़प लिया है चाहे कोई भी हैँ हमारे द्वारा अदा किये जानेबाले टैक्स से ही सभी पलते हैँ फिर अमीर कैसे अमीर हो जाता है स्वाभाविक है उसे लोन देने में बैंक आनाकानी नहीं करता है जबकि गरीब को साधारण लोन लेने में चप्पल घिस जाते हैँ ये दोहरी व्यवस्था का जिम्मेबार निश्चित तौरपर सरकार पर ही जाती है इसलिये इस देश में मात्र दो जातियों क़े अलाबा कोई जाती नहीं है बाकी सभी फिकरे हैँ वोट लेने क़े लिये या समाज बिभक्त करने क़े लिये अमीर औऱ गरीब क़े अलाबे कोई जाती नहीं कोई धर्म नहीं कोई ऊंच नहीं कोई नीच नहीं ये सभी राजनितिक फिकरे क़े अलाबे कुछ नहीं
तीसरा मुख्य बिंदु है आरक्षण, क्या आरक्षण क़े नाम पर देश की प्रतिभा को कुंठित नहीं किया जा रहा है ? आरक्षण क्यों ? जबसबकी पढ़ाई एक साथ तो जाती पाती व्यवस्था क्यों ? निश्चित है आरक्षण देकर देश की प्रतिभा को कुचला जा रहा है औऱ आरक्षण पाकर भी लोग कुंठित रहते हैँ यह सहने क़े लिये ये आरक्षण कोटा क़े हैँ आरक्षण देना है तो उनको ऐसी कोचिंग सुबिधा दो जिससे वे बिना आरक्षण औऱ कुंठित क़े प्रतियोगिता में भाग लेकर उस मुकाम को हासिल कर सके आज हम पा रहे हैँ एक बार जो आरक्षण का लाभ ले चुके हैँ उनके समस्त परिवार ही इस लाभ को प्राप्त कर रहे हैँ औऱ जिसे लाभ नहीं मिला वो अभीतक वँचित हैँ क्या आरक्षण का अर्थ यही है ? इसका जबाब शायद हो कोई दे सके, सभी को अपने वोट की पड़ी है वोट क़े लिये समाज को हज़ारों टुकड़े में बिभक्त को तैयार हैँ
सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है जिसको वोट देकर जीता कर भेजते हैँ कि हमारे हक़ क़े लिये वो काम करेगा ये जनता की सेवा है जनता की सेवा को वो सरकारी सेवा मानते हैँ कारण है कानून बनाने का अधिकार उन्हें है उसलिए समस्त कानून को ताक पर रखकर अपने सुबिधा क़े लिये वे सरकारी सेवा मानकर कानून बनाकर पेंशन दर पेंशन पा रहे हैं औऱ जो वास्तविक रूप से सरकारी सेवा करते हुए उमर गुज़ार देते हैँ उनका बुढ़ापे की लाठी पेंशन पर रोक होता h ऐसा क्यों ? क्या संबिधान में ऐसा प्रावधान पहले से निर्धारित है ? याद है जिस राज्य को भारत में बिलय किया गया उसके राजा को प्रिबी पर्स क़े तौर पर जागीरदारी का हिस्सा दिया जाता था जिसे आईरान लेडी उर्फ़ श्री मति इंदिरा गाँधी ने अपने प्रधनमंत्रित्व काल में बन्द किया था चूँकि देश का आर्थिक अहम हिस्सा उसीमें चला जाता था आज माननीय मोदी जी को हिम्मत है कि राजनीतिक नेताओं का पेंशन औऱ अन्य सुबिधा बन्द करें चूँकि देश का अहम आर्थिक हिस्सा उसी में चला जाता है
इसके अलावे सबसे अहम मुद्दा है भ्रष्टाचार ? भ्रष्टाचार क्यों ? कहावत है यदि राजा चोर होगा तो दरबारी भी चोर होगा राजा ईमानदार होगा तो मजाल नहीं कोई दरबारी चोर हो जाये, ईमानदारी अच्छी नीति है वरण वो ऊपर से हो ऊपर को भ्र्ष्टाचार नहीं कमीशन कहा जाता है या उसे भेंट या सेवा का नाम दिया जाता है ऐसा क्यों होता है इसका प्रमुख कारण है चुनाव औऱ चुनावी सभा में अनाप सनाप पैसा खर्च करना ज़ब सरकार द्वारा चुनाव में इतना पैसा खर्च किया ही जाता है तो ये रेडिओ औऱ टेलीवीज़न किस काम क़े ? क्यों नहीं रेडियो या टेलीविजन क़े माध्यम से ही प्रचार की व्यवस्था की जाती है इस तरह क़े बहुतेरे प्रश्न है जिस पर राज्य करने वाले दृढ़ संकल्पित होकर ठोस निर्णय या कानून बनाबे। जिससे देश में भ्रष्टाचार समाप्त हो जाये लेकिन ऐसा होगा नहीं क्योंकि मलाई खाने की आदत सबको हो गया है। आज सरकारी कर्मचारी भ्र्ष्टाचार में पकड़े जाते हैँ किसी नेता या मंत्री को घुस लेते पकड़ा जा सका है क्यों ? वे टेबल क़े अंदर से पैसे बटोरते हैँ।
उपरोक्त आलेख प्रकाशन हेतु प्रमोद कुमार सिन्हा, केंद्रीय ब्यूरो चीफ जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन द्वारा संप्रेषित व समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशित व प्रसारित।
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