Jaijagannath🌹🙏
585 Posts • 84K views
Lal Singh
618 views 15 days ago
जगन्नाथ जी की होली – वृंदावन, मथुरा और नीलाचल की पावन हवाओं में जब फाल्गुन की सुगंध घुलती है, तब भक्ति और प्रेम रंगों में बदल जाते हैं। कहते हैं कि एक बार फाल्गुन मास में भक्तों के मन में यह भाव उठा कि काश आज स्वयं जगन्नाथ जी भक्तों संग होली खेलें। पुरी धाम में जगन्नाथ मंदिर के प्रांगण में भक्तों की भीड़ उमड़ी हुई थी। सबके हाथों में गुलाल, चेहरे पर उत्साह और हृदय में भक्ति थी। तभी ऐसा लगा मानो स्वयं जगन्नाथ जी मुस्कुरा रहे हों। उनकी बड़ी-बड़ी आँखों से करुणा और आनंद झलक रहा था। भक्तों ने प्रेम से गुलाल अर्पित किया। तभी अचानक वातावरण में रंगों की वर्षा होने लगी। ऐसा प्रतीत हुआ मानो भगवान स्वयं अपने भक्तों के साथ रंग बरसा रहे हों। उस दिन किसी ने किसी में भेद नहीं देखा—सब एक ही रंग में रंग गए, प्रेम के रंग में। जगन्नाथ जी के साथ उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भी विराजमान थे। तीनों की छवि ऐसी लग रही थी मानो स्वयं ब्रह्मांड आनंद में डूब गया हो। भक्त कहते हैं कि उस दिन रंग केवल चेहरे पर नहीं, आत्मा पर लगा था। बलभद्र जी की गंभीरता भी रंगों में खिल उठी और सुभद्रा जी की कोमल मुस्कान से वातावरण मधुर हो गया। आज भी जब होली आती है, तो भक्त जगन्नाथ जी को रंग अर्पित करते हैं। यह केवल परंपरा नहीं, एक जीवंत अनुभूति है कि भगवान दूर नहीं—वे हमारे उत्सवों, हमारी खुशियों और हमारे प्रेम में सदा सहभागी हैं। जय जगन्नाथ! 🌷🌷🌷https://whatsapp.com/channel/0029VbBntZe9Gv7PDLOWTG3W #🙏🌺jai jagnnath🌺🙏
13 likes
14 shares