🙏jay bhim 🙏
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 [][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][] *_बुद्ध के उपदेश_* [][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][] *_पोस्ट क्रमांक 1⃣1⃣1⃣_* [][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][] *_अनाथपिण्डक (सुदत्त)_* _सुदत्त कौशल जनपद की राजधानी श्रावस्ती का निवासी था। कौशल नरेश प्रसेनजीत का बडा श्रेष्ठी (खजांची) था।वह गरीबों को बहुत दान देता था।इसीलिए उसका नाम अनाथपिण्डक था।अनाथपिण्डक की पत्नी पुण्यलक्षणा सुंदर एवं गरिमामयी महिला थी। उनके तीन पुत्रियां और एक पुत्र था।_ _सुदत्त किसी काम से राज्यगृह अपने बहनोई के यहां गया था, वही वह भगवान बुद्ध के सानिध्य में आया। अनाथपिण्डक ने भगवान से कुछ उपदेश सुनने की इच्छा जाहिर की। तब भगवान ने उसे उपदेश दिया ---" जो भी चीज अस्तित्व में आती है वह सब सहेतुक होती है।न वे ईश्वर द्वारा निर्मित होती है आत्मा द्वारा और न बिना कारण के अस्तित्व में आती है। हमारे अपने कर्म ही जो अच्छे और बुरे परिणाम को जन्म देते हैं। "_ _सारा संसार पटिच्चसमूप्पाद के नियम से संचालित होता है और जितने भी कारण है, वे अचैतसिक नहीं है। जिस सोने से सोने का प्याला निर्मित होता है वह आदि से अंत तक सोना ही सोना होता है।_ _" हम आत्मा और आत्मार्थ से मुक्त हो क्योंकि सभी चीजें कारण और कार्य के नियम से बंधी है। इसीलिए हम कुशल कर्म करें ताकि उनका परिणाम भी कुशल ही हो। "_ _अनाथपिण्डक बोला, " तथागत के वचनों का सत्य मैं ह्रदयंगम कर रहा हूं। मैं अपने अज्ञान को और भी अधिक दूर करना चाहता हूं। "_ _मानव सेवा की उत्कट इच्छा जाहिर करते हुए उस ने भगवान से पूछा -- क्या यह उचित होगा कि मैं अपनी संपत्ति ,अपने घर और अपने कारोबार का त्याग कर दूं और धम्ममय जीवन का सुख प्राप्त करने के लिए बेघर हो जाऊं?_ _तथागत का उत्तर था-- धम्ममय जीवन का सुख हर उस व्यक्ति के लिए उपलब्ध है जो आर्य अष्टांगिक मार्ग पर चलता है। जिसकी धन में सकती नहीं है, जिसके पास धन है लेकिन वह उसका उचित उपयोग करता है। ऐसा इंसान अपने मानव बंधुओं के लिए एक वरदान है। इंसान का जीवन, ऐश्वर्य और अधिकार उसे अपना दास नहीं बनाते किंतु जीवन, ऐश्वर्या और अधिकार के प्रति इंसान की आसक्ति ही उसे अपना दास बना लेती है. . . इंसान चाहे जो केरे, चाहे वे शिल्पी रहे, चाहे व्यापार करें, चाहे सरकारी नौकरी करें अथवा संसार त्यागकर ध्यान भावना में रत रहे उन्हें अपना काम पूरे दिल से करना चाहिए। उन्हें परिश्रमी और उत्साह ही रहना चाहिए और यदि वे उस कमल की तरह जो पानी में रहकर भी पानी से अछूता रहता है, जीवन संघर्ष में रहने पर भी अपने मन में ईर्ष्या और घृणा को जगह नहीं देते, यदि वह संसार में रहते हुए भी स्वार्थ भरा नहीं बल्कि परमार्थ भरा जीवन व्यतीत करते हैं तो इसमें कुछ भी संदेह नहीं कि उनका मन आनंद, शांति और सुख से भर जाएगा।_ _अनाथपिण्डक को यह एहसास हो हो गया था कि यह सत्य का धम्म है, सरलता का धम्म है और प्रज्ञा का धम्म है। उसकी सदधम्म मे प्रगाढ़ आस्था हो गई और उसने प्राणांत तक शरणागत उपासक रहने की प्रार्थना की।_ _अनाथपिण्डक ने भगवान बुद्ध से प्रार्थना की कि वह श्रावस्ती में एक विहार की स्थापना करना चाहता है और भगवान वहां पधार कर विहार का दान स्वीकार करें। भगवान ने मुस्कुराकर स्वीकृति प्रदान की।_ _श्रावस्ती आकर अनाथपिण्डक ने राजकुमार का उद्यान (पार्क) देखा जो शहर से थोड़ी ही दूर था और साधना केंद्र के लिए उपयुक्त था। अनाथपिण्डक ने राजकुमार जैत से वह उद्यान खरीदने की इच्छा प्रकट की लेकिन राजकुमार ने बेचने से मना कर दिया।अनाथपिण्डक की जिद करने पर राजकुमार झुंझलाकर कह दिया की लेना ही है तो सारी जमीन पर सोना भी जाना पड़ेगा।अनाथपिण्डकने सोना बिछावाना शुरू कर दिया। बेलगड़िया भर भरकर सोने के सिक्के लाता था और उद्यान की जमीन पर बिछाता था। एक-एक कर उसने 18 करोड सोने के सिक्के बिछा दिए।_ _जब राजकुमार को पता चला कि इस जगह पर साधना केंद्र बनेगा और भगवान बुद्ध लोगों को धर्म सिखाएंगे तो उसने बाकी जमीन अपनी तरफ से दान दे दी।अनाथपिण्डक ने और 18 करोड़ सोने के सिक्के खर्च कर वहां एक विशाल विहार का निर्माण कराया जिसे अनाथपिण्डक का जैतवनाराम के नाम जाना जाता था। भगवान बुद्ध ने अनेक वर्षावास यहीं पर बिताए।_ क्रमशः [][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][] *_सबका मंगल हो। सबका कल्याण हो।_* 🙏🌷🙏🌷🙏 *_नमो बुद्धाय जय भिम_* vidya raj gawai 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
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🙏jay bhim 🙏 - बुद्धं नमामि । धम्मं नमामि । संघं नमामि । बुद्ध आणि त्यमा दैवानंद सोनुने गौतम बुद्ध और उनके उपदेश भवतु सब्ब मंगलम् । । औरंगाबाद जोश खराया । - ShareChat
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5 महिन्यांपूर्वी
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काढून टाका
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मला ही पोस्ट रिपोर्ट करावी वाटते कारण ही पोस्ट...
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