🚩जय श्रीराम🚩
*⚜⛳जय श्री बद्रीनाथ जी⛳⚜* *⚜⛳सनातन धर्म रक्षक समिति⛳⚜* *⚜⛳सनातन धर्म की जय हो⛳⚜* (951) 🔆 *श्रीरामचरितमानस* 🔆 *पंचम सोपान* *सुन्दर काण्ड* *दोहा सं० १८* *(शेष भाग)* *पुनि पठयउ तेहिं अच्छकुमारा ।* *चला संग लै सुभट अपारा ।।७।।* अर्थ ---- फिर रावण ने अक्षयकुमार को भेजा । वह असंख्य श्रेष्ठ योद्धाओं को साथ लेकर चला । 👉 *'अच्छ कुमारा'* --- यह रावण का लड़का है । *'कुमार'* से दर्शाया है कि छोटी अवस्था का है । लघुव्यस्क होने से उसे अपने बल-पराक्रम का बड़ा गर्व था । पराक्रम और उत्साह से इसका मन बढ़ा-चढ़ा था । युद्ध के लिये सदा उद्यत रहता था और उद्धत था । बाल्मीकि रामायण (५/४७/१) के अनुसार उसका पराक्रम और उत्साह कभी क्षीण नहीं होता था । *आवत देखि बिटप गहि तर्जा ।* *ताहि निपाति महाधुनि गर्जा ।।८।।* अर्थ ---- उसे आते देखकर हनुमान्‌जी ने एक वृक्ष (हाथ में) लेकर ललकारा और उसे मारकर महाध्वनि (बड़े जोर) से गर्जना की । 👉 अक्षय कुमार वीर है । वीर को देखकर गर्जना उत्साह सूचित करता है, अतः गरजे । पहले वीर को देख कर गरजे, फिर उसे मारकर भी गर्जना की । तात्पर्य यह है कि वह वीर था इसीलिये इसे मार डालने पर अधिक उत्साह हुआ ; अतएव अंत में पुनः जोर से गरजे । इससे विजय घोषणा दर्शायी और रावण को ललकार भी कि *और जो इस से भी अधिक बली हों उनको भेज !* ।। दोहा ।। *कछु मारेसि कछु मर्देसि, कछु मिलएसि धरि धूरि ।* *कछु पुनि जाइ पुकारे, प्रभु मर्कट बल भूरि ।।१८।।* अर्थ ---- उन्होंने सेना में से कुछ को मार डाला और कुछ को मसल डाला और कुछ को पकड़-पकड़कर धूल में मिला दिया । कुछ ने फिर जाकर पुकार की कि हे प्रभु ! बन्दर बहुत ही बलवान्‌ है । 👉 अक्षय कुमार अपार सेना लेकर आया था, उसको *'कुछ'* लिखने का भाव यह है कि हनुमानजी को सब राक्षस कुछ ही जान पड़ते हैं । सभी को इन्होंने जीत लिया । 👉 अब तक तीन बार युद्ध हुआ । प्रथम युद्ध में मर्दन करना कहा, यथा --- *'रक्षक मर्दि मर्दि महिं डारे ।*' दूसरे में संहार यथा --- *'सब रजनीचर कपि संहारे'* कहा और तीसरे में सेना अपार थी इसलिये उसमें कई क्रियायें की --- मारा, मर्दन किया, धूल में मिलाया । तीनों क्रियाओं के भाव --- जब राजकुमार मर गया तब सेना अनाथ हो गयी । जो उत्तम वीर थे वे सम्मुख आकर लड़े, अतएव उनको मारा । जो मध्यम श्रेणी के अर्थात सामान्य वीर थे उनको मर्दन कर डाला और जो निकृष्ट थे उन्हें मींज (मसल-मसल) कर धूल में मिला दिया । 👉 बचे हुए राक्षसों द्वारा रावण को *'प्रभु'* पद से सम्बोधित करने के निम्न भाव हैं --- (१) समर्थ आप भी रहे हैं पर उसके (कपि) बल बहुत है । (२) आप भी समर्थ हैं, उसकी जोड़ का बलवान भट भेज सकते हैं । हम लोग उसका मुकाबला नहीं कर सकते, व्यर्थ ही उसके हाथों सेना का नाश न कराइये । (३) व्यंग रूप में भाव यह है कि आपका प्रभुत्व तो अब समाप्त हो गया ; आपसे भी भूरि बल मर्कट अब *'प्रभु'* हो गया । 👉 इस अशोक वन के युद्ध में चार आवृत्तियाँ हैं --- (१) पहले वन रक्षकों को मारा (चौ० २), फिर उनमें से *'कछु जाइ पुकारे'* तो *'सुनि रावन पठए भट नाना'* उनको मारा (चौ० ५,६), फिर अक्षय कुमार सहित अपार सुभट भेजे, उन्हें मारा और अन्त में रावण ने मेघनाद को भेजा । (२) पहली लड़ाई में नहीं गर्जे, दूसरी में गर्जे, तीसरी में महा ध्वनि से गर्जे और चौथी में कट-कटाकर गर्जे । **************************************** 🙏🙏 *श्रीराम, जय राम, जय जय राम* 🙏🙏 **************************************** *जय श्री राम⛳⛳* *वन्दे मातरम⛳⛳* *भारत माता की जय⛳⛳* ⚜🕉⛳🕉⚜ #🚩जय श्रीराम🚩
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🚩जय श्रीराम🚩

🚩जय श्रीराम🚩 - बालकांड चौपाई - 02 , 04 बिनु सतसंग बिबेक न होई । राम कृपा बिनु सुलभ न सोई ॥ सतसंगत मुद मंगल मूला । सोई फल सिधि सब साधन फूला ! ! भावार्थ : - सत्संग के बिना विवेक नहीं होता और श्री रामजी की कृपा के बिना वह सत्संग सहज में मिलता नहीं । सत्संगति आनंद और कल्याण की जड़ है । सत्संग की सिद्वि ( प्राप्ति ) ही फल है और सब साधन तो फूल है । । @ tulsi _ ramayan - ShareChat
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9 दिन पहले
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