#भक्ति भावना #sahi aachran सही आचरण 🙏🏻🙏🏻🌹🌹🙏🏻🙏🏻गलत पूजा पाठ न करें 🙏🙏🌹🌹🙏🏻🙏🏻एक कदम मोक्ष की ओर #पूजा पाठ
#शास्त्रों के अनुसार, पूजा अर्चना में वर्जित कार्य :----
* गणेश जी को, तुलसी न चढ़ाएं।
* देवी पर, दुर्वा न चढ़ाएं।
* शिवलिंग पर, केतकी फूल न चढ़ाएं।
* विष्णु को तिलक में , अक्षत न चढ़ाएं।
* दो शंख, एक समान पूजा घर में न रखें।
* मंदिर में, तीन गणेश मूर्ति न रखें।
* तुलसी पत्र, चबाकर न खाएं।
* द्वार पर, जूते चप्पल उल्टे न रखें।
* दर्शन करके बापस लौटते समय, घंटा न बजाएं।
* एक हाथ से , आरती नहीं लेना चाहिए।
* ब्राह्मण को , बिना आसन बिठाना नहीं चाहिए।
* स्त्री द्वारा , दंडवत प्रणाम वर्जित है।
* बिना दक्षिणा, ज्योतिषी से प्रश्न नहीं पूछना चाहिए।
* घर में पूजा करने, अंगूठे से बड़ा शिवलिंग न रखें।
* तुलसी पेड़ में , शिवलिंग किसी भी स्थान पर न हो।
* गर्भवती महिला को, शिवलिंग स्पर्श नहीं करना है।
* स्त्री द्वारा मंदिर में, नारियल नहीं फोडना है।
* रजस्वला स्त्री का, मंदिर प्रवेश वर्जित है।
* परिवार में सूतक हो तो, पूजा प्रतिमा स्पर्श न करें।
* शिवजी की, पूरी परिक्रमा नहीं किया जाता।
* शिवलिंग से, बहते जल को लांघना नहीं चाहिए।
* एक हाथ से , प्रणाम न करें।
* दूसरे के दीपक में, अपना दीपक जलाना नहीं चाहिए।
* चरणामृत लेते समय, दायें हाथ के नीचे, एक नैपकीन रखें । ताकि, एक बूंद भी नीचे न गिरे।
* चरणामृत पीकर, हाथों को शिर या शिखा पर न पोछें ।बल्कि, आंखों पर लगायें। शिखा पर, गायत्री का निवास होता है। उसे अपवित्र न करें।
* देवताओं को, लोभान या लोभान की अगरबत्ती का धूप न करें।
* स्त्री द्वारा हनुमानजी शनिदेव को स्पर्श वर्जित है।
* कंवारी कन्याओं से पैर पडवाना पाप है।
* मंदिर परिसर में स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग दें।
* मंदिर में भीड़ होने पर, लाईन पर लगे हुए ।भगवन्नामोच्चारण करते रहें एवं अपने क्रम से ही अग्रसर होते रहें।
* शराबी का भैरव के अलावा, अन्य मंदिर में , प्रवेश वर्जित है।
* मंदिर में , प्रवेश के समय पहले दाहिना पैर और निकास के समय, बायां पांव रखना चाहिए।
* घंटी को इतनी जोर से न बजायें कि, उससे कर्कश ध्वनि उत्पन्न हो।
* हो सके तो मंदिर जाने के लिए, एक जोड़ी वस्त्र अलग ही रखें।
* मंदिर अगर ज्यादा दूर नहीं है तो, बिना जूते चप्पल के ही पैदल जाना चाहिए।
* मंदिर में , भगवान के दर्शन खुले नेत्रों से करें और मंदिर से, खड़े - खड़े वापिस नहीं हों। दो मिनट बैठकर भगवान के रूप व माधुर्य का दर्शन लाभ लें।
* आरती लेने अथवा दीपक का स्पर्श करने के बाद, हस्तप्रक्षालन अवश्य करें।
* इन सभी बताई गई बातें, हमारे ऋषि मुनियों से परंपरागत रूप से प्राप्त हुई है।