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#🎤मैं हूँ ShareChat रिपोर्टर #✍️ साहित्य एवं शायरी *अकबर इलाहाबादी जयंती-- जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो (शिब्ली रामपुरी) तोप के मुकाबले अखबार को अहमियत देने वाले मशहूर शायर अकबर इलाहाबादी का जन्म 1846 में 16 नवंबर को हुआ था. खींचो ना कमानो को न तलवार निकालो जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो. जैसे शेर लिखने वाले अकबर इलाहाबादी आरम्भ से ही विद्रोही स्वभाव के थे. अकबर इलाहाबादी का पूरा नाम सैयद हुसैन था. अकबर इलाहाबादी गांधी जी से काफी प्रभावित थे और उन्होंने गांधीजी के ऊपर कई कविताएं लिखी जिनको गांधीनामा नाम से प्रकाशित भी किया गया. अकबर इलाहाबादी ने हर तरह की शायरी की. उन्होंने हास्य-व्यंग्य के जरिए भी बुराइयों पर तंज कसा तो गजलों के माध्यम से भी इश्क को बयान किया. अकबर इलाहाबादी का एक शेर है कि. आई होगी किसी को हिज्र में मौत मुझको तो नींद भी नहीं आती| अकबर इलाहाबादी ने जिस तरह की शायरी की शायद ही जीवन का कोई पहलू हो जो उनकी शायरी से बचा रहा हो. राजनीति और नेता पर तंज अकबर के इस शेर से भी समझा जा सकता है. कोट और पतलून जब पहना तो मिस्टर बन गया जब कोई तकरीर की जलसे में लीडर बन गया. अकबर इलाहाबादी 75 साल की उम्र में इस दुनिया से रुखसत हुए. अकबर इलाहाबादी का निधन इलाहाबाद में साल 1921 में हुआ था. आज भी वह अपनी शायरी के माध्यम से याद किए जाते हैं.
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🎤मैं हूँ ShareChat रिपोर्टर - हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता अकबर इलाहाबादी ( 1846 - 1921 ) - ShareChat
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14 घंटे पहले
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29 दिन पहले
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