sant ram pal ji maharaj

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Vijay Dass
849 views 20 days ago
#GodNightThursday #Kalyug_Mein_SatyugKiShuruat6 . आशा और तृष्णा भगत आत्माऔ,! देखो आशा और तृष्णा दोनों बहनें हैं और इन दोनों का जोड़ा है। ये दोनों ही काल के हुक्म में बंधी रहती हैं और उसके हुकम से कभी बाहर नहीं जाती । ये दोनों बंदे के अंदर घुसकर व अपने जाल में फंसा कर उसको 84 लाख योनियों में भर्मा देती हैं । यह इनका नित्य, रोज का कर्म है। आशा कहती है कि अपनी बहन तृष्णा को बोलती है कि सुन बहन तृष्णा, देख ! मैं कितनी चालाक हूं । मैं इस बंदे के अंदर रम कर इसको सारी उम्र पैसे, औलाद, ठाठ-बाठ , खाने-पीने आदि की आशा ही आशा में रख देती हूं और सतगुरु का कभी खोज नहीं करने देती । अंत समय में इसको यम के दूत पकड़ ले जाते हैं और चौरासी में डाल देते हैं। फिर तृष्णा कहती है कि सुन बहन आशा अब तू मेरी भी सुन, मैं तुझ से कितनी ज्यादा चालाक और तगड़ी हूं । जब मैं बंदे के अंदर बैठ जाती हूं तो बंदे को ऐसी तृष्णा लगाती हूं कि वो सब बातों को भूल जाता है और तृष्णा में फंस कर मन व इंद्रियों का यार हो जाता है तथा अपनी सारी उम्र विषय विकारों में बिता देता है। बंदा जितनी भी आशाएं लेकर चलता है उन सब पर पानी फेर देती हूं। जब अंत समय आता है तो बंदा अपने किये हुए पर सिर धुन धुन कर पछताता है। इसलिए परम संत रामपाल दास महाराज जी कहते है कि आशा व तृष्णा से बचो। ये सबके मन मे काल के दूत बनकर निवास करते है। और जीवआत्मा को भगती मार्ग पर नही लगने देते। "फिर जीव इनके चक्र मे चौरासी मे चला जाता है।" Watch Factful Debates Yt #sant ram pal ji maharaj #me follow
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Vijay Dass
894 views 20 days ago
#GodNightThursday #Kalyug_Mein_SatyugKiShuruat6 . ज्ञान गंगा ज्ञान गंगा केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि कोटि जन्म से भक्त रहे जीव को प्राप्त हुए मानव जीवन को सही दिशा दिखाने वाला दिव्य ज्ञान का अमृत स्रोत है। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखित ज्ञान गंगा पुस्तक ने करोड़ों लोगों के जीवन में आध्यात्मिक जागृति लाई है। यह पुस्तक धर्मग्रंथों के गूढ़ रहस्यों को सरल भाषा में समझाकर बताती है कि वास्तविक मोक्ष मार्ग क्या है और पूर्ण परमात्मा कौन है। इस पवित्र पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें दिए गए प्रत्येक ज्ञान का प्रमाण हमारे पवित्र वेदों, गीता जी, कुरान शरीफ, बाइबल और गुरु ग्रंथ साहिब जी से दिया गया है। ज्ञान गंगा पढ़ने से जीवन जीने की सही राह मिलती है। मनुष्य बुराइयों से दूर होता है।