hindikavita

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Mahendra Narayan
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Mahendra Narayan
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हँसना रोना ज़िन्दगी, मानो इक सौगात । दिवस अगर है जागना , सोना समझो रात ॥ सोना समझो रात , चैन को देने वाली । देती है आराम , हमें जो होकर काली ॥ अगर नही संतोष , लोभ में केवल फँसना। रोना सुबहो शाम , न आता उसको हँसना ॥ #📚कविता-कहानी संग्रह #👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺 #कविता #✍मेरे पसंदीदा लेखक
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