best love story
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🌹 Best story 🌹 🌻बहुत सुन्दर पंक्तिया, जरूर पढे🌻 🌹एक दिन एक चिड़िया चिड़े से बोली - तुम मुझे छोड़ कर कभी उड़ तो नहीं जाओगे❣ 🌹चिड़े ने कहा - उड़ जाऊं तो तुम पकड़ लेना❣ 🌹चिड़िया - मैं तुम्हें पकड़ तो सकती हूँ, पर फिर पा तो नहीं सकती...❣ 🌹यह सुन चिड़े की आँखों में आंसू आ गए और उसने अपने पंख तोड़ दिए और बोला अब हम हमेशा साथ रहेंगे❣ 🌹लेकिन एक दिन जोर से तूफान आया, चिड़िया उड़ने लगी तभी चिड़ा बोला तुम उड़ जाओ मैं नहीं उड़ सकता..❣ 🌹चिड़िया- अच्छा अपना ख्याल रखना, कहकर उड़ गई !❣ 🌹जब तूफान थमा और चिड़िया वापस आई तो उसने देखा की चिड़ा मर चुका था❣ ❣और एक डाली पर लिखा था...❣ ✍काश तुम एक बार तो कहती कि मैं तुम्हें नहीं छोड़ सकती ,,,,,❣ 🌹तो शायद मैं तूफ़ान आने से पहले नहीं मरता❣ ⚀ ज़िन्दगी के पाँच सच ~ सच नं. 1 -:🌹 माँ के सिवा कोई वफादार नही हो सकता…!!!❣ ──────────────────────── सच नं. 2 -:🌹 गरीब का कोई दोस्त नही हो सकता…!!❣ ──────────────────────── सच नं. 3 -:🌹 आज भी लोग अच्छी सोच को नही, अच्छी सूरत को तरजीह देते हैं…!!!❣ ──────────────────────── सच नं. 4 -:🌹 इज्जत सिर्फ पैसे की है, इंसान की नही…!!!❣ ──────────────────────── सच न. 5 -:🌹 जिस शख्स को अपना खास समझो…. अधिकतर वही शख्स दुख दर्द दे h.... 💞 ​
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8 महीने पहले
प्रेम ❤️❤️❤️❤️कहानी एक अमीर लड़का था. उसे एक गरीब किसान की लड़की से प्यार हो गया. लड़की सुंदर होने के साथ-साथ काफी समझदार थी. एक दिन जब लड़के ने उस लड़की को बताया कि "वह उससे प्यार करता है, और उससे शादी करना चाहता है" तो लड़की ने कुछ सोचने के बाद उस लड़के को शादी करने से इनकार कर दिया. क्योंकि - वह गरीब परिवार से रिश्ता रखती थी. लेकिन कुछ समय बाद जब ये बात उस लड़के को पता चली, तो उस ने लड़की के माता-पिता से बात की और उस लड़की को समझाया. काफी समझाने के बाद वह लड़की मान गयी और दोनों की शादी हो गयी.शादी के बाद, लड़का उसे बहुत प्यार करता था. दोनों का दांपत्य जीवन काफी अच्छा चल रहा था. लेकिन कुछ महीनों बाद लड़की को चर्मरोग (skin diseases) हो गया. जिसके कारण उसकी खूबसूरती ढलने लगी. अब लड़की को यह डर भी सताने लगा, "कि उसकी खूबसूरती ढलने के कारण, कहीं उसका पति उसे छोड़ न दे." लड़की उस चर्म रोग को ठीक करने का हर संभव प्रयास कर रही थी. समय बीत रहा था और लड़की की खूबसूरती धीरे-धीरे ढल रही थी. एक दिन वह लड़का एक काम से दूसरे शहर गया. लड़का जब वहां से वापस आ रहा था. तो उसका रास्ते में एक कार के साथ एक्सीडेंट हो गया. उस दुर्घटना के दौरान लड़के की आंखें की रोशनी चली गई. इस दुर्घटना के कुछ समय के बाद उनका जीवन फिर से सामान्य और सुखी बीतने लगा. वह लड़की चर्मरोग की वजह से दिन प्रतिदिन कमजोर और बदसूरत होती गई. लेकिन पति अंधा होने के कारण उनका दांपत्य जीवन ठीक चलता रहा. और दिखाई न देने के कारण, वह लड़का उस से पहले की तरह प्यार करता रहा. कुछ सालो बाद बीमारी के कारण उस लड़की की मृत्यु हो गई. पत्नी