🌸 शीतला माता की कथा
प्राचीन समय में एक नगर में एक गरीब ब्राह्मण और उसकी पत्नी रहते थे। वे बहुत गरीब थे लेकिन भगवान और देवी-देवताओं पर उनका अटूट विश्वास था।
एक दिन शीतला अष्टमी के दिन ब्राह्मण की पत्नी ने माता शीतला का व्रत रखा और ठंडे भोजन का भोग लगाकर माता की पूजा की। उसने पूरे मन से माता से प्रार्थना की कि उसके परिवार को रोग और दुख से बचाएं।
उसी नगर में एक अमीर स्त्री भी रहती थी, लेकिन उसे माता शीतला की पूजा में विश्वास नहीं था। उसने व्रत और पूजा का मज़ाक उड़ाया और उस दिन गरम भोजन बनाया।
कुछ समय बाद नगर में रोग फैल गया। अमीर स्त्री के घर में सब बीमार पड़ गए, जबकि ब्राह्मण के घर पर माता शीतला की कृपा बनी रही और उनका परिवार सुरक्षित रहा।
तब नगर के लोगों को समझ आया कि माता शीतला की पूजा और व्रत करने से रोग और संकट दूर होते हैं। इसके बाद सभी लोगों ने माता शीतला की श्रद्धा से पूजा करना शुरू कर दिया।
🙏 कथा का संदेश:
जो भक्त सच्चे मन से माता शीतला की पूजा करता है, उसके जीवन से रोग, दुख और संकट दूर हो जाते हैं।
🌺 जय माता शीतला 🌺
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