भक्ति का वास्तविक ज्ञान प्राप्त होता है। मन में शांति और सकारात्मकता आती है। आज के तनावपूर्ण और भटकते समाज के लिए यह पुस्तक एक प्रकाश स्तंभ के समान है। यदि आपने अभी तक ज्ञान गंगा नहीं पढ़ी, तो अवश्य पढ़ें और अपने परिवार व मित्रों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित करें। और सबसे बड़ी बात यह पुस्तक निशुल्क मिलती है। अपना पूरा नाम पता फोन नंबर समेत 7496801825 पर Whatsapp कर दीजिए। ज्ञान गंगा पढ़ें जीवन को सफल बनाएं। Watch Factful Debates Yt #sant ram pal ji maharaj #me follow
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Vijay Dass
586 views 3 days ago
#GodNightMonday #रोटीकपड़ा_चिकित्सा_शिक्षामकान . सतगुरु की पहचान परमेश्वर स्वयं आकर या अपने परमज्ञानी संत को भेज कर सच्चे ज्ञान के द्वारा धर्म की पुनः स्थापना करते है। वह भक्ति मार्ग को शास्त्रों के अनुसार समझाता है। वह संत सभी धर्म ग्रंथों का पूर्ण जानकार होता है। सतगुरु के लक्षण कहूं, मधूरे बैन विनोद। चार वेद षट शास्त्र, कहै अठारा बोध।। सतगुरु गरीबदास जी महाराज अपनी वाणी में पूर्ण संत की पहचान बता रहे हैं कि वह चारों वेदों, छः शास्त्रों, अठारह पुराणों आदि सभी ग्रंथों का पूर्ण जानकार होगा अर्थात् उनका सार निकाल कर बताएगा। पूरा सतगुरु सोए कहावै, दोय अक्खर का भेद बतावै एक छुड़ावै एक लखावै, तो प्राणी निज घर को जावै जै पंडित तु पढ़िया, बिना दुउ अखर दुउ नामा। प्रणवत नानक एक लंघाए, जे कर सच समावा।। वेद कतेब सिमरित सब शास्त्र, इन पढ़ि मुक्ति न होई।। एक अक्षर जो गुरुमुख जापै, तिस की निरमल होई।। गुरु नानक जी महाराज अपनी वाणी द्वारा समझाना चाहते हैं कि पूरा सतगुरु वही है जो दो अक्षर के जाप के बारे में जानता है। जिनमें एक काल व माया के बंधन से छुड़वाता है और दूसरा परमात्मा को दिखाता है और तीसरा जो एक अक्षर है वो परमात्मा से मिलाता है। जो मम संत सत उपदेश दृढ़ावै,वाके संग सभ राड़ बढ़ावै। या सब संत महंतन की करणी, धर्मदास मैं तोसे वर्णी।। कबीर साहेब अपने प्रिय शिष्य धर्मदास को इस वाणी में ये समझा रहे हैं कि जो मेरा संत सत भक्ति मार्ग को बताएगा उसके साथ सभी नकली संत व महंत झगड़ा करेंगे। ये उसकी पहचान होगी। कबीर, सतगुरु शरण में आने से, आई टले बलाय। जै मस्तिक में सूली हो, वह कांटे में टल जाय।। सतगुरु अर्थात् तत्वदर्शी सन्त से उपदेश लेकर मर्यादा में रहकर भक्ति करने से प्रारब्ध कर्म के पाप अनुसार यदि भाग्य में सजा ए मौत हो तो भी वह पाप कर्म हल्का होकर सामने आएगा। उस साधक को कांटा लगकर मौत की सजा टल जाएगी। संतों सतगुरु मोहे भावै, जो नैनन अलख लखावै। ढोलत ढिगै ना बोलत बिसरै, सत उपदेश दृढ़ावै।। आंख ना मूंदै , कान ना रूदैं , ना अनहद उरझावै। प्राण पूंज क्रियाओं से न्यारा, सहज समाधी बतावै। वेदों में पूर्ण सन्त की पहचान बताई है सन्धिछेदः- अर्द्ध ऋचैः उक्थानाम् रूपम् पदैः आप्नोति निविदः। प्रणवैः शस्त्राणाम् रूपम् पयसा