Tahir khan
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दिल्ली बनी दुल्हन दूल्हा बने महबूबे इलाही
27 सफर उल मुज़फ़्फ़र
यौम ए विलादत
सुल्तान उल मशाइख़ हज़रत ख़्वाजा सयैद निज़ामुद्दीन औलिया मेहबूब ए इलाही चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह
शमशो क़मर से रौशनी देल्ही में हो हुआ करे,
मुझको तो तुम पसन्द हो अपनी नज़र का क्या करूँ..
तेरी सूरत से किसी की नही मिलती सूरत,
हम जहाँ में तेरी तस्वीर लिए फिरते हैं.. #🤲इस्लाम की प्यारी बातें #हजरत निजामुद्दीन औलिया दरगाह #🕌दरगाह
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