नोटबंदी के 2 साल
देश की सबसे बड़ी अाबादी वाले हिंदुअाें राम मंदिर का अाखिर कब हाेगा निर्माण, सुप्रीम काेर्ट के जनवरी में फैसले सुनाने काे लेकर देश के कराेड़ाें हिंदुअाें झटका लगा हैं। क्याेंकि सुप्रीम काेर्ट साफ कर दिया हैं कि राम मंदिर निर्माण काे लेकर सुनवाई अगले वर्ष जनवरी के महिने में तय हाेगी, क्याेंकि देश की सबसे बड़ी अदालत के कई माइने हैं। सुनवाई कब हाेगी ये ताे बाद में तय हाेगा लेकिन अभी यह तय हाे चुका हैं कि अदालत हिंदुअाें के राम मंदिर की तारीख जनवरी में ही तय करेगी। तब ये भी तय हाेगा की अाखिर काैनसी बेंच यह मामलाा सुनेगी अाैर उसी समय सुप्रीम काेर्ट यह भी तय करेगा कि सुनवाई नियमीत रुप से हाेगी, या सामान्य प्रक्रिया के तहद हाेगी। एेसे में आज देश जनता के मन कई सवाल खड़े हुए हैं उनका कहना हैं कि आखिर अयाेध्या में राम मंदिर विधी क्या हैं, क्या इसी तरह सरकार सुप्रीम काेर्ट के फैसले का इंतजार करती रहेगी या फिर पूरी जिंदगी हिंदुअाें काे राम मंदिर निर्माण काे अास में बितानी हाेगी याफिर राम मंदिर निर्माण से पहले इस दुनिया काे अलविदा कह देना हाेगा। Image source pixabay याफिर सरकार इसके लिए अध्यादेश लेकर अाएगी, या हिंदु अाैर मुस्लिम समुदाय अदालत से बाहर की समझाैता करना हाेगा। इस फैसले अाखिर में एेसा क्या हुअा था जिसके चलते सुप्रीम काेर्ट अपना फैसले की तारीख ही बदलनी पड़ी, दरअसल उत्तर प्रदेश सरकार की अाेर से साॅलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए थे। Image source pixabay अाैर अनुराेध किया की दीवाली की छुट्टियाें के तुरंत बाद राम मंदिर मुद्दे पर सुनवाई की जाएं। रामलला विजराम की अाेर से पेश वकील (सीएस वैद्यनाथन) ने में भी नवंबर में सुनवाई की मांग की थी, दाेनाें वकीलाें की जल्द से जल्द सुनवाई मांग पर चीफ जस्टीस अाॅफ इंडिया रंजन गाेगोई ने कहा हैं कि जनवरी के पहले हफ्ते में केस सुनवाई की तारीख तय करेंगे अाैर तभी ये तय हाेगा कि सुनवाई काैन सी पीठ करेगी। Image source pixabay इसी बीच अदालत में माैजूद एक वकील ने पूछा की अदालत कम-कम तारीख तय ताे कर ही सकती हैं, इसके जवाब में चीफ जस्टिस गाेगोई ने कहा कि तारीख जनवरी, फरवरी, मार्च, अप्रैल कुछ भी हाे सकती हैं। यानी मतबल साफ हैं सुप्रीम काेर्ट के लिए राम मंदिर मुद्दा बहुत नीचले स्तर पर हैं, 100 कराेड़ हिंदुअाें की अास्था से जुड़ा मुद्दा सुप्रीम काेर्ट के कुछ भी नहीं हैें। अाखिर क्याें वहीं सरकार अाैर अदालत की प्रथामिकताएं अलग-अलग हाेती हैं, क्याेंकि सरकार के लिए राम मंदिर निर्माण सबसे बड़ा मुद्दा हैं ताे देश की सबसे बड़ी अदालत के लिए यह इसके लिए काेई समय सीमा नहीं हैं। Image source facebook/narendramodi सरकार पता हैं कि अगर राम मंदिर निर्माण के लिए एक इट भी रख दी जाए ताे कराेड़ाे वाेट अगले चुनाव में चले अाएंगे, मोदी सरकार की काेशिश हैं कि अगर राम मंदिर ना भी बने ताे कम से कम राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हाे लेकिन वक्त बहुत ही कम हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2019 में तय हाेगी जबकि अप्रैल अाैर मई के महीने में लाेकसभा चुनाव हाेंगे, यानी अब सिर्फ चार से पांच महीने बचे हुए हैं। Image source pixabay राम मंदिर निर्माण के लिए विशेष प्रयासाें की जरूरत हैं, वैसे सुप्रीम काेर्ट के फैसले के बाद फस्ट टाइम अाॅडिनेंस फाेर राम मंदिर साेशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा हैं अाेर लाेग अध्यादेश लाने की मांग कर रहे हैं। इसी बीच नई रननीति बनाने के लिए संताे अाैर वीएचपी बैठक हुई विश्व हिंदू परिषद कहाना हैं कि मंदिर के लिए अब इंतजार नहीं किया जा सकता, राम मंदिर निर्माण काे लेकर बैठक हुई जहां संताें ने कहा कि राम मंदिर निर्माण जल्द से जल्द नहीं हुअा ताे अाने वाले चुनाव में भगवान श्रीराम इसकी सजा देंगे। Image source pixabay दूसरी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का कहना हैं की राम मंदिर निर्माण उसके लिए चुनावी मुद्दा नहीं हैं, लेकिन बीजेपी एक सांसद हरिओम पांडे ने संसद के शितकालीन सत्र में राम मंदिर निर्माण के लिए एर प्राइवेट नंबर बिल लाने का एेलान कर दिया हैं। यानी इस मुद्दे काे लेकर राजनीति बहुत ही गर्म हैं, देश की सबसे बड़ी अदालत के बाद साधु-संताें के जाे बयान अाए हैं उससे ये लगता हैं कि अब उनका धेर्य जवाब देने लगा हैं। अाखिर हिंदुअाें के धेर्य की परिक्षा कब तक क्याे देश की सबसे अदालत के पास 107 कराेड़ हिंदुअाें के लिए समय नहीं हैं। देश में सबसे अधिक अाबादी वाले हिंदुअाें के साथ ही षड़यंत्र क्याें ताे क्या किसी देश में उसी देश की अान बान शान कहे जाने वाले हिंदुस्तान में यानी बहुसंख्यकाें के लिए काेई जगह नहीं हैं, फिलहाल भारत की कुल जनसंख्या करीब 135 कराेड़ हैं। जिनमें सबसे अधिक यानी सबसे जादा हिंदू हैं जिनके धेर्य की परीक्षा ली जा रही हैं। Image source facebook/narendramodi वही हिंदुअाे के हिंदूस्तान में मुसलमानाें की संख्या करीब 14.3 प्रतिशत हैं, यानी करीब 20 कराेड़ हिंदूस्तान में मुसलमान हैं। वहीं सिख 1 कराेड़ 72 लाख, ईसाई 2 कराेड़ 30 लाख अाैर अन्य धर्म करीब दाे कराेड़ हैं। जबकी इस देश में घुसपैठियाें की काेई कमी नहीं हैं, जाे इन अाकंडाें में शामिल नहीं हैं करीब 40 लाख बांगालादेशी मुसलमान अाज भी हिंदूस्तान में माैजूद हैं। जाे घुसपैठ कर हिंदूस्तान बस चुके हैं हालांकि इससे पहले वे शरणार्थियाें के नाम पर हिंदूस्तान में बसे थे लेकिन अब हिंदुअाें के हिंदुस्तान में अपनी जड़ मजबूत कर चुके हैं, यही नहीं वह इसी हिंदुस्तान में अाकर हिंदूअाें हत्या करने से तक नहीं कतराते। लेकिन राहुल की कांग्रेस अपनी वाेट बैक के लिए उनकी वापसी के लिए हिंदुअाें का हक छीनने के लिए तयार हैं। Image source pixabay वही इस देश राेहिंग्या मुसलमानाें काे काेई कमी नहीं हिंदुस्तान की