की मृत्यु होने के बाद, वह लड़का अंदर से दुखी हो गया, और वह शहर छोड़कर जाने वाला था. तभी उसके पड़ोसी ने उसे सांत्वना देते हुए कहा-- "अब आप तो अपनी पत्नी के बिना अकेले पड़ जाएंगे. वह आपका काफी ख्याल रखती थी. अब आपका जीवन अंधकार में कैसे व्यतीत होगा." तब उस लड़के ने अपने पड़ोसी की ओर देखा और गहरी सांस लेते हुए कहा-- "मैं कभी अंधा था ही नहीं. लेकिन मैं यह सोचकर अंधे होने का नाटक करता रहा, कि कहीं मेरी पत्नी को उसकी बीमारी और बदसूरती के कारण यह ना लगे. कि मैं उससे प्यार नहीं करता. इसीलिए! मैं इतने सालों तक बिना कुछ कहे हुए अपनी पत्नी की खुशी के लिए अंधा बना रहा." यह बात सुनकर पड़ोसी की आंखों से आंसू छलक आए और वह लड़का वहां से उठकर चला गया....!कैसी लगी यह कहानी जरूर बताएँ..... Dosto Ager post acchi lge to comment or shear jarur krna
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8 महीने पहले
पति ने पत्नी को किसी बात पर तीन थप्पड़ जड़ दिए, पत्नी ने इसके जवाब में अपना सैंडिल पति की तरफ़ फेंका, सैंडिल का एक सिरा पति के सिर को छूता हुआ निकल गया। मामला रफा-दफा हो भी जाता, लेकिन पति ने इसे अपनी तौहिनी समझी, रिश्तेदारों ने मामला और पेचीदा बना दिया, न सिर्फ़ पेचीदा बल्कि संगीन, सब रिश्तेदारों ने इसे खानदान की नाक कटना कहा, यह भी कहा कि पति को सैडिल मारने वाली औरत न वफादार होती है न पतिव्रता। इसे घर में रखना, अपने शरीर में मियादी बुखार पालते रहने जैसा है। कुछ रिश्तेदारों ने यह भी पश्चाताप जाहिर किया कि ऐसी औरतों का भ्रूण ही समाप्त कर देना चाहिए। बुरी बातें चक्रवृत्ति ब्याज की तरह बढ़ती है, सो दोनों तरफ खूब आरोप उछाले गए। ऐसा लगता था जैसे दोनों पक्षों के लोग आरोपों का वॉलीबॉल खेल रहे हैं। लड़के ने लड़की के बारे में और लड़की ने लड़के के बारे में कई असुविधाजनक बातें कही। मुकदमा दर्ज कराया गया। पति ने पत्नी की चरित्रहीनता का तो पत्नी ने दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया। छह साल तक शादीशुदा जीवन बीताने और एक बच्ची के माता-पिता होने के बाद आज दोनों में तलाक हो गया। पति-पत्नी के हाथ में तलाक के काग़ज़ों की प्रति थी। दोनों चुप थे, दोनों शांत, दोनों निर्विकार। मुकदमा दो साल तक चला था। दो साल से पत्नी अलग रह रही थी और पति अलग, मुकदमे की सुनवाई पर दोनों को आना होता। दोनों एक दूसरे को देखते जैसे चकमक पत्थर आपस में रगड़ खा गए हों। दोनों गुस्से में होते। दोनों में बदले की भावना का आवेश होता। दोनों के साथ रिश्तेदार होते जिनकी हमदर्दियों में ज़रा-ज़रा विस्फोटक पदार्थ भी छुपा होता। लेकिन कुछ महीने पहले जब पति-पत्नी कोर्ट में दाखिल होते तो एक-दूसरे को देख कर मुँह फेर लेते। जैसे जानबूझ कर एक-दूसरे की उपेक्षा कर रहे हों, वकील औऱ रिश्तेदार दोनों के साथ होते। दोनों को अच्छा-खासा सबक सिखाया जाता कि उन्हें क्या कहना है। दोनों वही कहते। कई बार दोनों के वक्तव्य बदलने लगते। वो फिर सँभल जाते। अंत में वही हुआ जो सब चाहते थे यानी तलाक ................ पहले रिश्तेदारों की फौज साथ होती थी, आज थोड़े से रिश्तेदार साथ थे। दोनों तरफ के रिश्तेदार खुश थे, वकील खुश थे, माता-पिता भी खुश थे। तलाकशुदा पत्नी चुप थी और पति खामोश था। यह महज़ इत्तेफाक ही था कि दोनों पक्षों के रिश्तेदार एक ही टी-स्टॉल पर बैठे , कोल्ड ड्रिंक्स लिया। यह भी महज़ इत्तेफाक ही था कि तलाकशुदा पति-पत्नी एक ही मेज़ के आमने-सामने जा बैठे। लकड़ी की बेंच और वो दोनों ....... ''कांग्रेच्यूलेशन .... आप जो चाहते थे वही हुआ ....'' स्त्री ने कहा। ''तुम्हें भी बधाई ..... तुमने भी तो तलाक दे कर जीत हासिल की ....'' पुरुष बोला। ''तलाक क्या जीत का प्रतीक होता है????'' स्त्री ने पूछा। ''तुम बताओ?'' पुरुष के पूछने पर स्त्री ने जवाब नहीं दिया, वो चुपचाप बैठी रही, फिर बोली, ''तुमने मुझे चरित्रहीन कहा था.... अच्छा हुआ.... अब तुम्हारा चरित्रहीन स्त्री से पीछा छूटा।'' ''वो मेरी गलती थी, मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था'' पुरुष बोला। ''मैंने बहुत मानसिक तनाव झेली है'', स्त्री की आवाज़ सपाट थी न दुःख, न गुस्सा। ''जानता हूँ पुरुष इसी हथियार से स्त्री पर वार करता है, जो स्त्री के मन और आत्मा को लहू-लुहान कर देता है... तुम बहुत उज्ज्वल हो। मुझे तुम्हारे बारे में ऐसी गंदी बात नहीं करनी चाहिए थी। मुझे बेहद अफ़सोस है, '' पुरुष ने कहा। स्त्री चुप रही, उसने एक बार पुरुष को देखा। कुछ पल चुप रहने के बाद पुरुष ने गहरी साँस ली और कहा, ''तुमने भी तो मुझे दहेज का लोभी कहा था।'' ''गलत कहा था''.... पुरुष की ओऱ देखती हुई स्त्री बोली। कुछ देर चुप रही फिर बोली, ''मैं कोई और आरोप लगाती लेकिन मैं नहीं...'' प्लास्टिक के कप में चाय आ गई। स्त्री ने चाय उठाई, चाय ज़रा-सी छलकी। गर्म चाय स्त्री के हाथ पर गिरी। स्सी... की आवाज़ निकली। पुरुष के गले में उसी क्षण 'ओह' की आवाज़ निकली। स्त्री ने पुरुष को देखा। पुरुष स्त्री को देखे जा रहा था। ''तुम्हारा कमर दर्द कैसा है?'' ''ऐसा ही है कभी वोवरॉन तो कभी काम्बीफ्लेम,'' स्त्री ने बात खत्म करनी चाही। ''तुम एक्सरसाइज भी तो नहीं करती।'' पुरुष ने कहा तो स्त्री फीकी हँसी हँस दी। ''तुम्हारे अस्थमा की क्या कंडीशन है... फिर अटैक तो नहीं पड़े????'' स्त्री ने पूछा। ''अस्थमा।डॉक्टर सूरी ने स्ट्रेन... मेंटल स्ट्रेस कम करने को कहा है, '' पुरुष ने जानकारी दी। स्त्री ने पुरुष को देखा, देखती रही एकटक। जैसे पुरुष के चेहरे पर छपे तनाव को पढ़ रही हो। ''इनहेलर तो लेते रहते हो न?'' स्त्री ने पुरुष के चेहरे से नज़रें हटाईं और पूछा। ''हाँ, लेता रहता हूँ। आज लाना याद नहीं रहा, '' पुरुष ने कहा। ''तभी आज तुम्हारी साँस उखड़ी-उखड़ी-सी है, '' स्त्री ने हमदर्द लहजे में कहा। ''हाँ, कुछ इस वजह से और कुछ...'' पुरुष कहते-कहते रुक गया। ''कुछ... कुछ तनाव के कारण,'' स्त्री ने बात पूरी की। पुरुष कुछ सोचता रहा, फिर बोला, ''तुम्हें चार लाख रुपए देने हैं और छह हज़ार रुपए महीना भी।'' ''हाँ... फिर?'' स्त्री ने पूछा। ''वसुंधरा में फ्लैट है... तुम्हें तो पता है। मैं उसे तुम्हारे नाम कर देता हूँ। चार लाख रुपए फिलहाल मेरे पास नहीं है।'' पुरुष ने अपने मन की बात