प्रशांत किशोर राजनीतिज्ञ PK🙏

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Naman News
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#📰 बिहार अपडेट #बांकीपुर उपचुनाव #बांकीपुर #प्रशांत किशोर #अखिलेश यादव "12 साल का रिटर्न गिफ्ट मिला है BJP को!" बांकीपुर की हार पर अखिलेश यादव का करारा तंज 🚨🔥 बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों पर अब बिहार से लेकर उत्तर प्रदेश तक की राजनीति गरमा गई है! ​समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बांकीपुर सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की हार पर तीखा हमला बोला है। ​अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से तंज कसते हुए कहा कि— "बांकीपुर की हार के बाद भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के पास अब कुछ बाकी बचा नहीं है। 12 साल का ही 'रिटर्न गिफ्ट' मिला है बीजेपी को।" ​बांकीपुर में जन सुराज के हाथों बीजेपी के गढ़ के ढहने के बाद विपक्षी नेता लगातार निशाना साध रहे हैं। अखिलेश यादव के इस आक्रामक बयान और राजनीतिक गलियारों में मचते घमासान की पूरी रिपोर्ट देखने के लिए वीडियो को अंत तक देखें। ​
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#बांकीपुर उपचुनाव #📰 बिहार अपडेट #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #प्रशांत किशोर #बांकीपुर बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का परिणाम बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव दर्ज कर गया है। 1995 से लगातार भाजपा के कब्जे वाली इस सीट पर पहली बार जनसुराज ने जीत हासिल की है। प्रशांत किशोर की इस जीत ने न केवल भाजपा के लंबे राजनीतिक वर्चस्व को तोड़ा, बल्कि बांकीपुर के चुनावी समीकरण को भी पूरी तरह बदल दिया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 1995 में भाजपा ने 40.7 प्रतिशत वोट शेयर के साथ जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2000 में भाजपा का वोट शेयर बढ़कर 54.9 प्रतिशत हो गया। 2005 के दोनों चुनावों में भी भाजपा ने क्रमश: 69.1 और 69.3 प्रतिशत वोट हासिल किए। 2006 के उपचुनाव में भाजपा का वोट शेयर 82.3 प्रतिशत तक पहुंच गया था। 2010 में भाजपा को 72.1 प्रतिशत वोट मिले। 2015 में यह आंकड़ा 60.2 प्रतिशत रहा, जबकि 2020 में पार्टी ने 59.1 प्रतिशत वोट हासिल किए। 2025 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा का वोट शेयर 62.7 प्रतिशत था। लगातार तीन दशक तक इस सीट पर भाजपा की मजबूत पकड़ बनी रही। 2026 के उपचुनाव में तस्वीर अचानक बदल गई। जनसुराज के प्रशांत किशोर ने 49.4 प्रतिशत वोट शेयर के साथ जीत दर्ज की, जबकि भाजपा 34.5 प्रतिशत वोट शेयर के साथ दूसरे स्थान पर रही। यानी जिस सीट पर भाजपा का वोट शेयर कभी 80 प्रतिशत से अधिक रहा था, वहां जनसुराज ने पहली बार अपना झंडा बुलंद कर दिया। बांकीपुर का परिणाम सिर्फ भाजपा की हार नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में तीसरे विकल्प के उभरने का संकेत भी माना जा रहा है। 2025 में भाजपा के बाद दूसरे स्थान पर रहने वाला आरजेडी इस बार मुकाबले में पीछे छूट गया। प्रशांत किशोर की जीत से जनसुराज को राज्य की राजनीति में अपनी जगह मजबूत करने का बड़ा मौका मिला है। बांकीपुर के आंकड़े बताते हैं कि करीब तीन दशक तक एकतरफा दिखने वाला चुनावी समीकरण अब बदल चुका है। हालांकि उपचुनाव के नतीजे को पूरे बिहार का सीधा राजनीतिक संकेत मानना जल्दबाजी होगी, लेकिन प्रशांत किशोर ने भाजपा के मजबूत गढ़ में सेंध लगाकर नई राजनीतिक चुनौती जरूर खड़ी कर दी है।
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