रहमदिली का फायदा उठाते हुए राेहिंग्या भी अब इसे देश में हजाराें एकड़ जमीन पर कब्जा जमा चुके हैं, अब वे इस देश वे वापस लाैटने के लिए तैयार नहीं हैं। वे इसी देश में मरने के लिए तैयार हैं लेकिन हजाराें साल रह रहे म्यांमार में जाने के लिए तैयार नहीं हैं। यानी अब हिंदुअाें की आबादी खतरे में, फिलहाल 107 कराेड़ हिंदुअाें के लिए यहां काेई समय नहीं है लेकिन जब इस हिंदूअाें के संख्या काे चुनाैती दे कर जब यह अांकड़ा अासमान छू लेगा तब क्या हाेगा। Image source pixabay 107 कराेड़ हिंदूअाें के भावनाअाें की हिंदुस्तान में अनदेखी क्याें, इस देश में जिनकी 80 प्रतिशत जनसंख्या हैं उसकी ही भावनाअाें की अनदेखी क्याें एेसे में किसी बुध्दीजिवी से पूछा जाएं ताे वह बार यही कहेगा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं जहां किसी का काेई धर्म नहीं देखा जाता। लेकिन धर्मनिरपेक्षता अाैर सेक्यूलेरिजम के एेसे जवाब तभी मिलते हैं जब हिंदू अपने अास्था से जुड़े सवाल उठाने लगता हैं, ताे क्या 107 कराेड़ हिंदुअाें काे नजर अंदाज कर सेक्यूलेजरल में रक्ष की जा सकती हैं। क्या यही धर्म हाेता हैं क्या अल्पसंख्यकाे के लिए बहुसंख्यककाें काे नाराज कर देना ये हमारे देश हिंदुस्तान में ही हाे सकता हैं। एेसे में साेच लिजीए की अगर किसी मुस्लिम देश में मंदिर अाैर मस्जिद लढ़ाई चल रही हाे ताे उस देश में क्या हाेता हैं, क्या उस मुस्लिम देश की सरकार अाैर अदालते मस्जिद निर्माण के इतने वर्षाे तक इंतजार करेगी। लेकिन अाज देश के 107 कराेड़ हिंदुअाें काे सुप्रीम काेर्ट कह दिया कि अगले साल अाना ये वही सुप्रीम काेर्ट हैं जाे हिंदुअाें की अास्थान के खेल खेल रहा हैं अाखिर हिंदुअाें के धेर्य की परीक्षा कब तक ली जाएगी, कब तक हिंदू इसी तरह चुप रहेगा। Image source pixabay वहीं एक अातंकवादी की फांसी रुकवाने के लिए देश की सबसे बड़ी अदालत काे अाधी रात काे खुलवा लिया जाता हैं, तब कहा जाता हैं कि भारत की न्यायव्यवस्था की यह खूबी हैं वे सभी काे सुनवाई का पूरा अधिकार देती हैं। ठीक इसी तरह जब अर्बन नक्सल की गिरफ्तारी हुई थी तब भी बुध्दीजीवी सुप्रीम काेर्ट पहुंच गए थे, जिसके बाद कुछ ही घंटाें में सुप्रीम काेर्ट इसकी सुनवाई की थी। हाल ही में इसी हप्ते सीबीआई विवाद पर सुप्रीम काेर्ट में प्राथमीकता मिली थी। Image source pixabay लेकन कई सालाें से राम मंदिर निर्माण का मामला अपनी जगह पर ही हैं, राम मंदिर का मामला सामने अाते ही कह दिया जाता हैं कि अगले साल अाना अभी वक्त नहीं हैें। क्या अब देश की न्यायव्यवस्ता पर सवाल नहीं उठेंगे, ये कैसी न्याय व्यवस्था जाे अपने ही देश बहुसंख्यकाें अाजादी कई वर्षाे बाद भी न्याय नहीं दिला पा रही हैं। क्या सरकार के लिए अध्यादेश लाना अासान हाेगा जनवरी 2019 में सुप्रीम काेर्ट अयाेध्या विवाद की टाइटल सूट की सुनवाई की तारीख तय करेगा, जिसके बाद यह तय हाेगा की अयाेध्या में विवादीत जमीन पर