सोमः आप्यते।। अनुवादः- जो सन्त (अर्द्ध ऋचैः) वेदों के अर्द्ध वाक्यों अर्थात् सांकेतिक शब्दों को पूर्ण करके (निविदः) आपूर्ति करता है (पदैः) श्लोक के चौथे भागों को अर्थात् आंशिक वाक्यों को (उक्थानम्) स्तोत्रों के (रूपम्) रूप में (आप्नोति) प्राप्त करता है अर्थात् आंशिक विवरण को पूर्ण रूप से समझता और समझाता है (शस्त्राणाम्) जैसे शस्त्रों को चलाना जानने वाला उन्हें (रूपम्) पूर्ण रूप से प्रयोग करता है एैसे पूर्ण सन्त (प्रणवैः) औंकारों अर्थात् ओम्-तत्-सत् मन्त्रों को पूर्ण रूप से समझ व समझा कर (पयसा) दूध-पानी छानता है अर्थात् पानी रहित दूध जैसा तत्व ज्ञान प्रदान करता है जिससे (सोमः) अमर पुरूष अर्थात् अविनाशी परमात्मा को (आप्यते) प्राप्त करता है। वह पूर्ण सन्त वेद को जानने वाला कहा जाता है। तत्वदर्शी सन्त वह होता है जो वेदों के सांकेतिक शब्दों को पूर्ण विस्तार से वर्णन करता है जिससे पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति होती है वह वेद के जानने वाला कहा जाता है। पूर्ण परमात्मा को पहचानने के लिये सभी धर्मग्रन्थों में व मोक्ष प्राप्त सन्तों की वाणियों में उस परमात्मा का नाम व पहचान भी बताया गया हैं जिससे आप लोग पहचानें कि वास्तव में परमात्मा एक है उसका नाम भी एक है।संत रामपाल जी महाराज जी ने बताये ये प्रमाण अपने-२ पवित्र शास्त्रों में देखें कविरसि, कविर्मितौजा, कविर् , कविर्गीभि, कवीनाम, कविर्देव, कवि, कविरा, कबीरा, धाणक रुप(कबीर) करतार, हक्का कबीर करीम परवरदीगार, कबिर् कुबूरि०, इबादत कबीरा, कबाइर, 'अल्लाहु अकबर(कबीर) व लाइला -ह इल्लल्लाह, कबीरन, जिहादन कबीरा, खबीरा, खबविर, खबीरन, खबीरुह व कदीरा, अकबर व अक्बरु, कबीला, यस्तकबिर, कब्बिरीन, कविय्युन, कबीरिम, कबीरुहुम, कबीरल्लहुम, कबीरतन, कब्बिर्हु, तक्बीरा, कबीरुंव, कबीरतुन, कबीरिम, फजलुल कबीर, अजरुन कबीर, शैखून कबीर, तुग्यानन कबीर, फसादुन कबीर,अलुव्वन कबीरा, खबिर् , खबीर, खुदा, अल्लाह ताला, El is Kabir, Almighty god kabir, Kabir is mighty men, परमेश्वर इत्यादि.... सभी सद्ग्रन्थों ने मिलकर उस एक परमात्मा का नाम बताया कि 'कबीर साहिब' ही पूर्ण परमात्मा है वही सबसे बडा भगवान है, all mighty god है।साथ में परमात्मा को अाँखों देखा सन्तों जिसमें नानक जी, गरीबदास जी, दादू जी, धर्मदास जी, मलूकदास जी, घीसा जी, रामदेव जी ने भी परमेश्वर कबीर साहिब का प्रमाण अपनी वाणियों में ठोककर दिया है। अब आप समझ जाओंगे कि परमपिता परमात्मा एक है उसका नाम कबीर है। अब यह बात समझ में आयेगी कि जो कहते थे कि-- हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई, आपस में सब भाई-भाई...