ग्लोबल वार्मिंग पृथ्वी के वायुमंडल और महासागरों के औसत तापमान में निरंतर वृद्धि की वह प्रक्रिया है जो मुख्यतः मानव-जनित गतिविधियों के कारण हो रही है।यह समस्या आज विश्व स्तर पर पर्यावरणीय संकट का सबसे बड़ा कारण बन चुकी है।औघोगिकीकरण,नगरीकरण और अत्यधिक ऊर्जा उपभोग ने हमारे पर्यावरण में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा में अभूतपूर्व वृद्धि की है,जिससे पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्लोबल वार्मिंग का प्रमुख कारण ग्रीनहाउस गैसों की वृद्धि,औघोगिकीकरण,वनों की कटाई,धान की खेती तथा पशुधन से मीथेन उत्सर्जन है।भारत जलवायु परिवर्तन से सर्वाधिक प्रभावित देशों में से एक है।यहां कृषि,जलस्रोत,स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। ग्लोबल वार्मिंग एक वास्तविक और गंभीर चुनौती है जो न केवल पर्यावरण बल्कि मानव सभ्यता के अस्तित्व को प्रभावित कर रही है।इस संकट से निपटने के लिए भारत सरकार और नागरिकों को मिलकर सामूहिक प्रयास करना होगा।पर्यावरण की रक्षा हम सभी की जीवनशैली का हिस्सा बनना चाहिए तभी हम हरित और स्थायी भविष्य की ओर बढ़ सकते हैं।भारत में वायु गुणवत्ता की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है,जहाँ दिल्ली जैसे कुछ शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 'खराब' या 'बहुत खराब' श्रेणी में है।परिचय येल विश्वविद्यालय द्वारा जारी पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक (ईपीआई) में भारत की नवीनतम रैंक 180 देशों में 176वीं है।😭दुखद😭
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