Krishna /Kaali
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#श्राद्ध पक्ष 🌹🙏🌷 #पितृ पक्ष - श्राद्ध #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #💓मेरी ज़िन्दगी @ princess shahiba *""m""* राधे राधे 🌹🙏🌹मेरे कृष्ण, जय श्री कृष्ण🌹🙏🌹
जो मैं करता था, वो इस तरह है ---
सुबह अपनी समय सुविधा के अनुसार नहाकर पितरों के स्वागत के लिए चौक बनाता था,चौक पर घर में पितरों के आते हुए दो पैर बनाता था।उनका आवाहन करता था और सुबह के लिए जो उनकी पसंद (जिन्हें हम तर्पण का पानी दे रहे हैं )का नाम लेकर और जो पूर्वज जिनका नाम नहीं पता तो मेरे सभी पितृ देवता कृपा कर पधारें,और अपनी पसंद का अन्न जल ग्रहण कर हमें अपना आशीर्वाद प्रदान करें।
फिर एक बड़ी थाली (कोपर या बड़ा टब भी ले सकते हैं )पानी भरकर जो एक जलाशय मान लिया गया उसमें थोड़ा पीला चंदन घोल दो तो और अच्छा,, उससे पितरों को पानी देना है, काली तिली जवा भी डालकर अपने हाँथ में कुशा लेकर रिंग फिंगर में एक पेंती जो कुशा से ही बनती है पहनना है नहीं होने पर दूब प्रयोग कर सकते हैं, दक्षिण मुँह कर अपनी अंजलि से पानी देना है।
पहले सूर्यदेव को,फिर इंद्रदेव को, धर्मराज को यमदेव को और फिर पितरों का नाम लेकर 5-5अंजली पानी देना है प्रणाम कर आशीर्वाद लें और (इसमें सुबह के लिए उनकी पसंद का मंजन / या अपमार्ग (अद्धाझारे की दातुन )रखें, सुबह का पसंदीदा नाश्ता, चाय और पसंद का ही खाना, पानी इत्यादि (लेकिन कढ़ाई के बिना बनाया हुआ, मतलब तली हुई समगी नहीं ) चौक पर रखें उन्हें भोजन करने कहें, फिर दोपहर को उस भोजन के तीन हिस्से कर एक कौआ को, दूसरा कुत्ते को और तीसरा गाय को खिला दें, शाम को उसी स्थान पर दीपक जलाता था।
यदि तिथि पता नहीं हो तो स्त्रीयों के लिए माता नवमी ही है जो ज्यादा श्रेष्ठ मानी जाती है, और यदि पुरुष वर्ग की तिथि नहीं पता तो अमावस्या के दिन।
तो तिथि के दिन बड़ा,सब्जी,तरोई की सब्जी भी पूर्वजों की पसंदीदा है ,पूरी, चावल, कढ़ी, पापड़, मीठा फल इत्यादि( जो कम ज्यादा हम उपलब्ध कर सकें )भोजन तैयार कर अपने कुल परिवार,3/5 ब्राह्मण और अपने विशेष पूज्य (मानदान )को भोजन करा कर उनका तिलक कर श्रद्धा अनुसार दक्षिणा दे दो,, और यदि सक्षम हो तो पूरे रिश्तेदारों को भी भोजन करा सकते हैं।महिलाओं को इस काल में सिर नहीं धोना है, बाकी पूरा श्रंगार करना है, शुद्धता से रहना है।
आखिरी दिन चौक में पितृ गण के पैर जाते हुए बनाना है।
नर्मदा जी जाकर उनका आशीर्वाद मांगकर विदाई तर्पण, पिंडदान करता था (पंडित जी के द्वारा)।
बस इतना ही करता था।
तुम अपनी श्रद्धा अनुसार घर, नदी कहीं भी करा सकती हो, पंडित जी को बुलाकर।
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