कुम्भ नोटिस बोर्ड
प्रयागराज. कुभ मेले में शुक्रवार को एक साथ दस हजार कलाकारों ने गंगा थीम पर चित्रकारी कर एक विश्व रिकॉर्ड कायम किया। वहीं शनिवार को स्वच्छता को लेकर कुंभ में एक रिकार्ड बनाया जाएगा। एक साथ दस हजार सफाईकर्मी हाथों में झाडू लेकर सफाई करेंगे। उप्र के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह कमांड सेंटर से इस मिशन को हरी झंडी दिखाएंगे। इस बीच महाशिवरात्रि के मौके पर स्नान करने के लिए भी श्रद्धालु संगम पहुंचने लगे हैं। यह कुंभ का अंतिम स्नान है। इस स्नान के साथ ही मेले का औपचारिक समापन हो जाएगा। ये भी पढ़ें कुंभ में 10 हजार लोगों ने हाथ छापकर पेंटिंग बनाई, वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिव्य और भव्य कुंभ के आखिरी स्नान पर्व महाशिवरात्रि से पहले ही संगम पर एक बार फिर आस्था की लहरें हिलोरें मारने लगी हैं। मेले के आखिरी दौर में कुंभ स्नान का पुण्य बटोरने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंचने लगी है। लोग शिविरों और होटलों में जगह पक्की कर रहे हैं। गुरुवार को संगम नोज से लेकर अन्य घाटों पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। शाम तक लाखों की तादाद में भक्तों ने डुबकी लगाई।कुंभ मेले के आखिरी स्नान पर्व से पहले श्रद्धालु प्रयागराज में डेरा डालने लगे हैं। इससे पहले कुंभ मेले में शुक्रवार को एक साथ दस हजार कलाकारों ने एक पेंटिंग तैयार की। एक साथ हजारों कलाकारों द्वारा तैयार की गई इस पेंटिंग को गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में जगह मिल गई है। इस पेंटिंग में दस हजार से ज़्यादा कलाकार सिर्फ अपने हाथों की छाप का इस्तेमाल कर गंगा थीम पर पेंटिंग बनाई। इसके लिए कुंभ मेले के गंगा पंडाल में ख़ास आयोजन किया गया। आठ घंटे के इस आयोजन में समय पूरा हाने से पहले ही पिछला वर्ल्ड रिकार्ड टूट गया।
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कुम्भ नोटिस बोर्ड - | घर बैठे देखें कुंभ | महाशिवरात्रि स्नान के लिए पहुंचने लगे श्रद्धालु , स्वच्छता पर आज बनेगा विश्व रिकॉर्ड • शटल बस चलाने और चित्रकारी का बन चुका है रिकॉर्ड • महाशिवरात्रि के स्नान के लिए तैयारियां शुरू • महाशिरात्रि के बाद हो जाएगा मेले का औपचारिक समापन c - - - ShareChat
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8 महीने पहले
कुंभ में आजः 09 फरवरी 2019 को होने वाले प्रमुख आयोजन, Kumbh (कुंभ) में इस बार कई  इतिहास रचा जा रहा है। मौनी अमावस्या पर 5 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई। 24 जनवरी को कुंभ मेला क्षेत्र में तीन हजार से ज्यादा प्रवासी भारतीय पहुंचे। कुंभ में 29 जनवरी को एक और इतिहास रचा गया। पहली बार लखनऊ से बाहर कुंभनगरी में आयोजित की गई प्रदेश कैबिनेट की पहली  बैठक में दुनिया के सबसे लंबे गंगा एक्सप्रेसवे को मंजूरी दी गई। 31 जनवरी को कुंभ मेले में विहिप की धर्मसंसद में दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किए गए तो धर्मसंसद के आखिरी दिन 1 फरवरी को राम मंदिर निर्माण का प्रस्ताव रखा गया।  