sn vyas
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#जय मां दुर्गा
"आदिशक्ति का वह **विराट स्वरूप**, जहाँ कोटि-कोटि ब्रह्मांडों की ऊर्जा एक बिंदु में सिमटकर परम चेतना बन जाती है। उनके अनंत मुखों से फूटता दिव्य प्रकाश दसों दिशाओं को आलोकित करता है—जैसे एक साथ सहस्त्रों सूर्यों का उदय हुआ हो। वे केवल एक देवी नहीं, बल्कि **सृजन की पहली ध्वनि, स्थिति का आधार और रूपांतरण की अंतिम अग्नि** हैं। उनकी उपस्थिति मात्र से आकाशगंगाएँ स्पंदित होती हैं, जो हमें बोध कराती हैं कि जड़-चेतन, दृश्य-अदृश्य और सत्य का अंतिम गंतव्य केवल वही **शाश्वत जननी**
"अगणित रूपों का महासंगम, आदि-पराशक्ति का वह स्वरूप जो समय और शून्य से परे है। दिव्य आभा से मंडित उनके मुखमंडल में समस्त अस्तित्व का प्रतिबिंब झलकता है। वे ही **सृष्टि का बीज** हैं और वे ही **प्रलय का विश्राम**। उनकी करुणा की एक लहर अनंत लोकों में जीवन का संचार करती है। वे प्रमाण हैं कि इस चराचर जगत की हर शक्ति और हर सत्य का उद्गम उस **परम चैतन्य महामाया** की गोद से ही होता है।"
आदिशक्ति का एक ऐसा **तेजोमय विग्रह**, जहाँ अनंत रूप एक ही महाशक्ति में विलीन होकर एकाकार हो जाते हैं। कोटि-कोटि दिव्य मुखों और ब्रह्मांडीय ओज से घिरी हुई माँ, दिशाओं के बंधन से मुक्त—सृजन, पालन और संहार का जीवंत प्रतीक हैं। उनकी दिव्य कृपा का प्रवाह मात्र पृथ्वी तक सीमित नहीं, बल्कि **मंदाकिनियों और सूक्ष्म लोकों** के हृदय से होकर बहता है। वह हमें निरंतर स्मरण कराती हैं कि समस्त शक्ति का स्पंदन, जीवन की हर सांस और सत्य का अंतिम शिखर वही **अविनाशी माँ** हैं।"
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