चलो सजना, जहाँ तक घटा चले लगाकर मुझे गले, चलो सजना, जहाँ तक घटा चले सुंदर सपनों की हैं मंज़िल कदम के नीचे फुरसत किस को इतनी, देखे जो मूड के पीछे तुम चलो, हम चले, हम चले, तुम चलो, सावन की हवा चले चलो सजना, जहाँ तक घटा चले धड़कन तुम्हरे दिल की उलझी हमारी लट में तुम्हरे तन की छाया, काजल बनी पलक में एक हैं दो बदन, दो बदन एक हैं, आँचल के तले चले चलो सजना, जहाँ तक घटा चले पथरीली राहों में, तुम संग मैं झूम लूँगी खाओगे जब ठोकर होठों से चूम लूँगी प्यार का आज से, आज से प्यार का हम से सिलसिला चले चलो सजना, जहाँ तक घटा चले गीतकार : मजरुह सुलतानपुरी, गायक : लता मंगेशकर, संगीतकार : लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, चित्रपट : मेरे हमदम मेरे दोस्त - १९६८
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🎂शर्मिला टागोर वाढदिवस

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मला ही पोस्ट रिपोर्ट करावी वाटते कारण ही पोस्ट...
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