ईरान और अमेरिका के बीच फिर बढ़ा तनाव

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Naman News
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#अमेरिका #अमेरिका-ईरान #ईरान ने दी अमेरिका को चेतावनी #ईरान और अमेरिका के बीच फिर बढ़ा तनाव मिडिल ईस्ट में युद्ध खत्म करने के समझौते पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने औपचारिक तौर पर डिजिटल हस्ताक्षर कर दिया है। अब शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के शीर्ष अधिकारियों के बीच मुलाकात होने की संभावना है। ईरान की तरफ से मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालीबाफ इसमें शामिल होंगे जबकि अमेरिका का प्रतिनिधित्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे और राष्ट्रपति ट्रंप के भी इसमें शामिल होने की संभावना है। यानि 39 दिनों के बाद अमेरिका ईरान की ज्यादातर शर्तों को मानने के लिए मजबूर हुआ है। ईरान युद्ध ने सुपरपावर अमेरिका की युद्ध लड़ने की क्षमता की पोल खोल दी है। सवाल ये हैं कि अगर ईरान सिर्फ 39 दिनों में नाक में दम कर सकता है तो चीन और रूस जैसे देश उसका क्या हाल करेंगे। चीन और रूस के पास तो अमेरिका में घुसकर मारने की क्षमता भी है और एडवांस से एडवांस हथियार भी हैं। इसीलिए 39 दिनों के इस युद्ध ने बहुत कुछ उजागर कर दिया है। अमेरिका के आधुनिक हथियार बेहद असरदार तो हैं लेकिन हथियारों के बड़े भंडार और तेजी से उनकी भरपाई के बिना लंबे युद्ध में उन्हें बनाए रखना मुश्किल है। इस लड़ाई से साफ हो गया है कि क्वालिटी तो जरूरी है ही साथ ही क्वांटिटी भी चाहिए।
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Naman News
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#🗞️समझौता नहीं तो होर्मुज में आएगा तूफान🛳️ #अमेरिका-ईरान #ईरान और अमेरिका के बीच फिर बढ़ा तनाव डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस कदम का मकसद ईरानी जहाजों की आवाजाही रोकना है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि वो जहाज जो ईरान को टोल चुका रहे हैं उन्हें पकड़ा जाए चाहे वो किसी भी देश के हैं। चीन जा रहे एक जहाज ने ट्रंप की चेतावनी को ताक पर रखते हुए होर्मुज पार कर लिया है और हमारी जानकारी के मुताबिक अमेरिकी सेना ने उसे नहीं रोका है। लेकिन ट्रंप चाहते हैं कि होर्मुज खुलवाने के लिए दुनिया के देश आएं और ईरान से झगड़ा करें। हालांकि दुनिया के ज्यादातर देशों ने ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई से साफ इनकार कर दिया है। इसके बजाय अपने ऊर्जा कार्गो को सुरक्षित करने के लिए कई देश स्वतंत्र रूप से कदम उठा रहे हैं। जैसे भारत और चीन जैसे देश सीधे ईरानी लीडरशिप से बात कर रहे हैं। लेकिन इस नाकाबंदी के जरिए ट्रंप शायद कई अन्य देशों को भी मध्य-पूर्व संकट में घसीटने की कोशिश कर रहे हैं।
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