🙏 मोहिनी एकादशी
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 🌻🌻🌻 #ऊँ_भगवते_वासुदेवाय_नमः 🌻🌻🌻 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 #सभी_आदरणीय_साथियों_को_मंगलमय_शुभ_प्रभात 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 #जानिए_दशमी_और_एकादशी_के_नियम... 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ एकादशी व्रत कैसे प्रारंभ हुआ? भगवती एकादशी कौन है, इस संबंध में पद्म पुराण में कथा है कि एक बार पुण्यश्लोक धर्मराज युधिष्ठिर को लीला पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण ने समस्त दुःखों, त्रिविध तापों से मुक्ति दिलाने, हजारों यज्ञों के अनुष्ठान की तुलना करने वाले, चारों पुरुषार्थों को सहज ही देने वाले एकादशी व्रत करने का निर्देश दिया। एकादशी व्रत-उपवास करने का बहुत महत्व होता है। साथ ही सभी धर्मों के नियम भी अलग-अलग होते हैं। खास कर हिंदू धर्म के अनुसार एकादशी व्रत करने की इच्छा रखने वाले मनुष्य को दशमी के दिन से ही कुछ अनिवार्य नियमों का पालन करना चाहिए। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ #ये_हैं_एकादशी_व्रत_उपवास_के_नियम... 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ एकादशी का व्रत-उपवास करने वालों को दशमी के दिन मांस, लहसुन, प्याज, मसूर की दाल आदि निषेध वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ रात्रि को पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए तथा भोग-विलास से दूर रहना चाहिए। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ एकादशी के दिन प्रात: लकड़ी का दातुन न करें, नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और अंगुली से कंठ साफ कर लें, वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी ‍वर्जित है। अत: स्वयं गिरा हुआ पत्ता लेकर सेवन करें। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ यदि यह संभव न हो तो पानी से बारह बार कुल्ले कर लें। फिर स्नानादि कर मंदिर में जाकर गीता पाठ करें या पुरोहितजी से गीता पाठ का श्रवण करें। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ फिर प्रभु के सामने इस प्रकार प्रण करना चाहिए कि 'आज मैं चोर, पाखंडी़ और दुराचारी मनुष्यों से बात नहीं करूंगा और न ही किसी का दिल दुखाऊंगा। रात्रि को जागरण कर कीर्तन करूंगा।' 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ तत्पश्चात 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' इस द्वादश मंत्र का जाप करें। राम, कृष्ण, नारायण आदि विष्णु के सहस्रनाम को कंठ का भूषण बनाएं। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ भगवान विष्णु का स्मरण कर प्रार्थना करें और कहे कि- हे त्रिलोकीनाथ! मेरी लाज आपके हाथ है, अत: मुझे इस प्रण को पूरा करने की शक्ति प्रदान करना। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ यदि भूलवश किसी निंदक से बात कर भी ली तो भगवान सूर्यनारायण के दर्शन कर धूप-दीप से श्री‍हरि की पूजा कर क्षमा मांग लेना चाहिए। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ एकादशी के दिन घर में झाड़ू नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है। इस दिन बाल नहीं कटवाना चाहिए। न नही अधिक बोलना चाहिए। अधिक बोलने से मुख से न बोलने वाले शब्द भी निकल जाते हैं। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ इस दिन यथा‍शक्ति दान करना चाहिए। किंतु स्वयं किसी का दिया हुआ अन्न आदि कदापि ग्रहण न करें। दशमी के साथ मिली हुई एकादशी वृद्ध मानी जाती है। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ वैष्णवों को योग्य द्वादशी मिली हुई एकादशी का व्रत करना चाहिए। त्रयोदशी आने से पूर्व व्रत का पारण करें। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ एकादशी (ग्यारस) के दिन व्रतधारी व्यक्ति को गाजर, शलजम, गोभी, पालक, इत्यादि का सेवन नहीं करना चाहिए। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ केला, आम, अंगूर, बादाम, पिस्ता इत्यादि अमृत फलों का सेवन करें। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ प्रत्येक वस्तु प्रभु को भोग लगाकर तथा तुलसीदल छोड़कर ग्रहण करना चाहिए। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को मिष्ठान्न, दक्षिणा देना चाहिए। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ क्रोध नहीं करते हुए मधुर वचन बोलना चाहिए। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ इस व्रत को करने से जीवन के सारे कष्ट समाप्त हो जाते हैं, और उपवास करने वाला दिव्य फल प्राप्त करता है। