#जय माँ भारती #📚कविता-कहानी संग्रह जय माता दी
हिन्दी कविता: #अटल जी
कवि हृदय थे सत्य पुरुष थे
सदा सत्य के साथ ही रहते थे
मन के भीतर कुछ ना रखते
सब कुछ मुख पर ही वो कहते थे,,,,,,
छल कपट ना करते थे वो
वो सरल शुभाव के व्यक्ति थे,
सदा पूर्ण समर्पित भाव से वो
मां भारती की सेवा करते थे,,,,
जब उनकी लेखनी लिखती थी कविता तब शब्दों की बहती थी
सरिता,
हर एक शब्द के भाव सरल थे
हृदय से कविता लिखते अटल थे,,,,,,,
बीच सदन जो श्राप दिया विपक्ष को वह सत्य हुआ यह सारे जग ने देखा,
संत के अश्क को बना के स्याही
वक्त ने एक नया इतिहास लिखा है,,,
मां भारती के आन बान और शान के खातिर,
श्रद्धेय अटल जी सदा अटल थे
अपने अटल इरादों पर,
रसिक लेखनी श्रद्धा सुमन
अर्पित करती है,
अटल जी के श्री चरणों में
और उनके अमर विचारों को,,,,
कवि: रमेश हरीशंकर तिवारी
( रसिक भारती ) #मुम्बईकर