akhandbharat

74 Posts • 14K views
Sarvesh Kumar Maurya
543 views 1 days ago
#विश्व मौर्य परिषद उत्तर प्रदेश #विश्व मौर्य परिषद अखंड भारत #VISHWA MAURYA PARISHAD चक्रवर्ती सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य: अखंड भारत के महान निर्माता चक्रवर्ती सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य, भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों में दर्ज एक ऐसा नाम है जो केवल एक राजा नहीं, बल्कि अखंड भारत के संस्थापक और उसकी महान शक्ति के प्रतीक थे। उन्हें "सैंड्रोकोटस" के नाम से भी जाना जाता है, जिसका उल्लेख ग्रीक इतिहासकारों ने किया है। उनकी जीवनगाथा संघर्ष, विजयों और एकीकृत भारत की कहानी है। सिकंदर और सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य का युग सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य का युग वह समय था जब सिकंदर महान अपने विजय अभियानों से दुनिया में हलचल मचा रहा था। किंतु, भारतीय उपमहाद्वीप में सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य ने अपनी सामरिक शक्ति और राजनीतिक कुशलता से सिकंदर के सेनापति सेल्युकस निकेटर को न केवल पराजित किया, बल्कि दो बार बंधक बनाकर अपनी शक्ति का लोहा मनवाया। यह घटना मौर्य साम्राज्य की महत्ता और सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य की असाधारण नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है। विश्व की सबसे बड़ी सेना सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य की सेना उस समय की सबसे बड़ी और सुसंगठित सेना थी। छह लाख नब्बे हजार सैनिकों की विशाल सेना के साथ उन्होंने मौर्य साम्राज्य का विस्तार किया। उनकी सेना में प्रशिक्षित घुड़सवार, हाथी सैनिक और पैदल सेना शामिल थी, जो तत्समय की दुनिया की सबसे ताकतवर सैन्य शक्ति थी। यह उनकी कुशलता का प्रमाण है कि इतनी बड़ी सेना को संगठित करके उन्होंने भारत को एकजुट किया। मौर्य साम्राज्य: अखंड भारत की नींव सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य का साम्राज्य उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में कर्नाटक तक और पूर्व में बंगाल से लेकर पश्चिम में अफगानिस्तान तक फैला हुआ था। यह भारत के इतिहास का पहला ऐसा साम्राज्य था जिसने पूरे भारतीय उपमहाद्वीप को एकजुट किया। उनकी शासन व्यवस्था और प्रशासनिक कुशलता ने न केवल भारत को एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाया, बल्कि इसे सांस्कृतिक और आर्थिक समृद्धि की ओर अग्रसर किया। अद्वितीय दरबार सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य का दरबार उस युग का गौरव था, जिसे "विश्व शासक का दरबार" कहा जाता है। यह वह स्थान था जहां बड़े-बड़े योद्धा और विद्वान भी सिर झुकाते थे। उनका दरबार केवल शक्ति का केंद्र नहीं था, बल्कि न्याय, ज्ञान और शांति का प्रतीक था। विष्णुगुप्त का मार्गदर्शन सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के उत्थान में महान आचार्य विष्णुगुप्त की भूमिका अमूल्य थी। चाणक्य ने न केवल उन्हें शिक्षित किया, बल्कि साम्राज्य विस्तार और शासन व्यवस्था के लिए कुशल रणनीतियाँ भी प्रदान कीं। सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य और विष्णुगुप्त की जोड़ी ने भारतीय इतिहास में ऐसा अध्याय लिखा जो सदियों तक प्रेरणा देता रहेगा। सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य की महानता जहां शेर और सिकंदर सिर झुकाते हों, वह स्थान केवल सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य जैसे चक्रवर्ती सम्राट के दरबार को ही शोभा देता है। उनकी जीवनगाथा एक ऐसे शासक की कहानी है, जिसने एक छोटे राज्य से शुरुआत करके समूचे भारतीय उपमहाद्वीप को एक छत्र के नीचे लाया। निष्कर्ष सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य न केवल एक महान सम्राट थे, बल्कि एक अद्वितीय राष्ट्र निर्माता भी थे। उनकी महानता में केवल युद्ध कौशल नहीं, बल्कि उनकी प्रजा के प्रति उनकी निष्ठा और अखंड भारत के निर्माण का उनका दृष्टिकोण झलकता है। ऐसे सम्राट को सदा स्मरण करना और उनकी शिक्षाओं का अनुसरण करना हमारा कर्तव्य है। जय जय मौर्य वंश! जय जय चक्रवर्ती सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य! (लेखक: आच. श्री सर्वेश कुमार मौर्य जी , संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष विश्व मौर्य परिषद) #sarveshkumarmaurya #vishwamauryaparishad #vmp4world #Maurya #vmp4bharat #VMP4india #Samrat #Chandragupt #history #India #विश्व_मौर्य_परिषद #सर्वेश_कुमार_मौर्य
9 likes
14 shares
Sarvesh Kumar Maurya
544 views 3 days ago
#विश्व मौर्य परिषद अखंड भारत #VISHWA MAURYA PARISHAD #विश्व मौर्य परिषद उत्तर प्रदेश मौर्य राजवंश के शक्तिशाली सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य का राज्य एक महान साम्राज्य था जो अपनी न्यायप्रियता और जनहितकारी नीतियों के लिए जाना जाता था। एक बार, चन्द्रगुप्त मौर्य ने राज्य के सीमावर्ती क्षेत्र में एक नया नगर बसाने का निर्णय लिया। इस नगर का नाम था "धर्मपुर।" यह नगर इसलिए खास था क्योंकि इसे मौर्य वंश के कर्तव्यों और आदर्शों पर आधारित एक आदर्श समाज के रूप में स्थापित किया जाना था। धर्मपुर के निर्माण के लिए चन्द्रगुप्त मौर्य ने अपने मंत्रियों और सेनापतियों से विचार-विमर्श किया। नगर की नींव रखने के दिन, चन्द्रगुप्त मौर्य ने एक भव्य समारोह का आयोजन किया, जिसमें पूरे राज्य से लोग आमंत्रित थे। चन्द्रगुप्त मौर्य ने अपने भाषण में कहा, "धर्मपुर हमारे साम्राज्य की नई पहचान होगी, जहाँ धर्म, न्याय और समानता का पालन किया जाएगा।" नगर निर्माण के बाद, अशोक ने धर्मपुर में शिक्षा, चिकित्सा और न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। नगर के मुख्य चौराहे पर एक विशाल मौर्य स्तम्भ स्थापित किया गया, जिस पर लिखा था, "धर्मपुर का कर्तव्य है कि यह अपने नागरिकों की सेवा में सदा तत्पर रहे।" एक दिन, धर्मपुर में एक वृद्ध महिला न्याय के लिए आई। उसका नाम था सुरेखा। उसका बेटा, जो नगर का एक साधारण किसान था, किसी झूठे आरोप में कैद कर लिया गया था। सुरेखा ने नगर के न्यायाधीश से प्रार्थना की, लेकिन उसे कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। वह हताश होकर सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के पास पहुंची और न्याय की गुहार लगाई। चन्द्रगुप्त मौर्य ने मामले की पूरी जानकारी ली और तत्काल एक निष्पक्ष जांच का आदेश दिया। जांच में पता चला कि सुरेखा का बेटा निर्दोष था और उसे झूठे आरोप में फंसाया गया था। चन्द्रगुप्त मौर्य ने तुरंत उस व्यक्ति को रिहा करवाया और झूठे आरोप लगाने वालों को कड़ी सजा दी। इस घटना के बाद, चन्द्रगुप्त मौर्य ने धर्मपुर में एक नया कानून लागू किया, जिसमें यह सुनिश्चित किया गया कि कोई भी नागरिक बिना उचित जांच के दंडित न हो। इस प्रकार, धर्मपुर मौर्य वंश के कर्तव्यों और आदर्शों का प्रतीक बन गया, जहाँ धर्म, न्याय और समानता की स्थापना हुई। धर्मपुर की यह कहानी मौर्य वंश के आदर्शों और कर्तव्यों का जीवंत उदाहरण है, जो आज भी हमें प्रेरित करती है कि हम अपने समाज में न्याय और समानता की स्थापना करें। आच. सर्वेश कुमार मौर्य जी संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष विश्व मौर्य परिषद जय मौर्य वंश! जय हो चक्रवर्ती सम्राट श्री चन्द्रगुप्त मौर्य जी की! जय विश्व मौर्य परिषद! जय मौर्य साम्राज्य #sarveshkumarmaurya #vmp4world #vishwamauryaparishad #viral #viralpost #Maurya
13 likes
12 shares