तो हम चार भाइयों का पिता कबीर परमात्मा है क्योंकि कबीर परमात्मा का नाम ही सभी शास्त्रों में वर्णित है अन्य किसी का नहीं है। पिता स्वयं अपना परिचय अपने पुत्र को देता है कि मैं ही तुम्हारा पिता हुँ बच्चे को कैसे पता हो सकता है और जब बच्चा सोचता है कि मैं आपको आपके कहने से पिता नहीं मानूँगा हमें D.N.A रिपोर्ट दो तो मैं आपको पिता मानूँगा। जब पिता असली होता है तो अपने बच्चे को D.N.A. का प्रमाण दे देता है। संत रामपाल जी महाराज ने परमेश्वर कबीर साहिब जी की पहचान सभी शास्त्रों व आँखों-देखा सन्तों की वाणियों में से दिखा दी है। यही असली रिपोर्ट है जिससे हम पूर्ण परमात्मा को पहचान पाये है। आप सब शिक्षित हो अपने- अपने शास्त्रों से प्रमाण मिलाओ यह हमारी प्रार्थना है। AnnapurnaMuhim SantRampalJi #sant ram pal ji maharaj #me follow
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Vijay Dass
584 views 2 days ago
#GodNightTuesday #रोटीकपड़ा_चिकित्सा_शिक्षामकान . सच्चा सुख केवल गुरु चरणनमे .कबीर, झुठे सुख को सुख कहे, मान रहा मन मोद। ये सकल चबीना काल का, कुछ मख मे कुछ गोद। आदमी परिवार, बंधु, रिश्तेदार, पड़ोसी, कार, कोठी और धन से चिपका रहता है। परंतु यह सब माया का धोखा है। कबीर साहेब जी को आज के समय मे सभी जानते हैं कि वे एक कवि थे लेकिन वास्तव में कबीर साहेब जी पूर्ण परमात्मा है जो अपने निजधाम (सतलोक ) में रहते हैं। पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी अपना सत्य ज्ञान प्रचार दोहों, साखियों व कविताओं के माध्यम से करते हैं।इसलिय वे कवियों में श्रेष्ठ कवि की पदवी प्राप्त करते हैं । कबीर साहेब जी ने सर्व श्रेष्ठ तीर्थ के बारे में लोगों को बताया और समझाया कि सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कौन सा है जिससे सर्व तीर्थों से अधिक लाभ मिलता है ? सर्वश्रेष्ठ चित शुद्ध तीर्थ है । चित शुद्ध तीर्थ अर्थात तत्वदर्शी संत का सत्संग सर्व तीर्थों से श्रेष्ठ है :- सूक्ष्मवेद (तत्वज्ञान ) में कहा है कि :- अड़सठ तीर्थ भ्रम-भ्रम आवै । सो फल सतगुरु चरणो पावै।। गंगा, यमुना, बद्री समेते । जगन्नाथ धाम है जेते ।। भ्रमें फल प्राप्त होय न जेतो । गुरु सेवा में फल पावे तेतो ।। कोटिक तीर्थ सब कर आवै । गुरु चरणा फल तुरंत ही पावै ।। पूर्ण परमात्मा द्वारा दिए तत्वज्ञान यानी सूक्ष्म वेद में कहा है कि तीर्थों और धामों पर जाने से कोई पुण्य लाभ नहीं । असली तीर्थ सतगुरु ( तत्वदर्शी संत ) का सत्संग सुनने जाना है । जहां तत्वदर्शी संत का सत्संग होता है वह सर्वश्रेष्ठ तीर्थ तथा धाम है । इस इस कथन का साक्षी संक्षिप्त श्रीमद् देवी भागवत महापुराण भी है । उसमें छठे स्कंद के अध्याय 10 में लिखा है कि सर्वश्रेष्ठ तीर्थ तो चित शूद्ध तीर्थ है । जहां तत्वदर्शी संत का सत्संग चल रहा है उसके आध्यात्मिक ज्ञान से चित की शुद्धि होती है । शास्त्रोक्त अध्यात्म ज्ञान तथा शास्त्रोक्त भक्ति विधि का ज्ञान होता है जिससे जीव का कल्याण