கவிதை
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Mahendra Narayan
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कुण्डलिया - तितली जैसी कामना, करनी मक्खीचूस । यदि मिलता है फल नही, होते हैं मायूस ॥ होते हैं मायूस , वहीं जो भाग भरोसे । बना बनाया भोग, उसे बस मिले परोसे ॥ उधर फिसलता वक्त, रहे जैसे जल मछली । रहता खाली हाथ , बिना पकड़े ज्यों तितली ॥ #कविता #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍मेरे पसंदीदा लेखक #👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺 #📚कविता-कहानी संग्रह
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Mahendra Narayan
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नये -नये सम्बन्ध में , नये -नये से लोग । कोई करता दूरियाँ , , #कविता कोई करता योग ॥ #📚कविता-कहानी संग्रह #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺
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