कही। ''वसुंधरा वाले फ्लैट की कीमत तो बीस लाख रुपए होगी??? मुझे सिर्फ चार लाख रुपए चाहिए....'' स्त्री ने स्पष्ट किया। ''बिटिया बड़ी होगी... सौ खर्च होते हैं....'' पुरुष ने कहा। ''वो तो तुम छह हज़ार रुपए महीना मुझे देते रहोगे,'' स्त्री बोली। ''हाँ, ज़रूर दूँगा।'' ''चार लाख अगर तुम्हारे पास नहीं है तो मुझे मत देना,'' स्त्री ने कहा। उसके स्वर में पुराने संबंधों की गर्द थी। पुरुष उसका चेहरा देखता रहा.... कितनी सह्रदय और कितनी सुंदर लग रही थी सामने बैठी स्त्री जो कभी उसकी पत्नी हुआ करती थी। स्त्री पुरुष को देख रही थी और सोच रही थी, ''कितना सरल स्वभाव का है यह पुरुष, जो कभी उसका पति हुआ करता था। कितना प्यार करता था उससे... एक बार हरिद्वार में जब वह गंगा में स्नान कर रही थी तो उसके हाथ से जंजीर छूट गई। फिर पागलों की तरह वह बचाने चला आया था उसे। खुद तैरना नहीं आता था लाट साहब को और मुझे बचाने की कोशिशें करता रहा था... कितना अच्छा है... मैं ही खोट निकालती रही...'' पुरुष एकटक स्त्री को देख रहा था और सोच रहा था, ''कितना ध्यान रखती थी, स्टीम के लिए पानी उबाल कर जग में डाल देती। उसके लिए हमेशा इनहेलर खरीद कर लाती, सेरेटाइड आक्यूहेलर बहुत महँगा था। हर महीने कंजूसी करती, पैसे बचाती, और आक्यूहेलर खरीद लाती। दूसरों की बीमारी की कौन परवाह करता है? ये करती थी परवाह! कभी जाहिर भी नहीं होने देती थी। कितनी संवेदना थी इसमें। मैं अपनी मर्दानगी के नशे में रहा। काश, जो मैं इसके जज़्बे को समझ पाता।'' दोनों चुप थे, बेहद चुप। दुनिया भर की आवाज़ों से मुक्त हो कर, खामोश। दोनों भीगी आँखों से एक दूसरे को देखते रहे.... ''मुझे एक बात कहनी है, '' उसकी आवाज़ में झिझक थी। ''कहो, '' स्त्री ने सजल आँखों से उसे देखा। ''डरता हूँ,'' पुरुष ने कहा। ''डरो मत। हो सकता है तुम्हारी बात मेरे मन की बात हो,'' स्त्री ने कहा। ''तुम बहुत याद आती रही,'' पुरुष बोला। ''तुम भी,'' स्त्री ने कहा। ''मैं तुम्हें अब भी प्रेम करता हूँ।'' ''मैं भी.'' स्त्री ने कहा। दोनों की आँखें कुछ ज़्यादा ही सजल हो गई थीं। दोनों की आवाज़ जज़्बाती और चेहरे मासूम। ''क्या हम दोनों जीवन को नया मोड़ नहीं दे सकते?'' पुरुष ने पूछा। ''कौन-सा मोड़?'' ''हम फिर से साथ-साथ रहने लगें... एक साथ... पति-पत्नी बन कर... बहुत अच्छे दोस्त बन कर।'' ''ये पेपर?'' स्त्री ने पूछा। ''फाड़ देते हैं।'' पुरुष ने कहा औऱ अपने हाथ से तलाक के काग़ज़ात फाड़ दिए। फिर स्त्री ने भी वही किया। दोनों उठ खड़े हुए। एक दूसरे के हाथ में हाथ डाल कर मुस्कराए। दोनों पक्षों के रिश्तेदार हैरान-परेशान थे। दोनों पति-पत्नी हाथ में हाथ डाले घर की तरफ चले गए। घर जो सिर्फ और सिर्फ पति-पत्नी का था ।। पति पत्नी में प्यार और तकरार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं जरा सी बात पर कोई ऐसा फैसला न लें कि आपको जिंदगी भर अफसोस हो ।। अगर कहानी अच्छी लगे तो पेज़ जरूर लाइक करें और बहुत सेयर करें👏👏
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11 महीने पहले
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