कुंभ मेला विधिवत रूप से अपनी एक माह की धार्मिक यात्रा पर आगे बढ़ रहा है। इसी के साथ मेला क्षेत्र में बड़े धार्मिक आयोजन भी किए जा रहे हैं। हर तरफ मानवता, सेवा और संस्कार की सीख लेने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। कहीं रामकथा तो कहीं लीलाओं का मंचन हो रहा है। संगम तीरे से लेकर शिविरों तक सांस्कृतिक-आध्यात्मिक गरिमा की गूंज सुनाई दे रही है। आज महाकुंभ का 26वां दिन है और ये हैं आज कुंभ नगर में होने वाले विशेष आयोजन:- 1- भूतत्व एवं खनिकर्म,आबकारी तथा मद्यनिषेध मंत्री अर्चना पाण्डेय अरैल के गंगा शंकुल में आगमन 12 बजे। 2- केंद्रीय मंत्री मानव संसाधन विकास भारत सरकार प्रकाश जावेडकर आज कई कार्यक्रम में प्रतिभाग करेंगे। 3- गंगा मंच सेक्टर चार में नूरन सिस्टर्स नाइट मुंबई। 4- अक्षयवट मंच सेक्टर 4 धोबिया लोकनृत्य जीवन राम, भजन मिथिलेश,भोजपुरी गायन मंगला विश्वकर्मा, धु्रपद गायन मल्लिक ब्रदर्स की प्रस्तुति।  5- भारद्वाज मंच सेक्टर 6 भजन कमलाकांत, लोकगायन डा. प्रतिभा मिश्रा, बिहुलोक नृत्य उत्पल ज्योति बोरा की प्रस्तुति। 6- युमना मंच सेक्टर 17 गोटीपुआ दशभुजा गोटीपुआ नृत्य दल, भजन पं. रामदेव शर्मा, भरतनाट्टयम माधवी, भोजपुरी गायन विष्णु राजा की प्रस्तुति। 7- सरस्वती मंच सेक्टर 13 मीरा के नागर शामेंद्र सिंह,  कोमल  गांधार नाटक सुनील योगी की प्रस्तुति।
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9 महीने पहले
अघोरी शब्द मतलब होता है 'उजाले की ओर'। इस शब्द को पवित्रता और सभी बुराइयों से मुक्त भी समझा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं अघोरियों का रहन-सहन इसके बिलकुल विरुद्ध ही दिखते हैं। अघोरी श्मशान घाट की अधजली लाशों को निकालकर उनका मांस खाते हैं, वे शरीर के द्रव्य भी प्रयोग करते हैं। इसके पीछे उनका मानना है कि इससे उनकी तंत्र करने की शक्ति प्रबल होती है। आपको बता दें, शिव के पांच रूपों में से एक रूप 'अघोर' है। शिव की उपासना करने के लिए अघोरी शव पर बैठकर साधना करते हैं। अघोरी 3 तरह की साधनाएं करते हैं, शव साधना, जिसमें शव को मांस और मदिरा का भोग लगाया जाता है, शिव साधना, जिसमें शव पर एक पैर पर खड़े होकर शिव की साधना की जाती है और श्मशान साधना, जहां हवन किया जाता है। अघोरियों के पास हमेशा एक इंसानी खोपड़ी जरूर रहती है जिसे वे भोजन के पात्र के रूप में इस्तेमाल करते हैं, जिस कारण इन्हें 'कापालिक' कहा जाता है। किवदंतियों के अनुसार एक बार शिव ने ब्रह्मा का सिर काट दिया था और उनका सिर लेकर उन्होंने पूरे ब्रह्मांड के चक्कर लगाए थे। शिव के इसी रूप के अनुयायी होने के कारण अघोरी भी अपने साथ नरमुंड रखते हैं।दीक्षा के पहले अघोरी खुद का श्राद्ध और पिंडदान करते हैं। इस प्रक्रिया में साधक खुद को अपने परिवार और समाज के लिए मृत मानकर अपने हाथों से अपना श्राद्ध कर्म करता है। ऐसा माना जाता है कि अघोरी साधु शवों की साधना के साथ ही उनसे शारीरिक सम्बन्ध भी बनाते हैं, तो आपको बता दें ये बात बिलकुल सच है। अघोरी अन्य साधुओं की तरह ब्रह्मचर्य का पालन नहीं करते। बल्कि शव पर राख से लिपटे मंत्रों और ढोल नगाड़ों के बीच शारीरिक सम्बंध बनाते हैं। यह शारीरिक सम्बन्ध बनाने की क्रिया भी साधना का ही हिस्सा है खासकर उस वक्त जब महिला के मासिक चल रहे हों। कहा जाता है कि ऐसा करने से अघोरियों की शक्ति बढ़ती है।
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9 महीने पहले
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