maa te maa
बचपन से ही मैं ये देख रहा था, माँ ने अपने पास एक संदूक रखा था ! अपने कमरे में बिस्तर के नीचे रखती थी , मैं पूंछता था तो हँस के टाल देती थी ! मेरे बाल मन में कईं सारे ख़याल आते थे , जो मुझे अक्सर बैचैन कर जाते थे ! सोचता था माँ ने इसमें ढेरों पैसे बचाए होंगे , मुझे देने ना पड़ें इसलिए मुझसे छुपाए होंगे ! समय के साथ मैं बड़ा ,और माँ बूढ़ी हो गयी , मेरी जिज्ञासा भी मेरे साथ बड़ी हो गयी ! संदूक को लेकर तरह-तरह के ख्याल मन मैं आते थे , कभी-कभी तो मुझे सोती रातो से जगाते थे ! एक दिन मैने संदूक खोला तो आँखे भर आई थी , माँ ने उसमें मेरी बचपन की यादे संजोई थी ! मेरी निक्कर,टूटे खिलौने, धूप वाला चश्मा भी संभाला था , और वो प्लेट के टुकड़े,जिसे मैंने ही हवा मे उछाला था ! बचपन की तस्वीरे,और वो बल्ला जो मैंने जीता था , और वो कार्टून वाला गिलास जिसमें मैं दूध पीता था ! यहाँ तक कि मेरा एक टूटा दाँत भी रखा था, और वो हाथों से बनाया कार्ड,जिसमें मैंने "प्यारी माँ" लिखा था ! अपने बचपन की चीज़े देख कर मेरी आँखे भर आई, उस दिन समझ पाया मैं माँ के प्यार की गहराई ! अहसास हुआ जो मेरे लिए कभी बस एक पल था , वो मेरी माँ का अनमोल खजाना था,सुनहरा कल था ! जब मेरी चीज़े मुझे मेरे बचपन की याद दिला रही थी , माँ मेरे पीछे ही खड़ी थी,और वो मुस्कुरा रही थी ! #लव_यू_माँ😌 🤱👩‍👦
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