मेष संक्रांति

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#🌾बैसाखी की शुभकामनाएं 🤗 हिंदू धर्म में संक्रांति का विशेष महत्व होता है. जब सूर्य एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उसे ‘संक्रांति’ कहा जाता है. साल 2026 में 14 अप्रैल को सूर्य देव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे मेष संक्रांति के नाम से जाना जाता है. पंचांग के अनुसार, मेष संक्रांति से ही सौर नववर्ष की शुरुआत होती है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और दान करने से जीवन की सभी परेशानियां दूर होती हैं. आइए जानते हैं मेष संक्रांति का महत्व और घर पर पूजा करने की आसान विधि। #मेष_संक्रांति_की_तिथि_और_शुभ_मुहूर्त: पंचांग के अनुसार मेष संक्रांति 2026 के प्रमुख समय इस प्रकार रहेंगे- #मेष_संक्रांति_2026_तिथि: 14 अप्रैल सूर्य का मेष राशि में प्रवेश: 14 अप्रैल को मेष संक्रांति का पुण्यकाल: सुबह 06:29 बजे से दोपहर 01:50 बजे तक मेष संक्रांति 2026 महा पुण्यकाल: सुबह 07:33 बजे से 11:45 बजे तक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुण्यकाल के दौरान स्नान, दान और पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। वहीं महा पुण्यकाल सबसे श्रेष्ठ समय माना जाता है। #मेष_संक्रांति_और_राजयोगों_का_महासंयोग: सूर्य जब मेष राशि में आते हैं, तो वे अपनी उच्च अवस्था में होते हैं। 14 अप्रैल को होने वाले इस गोचर के दौरान मेष राशि में पहले से ही बुध देव विराजमान होंगे. सूर्य और बुध की इस युति से बुधादित्य राजयोग का निर्माण होगा. इसके साथ ही, चंद्रमा और अन्य शुभ ग्रहों की स्थिति वेशि राजयोग को जन्म देगी.मेष संक्रांति पर इन दो दुर्लभ राजयोगों का एक साथ बनना प्रशासनिक लाभ, मान-सम्मान और धन वृद्धि का संकेत है। #मेष_संक्रांति_की_पूजा_विधि: पवित्र नदियों जैसे गंगा, यमुना या गोदावरी में स्नान करना इस दिन शुभ माना जाता है.यदि यह संभव नहीं है, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें. यह माना जाता है कि ऐसा करने से आत्मा शुद्ध होती है और पिछले पाप धुल जाते हैं.स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें. एक तांबे के लोटे में थोड़ा सा जल, लाल फूल, गुड़, रोली (कुमकुम) और अक्षत (चावल) डालें. सूर्य देव की ओर मुख करके इस जल को अर्पित करें. सूर्य देव के मंत्रों का जाप करें, जैसे “ओम सूर्याय नमः”. आप सूर्य चालीसा या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं. घर के पूजा स्थान को दीपक, धूप और फूलों से सजाएं सूर्य देव को मिठाई का भोग लगाएं और उसे सभी में वितरित करें। #मेष_संक्रांति_का_महत्व: मेष संक्रांति को भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों और रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है. उदाहरण के लिए, इसे तमिलनाडु में पुथांडु, केरल में विशु, पंजाब में बैसाखी और ओडिशा में पाना संक्रांति के रूप में मनाया जाता है.इन सभी त्योहारों में नए साल की शुरुआत और सूर्य के संक्रमण का उत्सव मनाया जाता है. इस दिन से सूर्य का उत्तरायण काल समाप्त होकर ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत मानी जाती है। यह दिन पुण्य काल और दान धर्म के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। #🪔मेष संक्रांति🙏 #🙏कृष्ण वामन द्वादशी📿 #❤️शुभकामना सन्देश #🌞 Good Morning🌞
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