#श्री हरि हरि विष्णु की कृपा का अनुभव भक्त के जीवन में बहुत ही सूक्ष्म और गहरा होता है। भगवान विष्णु, जो इस जगत के पालनहार हैं, उनकी कृपा प्राप्त होने पर भक्त के जीवन में निम्नलिखित परिवर्तन और अनुभूतियाँ आती हैं:
* आंतरिक शांति और संतोष: श्री हरि की कृपा का सबसे पहला संकेत 'संतोष' है। भक्त को भौतिक अभावों के बावजूद मन में एक गहरी शांति महसूस होती है। उसे यह विश्वास हो जाता है कि उसका पालन करने वाला परमात्मा साथ है, जिससे उसकी अनावश्यक चिंताएँ समाप्त हो जाती हैं।
* कठिन समय में सहज मार्ग मिलना: जब जीवन में कोई बड़ी बाधा आती है, तो श्री हरि की कृपा से भक्त को अचानक कोई ऐसा रास्ता या सहायता मिल जाती है जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की होती। विषम परिस्थितियों में भी भक्त का बाल भी बांका नहीं होता, यह उनके 'रक्षक' रूप का प्रत्यक्ष अनुभव है।
* विवेक और सही निर्णय: भगवान विष्णु बुद्धि और चेतना के स्वामी हैं। उनकी कृपा से भक्त का विवेक जागृत हो जाता है। वह मोह और भ्रम के जाल से बचकर सही और गलत का अंतर समझ पाता है और जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय धर्म के मार्ग पर चलकर लेता है।
* नकारात्मकता का त्याग: श्री हरि के चरणों से जुड़ने पर भक्त के भीतर से काम, क्रोध, लोभ और अहंकार जैसे विकार धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं। उसका स्वभाव कोमल, दयालु और परोपकारी हो जाता है। दूसरों की सेवा में उसे आनंद आने लगता है, जो ईश्वरीय कृपा का स्पष्ट प्रमाण है।
* अटूट विश्वास और निर्भयता: भक्त को यह दिव्य अनुभूति होती है कि वह अकेला नहीं है। जैसे भगवान ने प्रह्लाद और गजराज की रक्षा की, वैसे ही वे मेरी भी रक्षा कर रहे हैं। यह भाव भक्त को मृत्यु और भविष्य के भय से मुक्त कर देता है।
* संसार में रहते हुए निर्लिप्तता: श्री हरि की कृपा से भक्त संसार के सभी सुखों का आनंद लेते हुए भी उनमें फंसता नहीं है। वह कमल के फूल की तरह कीचड़ (संसार) में रहकर भी उससे ऊपर उठा रहता है। उसकी आसक्ति केवल प्रभु के चरणों में होती है।
श्री हरि की कृपा का सरल मार्ग:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
जय श्री हरि