होता है । अन्य तीर्थ मात्र भ्रम है । इसी पुराण में लिखा है कि सतगुरु रूप तीर्थ मिलना अति दुर्लभ है । लोक आधारित ज्ञान पर आसक्त हो कर व सतभक्ति न मिलने के कारण मनुष्य अपने कर्म आधार पर भक्ति करते हुए सोचता है वह सब कुछ अच्छा कर रहा है। लेकिन वह माया के आधीन रहता है । हम सभी जानते हैं कि कबीर साहेब आज से लगभग 600 वर्ष पहले इतिहास के भक्तियुग में जुलाहे की भूमिका निभाकर गये थे। विडंबना है कि सर्व सृष्टि के रचनहार, भगवान स्वयं धरती पर अवतरित हुए और स्वयं को दास सम्बोधित किया। कबीर जी ने गुरु और शिष्य की परंपरा बनाए रखने के लिए स्वयं गुरु बना कर गुरु और शिष्य का अभिनय किया। कबीर साहेब जी ने अपनी वाणियों के माध्यम से भी गुरु और शिष्य के महत्व का वर्णन किया है। मनुष्य के जीवन में गुरु का क्या महत्व है। कबीर साहेब जी की वाणी है- तीरथ गए ते एक फल, संत मिले फल चार। सद्गुरु मिले अनेक फल, कहे कबीर विचार।। उपरोक्त वाणी में कबीर साहेब जी ने समझाया है कि तीर्थ में जाने से एक फल मिलता है वहीं किसी संत से मिलने पर चार प्रकार के फल मिलते हैं पर जीवन में अगर सच्चा गुरु (सतगुरु) मिल जाये तो समस्त प्रकार के फल मिल जाते हैं। या दुनिया दो रोज की, मत कर यासो हेत। गुरु चरनन चित लाइये, जो पूर्ण सुख हेत।। कबीर साहेब जी ने इस दोहे के माध्यम से यह गया दिया है कि यह दुनिया कुछ ही दिनों की है इसलिए इससे मोह का सम्बन्ध नहीं जोड़ना चाहिए। अपने मन को गुरु के चरणों में लगाएं जो सब प्रकार का सुख देने वाला है। क्यूंकि गुरु ही परमात्मा तक पहुंचने का एकमात्र साधन हैं। गुरु पारस को अन्तरो, जानत हैं सब संत। वह लोहा कंचन करे, ये करि लेय महंत।। गुरु और पारस के अंतर को ज्ञानी पुरुष बहुत अच्छे से जानते हैं। जिस प्रकार पारस का स्पर्श लोहे को सोना बना देता है कबीर जी ने बताया है की उसी प्रकार गुरु का नित्य साथ शिष्य को भी अपने गुरु के सानिध्य में महान बना देता है। सात समुंदर की मसि करूँ, लेखनी करूँ बनराय। धरती का कागज करूँ, गुरु गुण लिखा न जाय।। कबीर साहेब ने बताया है कि अगर सारी धरती को कागज बना लिया जाये, समस्त जंगल की लकड़ियों को कलम और सातों समुद्र के जल को स्याही बना लिया जाये तो भी गुरु की महिमा का वर्णन करना संभव नहीं है। कबीर, राम कृष्ण से कौन बड़ा, उन्हों भी गुरु कीन्ह। तीन लोक के वे धनी, गुरु आगे आधीन।। कबीर साहेब जी ने बताया है कि बिना गुरु के हमें ज्ञान नहीं हो सकता है। राम, कृष्ण आदि अवतारों ने भी गुरु धारण किया था, गुरु के बिना किया गया नाम जाप, भक्ति व दान- धर्म सभी व्यर्थ है। इस प्रकार अनेको दोहों के माध्यम से कबीर परमेश्वर ने गुरु परम्परा का जीवन मे बहुत महत्व बताया है। AnnapurnaMuhim SantRampalJi #sant ram pal ji maharaj #me follow
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