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भीष्म ने अपने प्राण क्यों रोककर रखे थे? | The Day When Many Sages Attained Liberation थाईपुसम, संक्रांति के बाद आने वाली पहली पूर्णिमा है।पारंपरिक रूप से इसे शुभता और कृपा का दिन माना जाता है, जिसका उपयोग व्यक्ति अपनी खुशहाली के लिए कर सकता है। थाईपुसम के इस पावन अवसर पर भक्त देवी को भेंट अर्पण कर सकते हैं। सद्‌गुरु के साथ महाशिवरात्रि 2026 मनाएं। व्यक्तिगत रूप से शामिल हों, या फिर दुनिया के किसी भी हिस्से से लाइव जुड़ें। 15 फरवरी 2026, शाम 6 बजे से। Sadhguru.co/msr-hi #sadhguru #sadhguruhindi #IshaMahashivratri2026 #mahashivrati #shiva
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"ॐ नमः शिवाय" जन्म और मृत्यु से परे | “Aum Namah Shivaya” Can Take You Beyond Birth & Death सद्‌गुरु बता रहे हैं कि ‘ॐ नमः शिवाय’ को महामंत्र क्यों कहा जाता है और इसका जाप कैसे जीवन के नए आयाम खोल सकता है। आदियोगी और सद्‌गुरु के साथ महाशिवरात्रि 2026 मनाएं। व्यक्तिगत रूप से शामिल हों, या फिर दुनिया के किसी भी हिस्से से लाइव जुड़ें। 15 फरवरी 2026, शाम 6 बजे से। sadhguru.co/msr-hi #mahamantra #IshaMahashivratri2026 #sadhguru #sadhguruhindi #Mahadeva
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भारत के माननीय प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी जी ने, साल 2017 में ईशा योग केंद्र, कोयंबटूर में आदियोगी के 112 फुट ऊंचे विश्व-प्रसिद्ध चेहरे का अनावरण किया। सद्‌गुरु ने इसे खुद डिजाइन और प्राण-प्रतिष्ठित किया है। ये पहले योगी को उनके उस अद्भुत योगदान के लिए एक श्रद्धांजलि है, जो उन्होंने मानवता को दिया। ये आदियोगी और भारत को योग विज्ञान के असली स्रोत के रूप में फिर से स्थापित करने की एक कोशिश है। मई 2017 में, 'गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' ने आदियोगी को दुनिया के सबसे बड़े चेहरे के रूप में मान्यता दी। आदियोगी और सद्‌गुरु के साथ महाशिवरात्रि 2026 मनाएं। व्यक्तिगत रूप से शामिल हों, या फिर दुनिया के किसी भी हिस्से से लाइव जुड़ें। 15 फरवरी 2026, शाम 6 बजे से। #IshaMahashivratri2026 #sadhguru #sadhguruhindi #shiva
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