विजय पाल
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vijay
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मेरे माधव कहते हैं __ जिंदगी में कभी भी यह मत सोचो कि कौन, कब, कैसे, कहां,बदल गया बस इतना देखों कि वो तुम्हे सिखाकर क्या गया पीड़ाएं केवल दुःख ही नहीं देती ज्ञान भी देती है..!! राधे-राधे...🌸🌸 💛❤️______________🩷🩵___________🧡💚 #📓 हिंदी साहित्य #विजय पाल #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
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vijay
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संबंध हमेशा शब्दों से नहीं बनते, वो एक अदृश्य धागे से बंधते हैं — जो हृदय से निकलकर हृदय तक पहुँचता है। जिसे देखा नहीं जा सकता, पर महसूस किया जा सकता है… जहाँ कोई दिखावा नहीं, बस अपनापन होता है। जो संबंध हृदय से निभाए जाते हैं, वे समय से परे हो जाते हैं। उम्र बीत जाती है, लोग बदल जाते हैं, पर वह एहसास नहीं मिटता — क्योंकि सच्चे रिश्ते देह के नहीं, आत्मा के स्पर्श से बने होते हैं। रिश्तों में स्थायित्व शब्दों की चमक से नहीं आता, बल्कि उन खामोशियों से आता है, जहाँ दो दिल बिना बोले एक-दूसरे को समझ लेते हैं। वहीं प्रेम अपनी सबसे सच्ची भाषा बोलता है। और सच कहूँ — जीवन कितना भी लंबा क्यों न हो, मन कभी सच्चे रिश्तों से भरता नहीं। क्योंकि हर संबंध, हमारे भीतर कुछ छोड़ जाता है — एक सीख, एक अनछुआ स्पर्श, या फिर कोई अधूरा एहसास। इसलिए संबंधों को निभाइए… वादों से नहीं, भावों से। क्योंकि अंत में जो टिकता है, वो शब्द नहीं — हृदय की निष्ठा होती है। 💫 #📓 हिंदी साहित्य #📖 कविता और कोट्स✒️ #विजय पाल #✍मेरे पसंदीदा लेखक #✍️ साहित्य एवं शायरी
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