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। इस बार यह तिथि 15 मई को है। मोहिनी एकादशी के बारे में कुछ लोगों का मानना है कि इस दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया था इसलिए इसका नाम मोहिनी एकादशी पड़। जबकि इस विचार का उल्लेख किसी पुराण और धर्मग्रंथ में नहीं मिलता है। भगवान विष्णु ने कई बार मोहिनी का अवतार लिया है। इनमें भस्मासुर से भगवान शिव को बचाने के लिए, समुद्र मंथन के बाद अमृत बांटने के लिए और इरावन से विवाह करने के लिए भी मोहिनी रूप धरने का वर्णन मिलता है। 🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔 ऐसा कहीं जिक्र नहीं मिलता है कि भगवान विष्णु ने एकादशी तिथि के दिन ही मोहिनी रूप धारण किया था। दरअसल इस एकादशी को मोहिनी इसलिए कहा जाता है कि क्योंकि इसके व्रत से मोह और भोग की लालसा में फंसे हुए मनुष्य को कर्म फल से मुक्ति मिलती है। पद्म पुराण में एकदशी की जो कथा मिलती है उससे भी यही तथ्य स्पष्ट होता है कि मोहिनी एकादशी मोह का हरण करने वाली एकादशी है। 🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔 #स्वयं_श्रीकृष्ण_ने_अर्जुन_को_बताया_इसका_महत्व 🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔 पद्म पुराण में उल्लेख मिलता है कि युधिष्ठिर ने कान्हा से पूछा, भगवन! वैशाख शुक्ल पक्ष की एकादशी का महत्व और फल क्या है? तब श्रीकृष्ण भगवान राम को याद करते हुए कहते हैं कि यही सवाल त्रेतायुग में भगवान राम ने महर्षि वशिष्ठ से पूछा था। 🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔 तब देवऋषि ने उन्हें बताया कि वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी मोहिनी एकादशी होती है। यह एकादशी सभी पापों का नाश करनेवाली होती है। इस दिन व्रत और विधि-विधान से पूजन करने पर मनुष्य को संसार के माया जाल और मोह से मुक्ति मिलती है। 🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔 #मोहिनी_एकादशी_व्रत_की_कथा 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 सरस्वती नदी के रमणीय तट पर भद्रावती नाम की सुंदर नगरी है। वहां धृतिमान नाम के राजा का शासन था। धृतिमान चंद्र वंश में उत्पन्न हुए थे और सदैव सत्य वचन ही बोला करते थे। उनके नगर में धनपाल नाम का एक वैश्य रहता था, जो संपन्न और सुखी परिवार से आता था। वह बड़े चाव से समाज सेवा किया करता था। लोगों की सेवा के लिए जल के स्त्रोत जैसे, नल, तालाब, पोखर बनवाता। मार्ग के किनारे वृक्ष लगवाता। साथ ही वह भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था, हर समय उनकी भक्ति में लीन रहता। 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 धनपाल के पांच पुत्र थे, सुमना, द्युतिमान, मेधावी, सुकृत और धृष्टबुद्धि। धनपाल का सबसे छोटा और पांचवां पुत्र धृष्टबुद्धि हमेशा पाप कर्म ही किया करता। साथ ही जुआ खेलता और मदिरापान करता। एक दिन वह एक नगरवधू (वेश्या) के गले में बाहें डालकर घाट के चौराहे पर घूमता देखा गया। बेटे के इस कृत्य से परेशान होकर धनपाल ने उसे घर से निकाल दिया। घर से निकाले जाने के कारण उसके पास खाने के लिए भी कुछ नहीं था व्यसन करना तो दूर की बात है। वह दर-दर भटक रहा था। 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 एक दिन उसका कोई पुण्य उदय हुआ और वह महर्षि कौण्डिन्य के आश्रम पर जा पहुंचा। यह वैशाख मास की घटना है। कौण्डिन्य ऋषि उस समय गंगास्नान के लिए गए हुए थे। जब वह आश्रम में लौटे तो पश्चताप के भार से भरा हुआ धृष्टबुद्धि उनके चरणों में गिर पड़ा और रोते हुए उनसे ऐसे व्रत के बारे में पूछने लगा, जो उसके सभी पाप कर्मों का क्षय कर सके। तब महर्षि ने उसे मोहिनी एकादशी का व्रत करने के लिए कहा। इस व्रत के प्रभाव से उसकी दरिद्रता दूर हुई और मृत्यु के बाद उसे वैकुंठ लोक में स्थान मिला। 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 व्रत-विधि: पुराणों के अनुसार दशमी के दिन संध्या काल में सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए। रात्रि में भगवान का ध्यान करते हुए सोना चाहिए। एकादशी का व्रत रखने वाले को अपना मन को शांत और स्थिर रखना चाहिए। एकादशी व्रत के दौरान मन में किसी भी प्रकार का द्वेष भाव मन में नहीं रखना चाहिए। क्रोध और दूसरे की निंदा करने से भी बचना चाहिए। मोहिनी एकादशी पूजा विधि भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी, ऋतु फल और तिल का प्रयोग करें। व्रत के दिन अन्न सेवन करना वर्जित है माना गया है। इसलिए व्रत की अवधि में वरती को अन्न ग्रहण से दूर रहना चाहिए। 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 व्रत में निराहार रहें और शाम में पूजा के बाद फल ग्रहण कर सकते हैं। यदि आप किसी कारण व्रत नहीं रखते हैं तो भी एकादशी के दिन चावल का प्रयोग भोजन में नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से व्रत का फल मिलता है। एकादशी के दिन रात्रि जागरण का अत्यधिक महत्व है। संभव हो तो रात में जगकर भगवान का भजन-कीर्तन करें। एकादशी के दिन विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को ब्राह्मण भोजन करवाने के बाद स्वयं भोजन करें। 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 #नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त किया गया है। 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 ( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्था और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। ) 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ #🙏 मोहिनी एकादशी
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