मालिकान हक अाखिर किसका हैं। वहा हिंदूअाें का हक हैं या फिर मुस्लिमाें का ये तय हाे जाने पर विवाद का हल निकालना बड़ा ही अासान हाे जाएगा, लेकिन इसमे अभी समय लगेगा ताे क्या अदालत 2019 के लाेकसभा चुनाव से पहले ही इसपर फैसला सुना पाएगी। क्याेंकि मई 2019 में नई सरकार का शपथ ग्रहण तय हैं, वही इससे पहले अप्रैल अाैर मई 2019 में लाेकसभा चुनाव हाेंगे एेसे में यह बहुत मुश्किल लगता हैं कि अदालत इस मामले पर फैसला सुना पाएगी या नहीं। Image source pixabay दूसरी अाेर अयाेध्या मामले में करीब 9 हजार से अधिक पन्नाें से अधिक सबूत हैं, जो रामायण, रामचरितमानस, महाभारत, कुरान अाैर मध्यकालीन इतिहास से लिए गए हैं। यही नहीं इस मामले के गवाहाें के बयान 90 हजार से ज्या पन्नाें में दर्ज हैं, ये सभी दस्तावेज संस्कृत, अवधी, पारसी, अरबी, अाै पाली भाषा में हैं। वहीं अयाेध्या विवाद में अदालत में तीन पक्ष हैं, जिनमें से पहला है निर्मोही अखाड़ा, दूसरा हैं रामलला विराजमान, अाैर तीसरा पक्ष सुन्नी वक्फ बाेर्ड हैं। हालाकि इससे पहले इसे मामले पर 30 सितंबर 2010 काे इलाहाबाद हाईकाेर्ट ने फैसला सुनाया था, इलाहाबाद हाईकाेर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि 2.77 एकड़ की विवादित जमीन काे 3 बराबर हिस्साें में बांटा था। जिसके मुताबिक जिस जगह पर रामलला कि मुर्ती उस जगह काे रामलला विराजमान काे दे दी जाए, राम चबुतरा अाैर सिता रसाेई वाली जगह निर्मोही अखाड़े काे दे दी जाए, इसके साथ ही बचा हुअा एक तिहाई हिस्सा सुन्नी वक्फ बाेर्ड काे देने का फैसला दिया था। यानी इन तीनाें काे बराबर का हिस्सा दे दिया जाए अाैर इलाहाबाद हाईकाेर्ट ने खुश कर दिया था। Image source pixabay जिसके बाद इलाहाबाद हाईकाेर्ट के फैसले बाद भी यानी पूरे अाठ वर्षाे बाद भी सुप्रीम काेर्ट इस मामले पर फैसला नहीं कर पाया हैं, यानी इस मामले काे सुप्रीम काेर्ट में आए पूरे अाठ साल हाे चुके हैं लेकिन अब तक सुप्रीम काेर्ट यह तय कर नहीं पाया कि मामले की सुनवाई कबसे शुरु जबकि इससे पहले ये पूरा मामले 1995 में इलाहाबाद काेर्ट में दाखिल हुआ था, अाैर हाईकाेर्ट का फैसला अाते-आते पूरे पंधरा साल बीत गए सावल ये हैं कि पिछले अाठ वर्षाे में सुप्रीम काेर्ट में सुनवाई शुरु भी नहीं हाे पाई ताे 2019 चुनाव से पहले फैसला अाने की उम्मीद कैसे की जाए। एेसे में यह असंभव सी बात लगती हैं पहला तरीका ताे यह हैं कि इस पूरे विवाद का फैसला सुप्रीम काेर्ट करेगा लेकिन उसमें अभी बहुत ही समय लगेगा ताे क्या हिंदूस्तान के लाेगाें में अाेर इंतजार करने की शक्ती हैं? क्याें हिंदू अब इंतजार के स्थिती में नहीं हैं। वही सरकार के पास राम मंदिर निर्माण के लिए दूसरा तरीका अध्यादेश हैं, लेकिन इस विधी काे समझने से पहले ये समझना जरूरी हैं कि अाखिर अध्यादेश हाेता क्या हैं। दरअसल अध्यादेश केंद्र सरकार का एक विशेष अधिकार हाेता हैं, संविधान के अनुच्छेद-123 के तहद सरकार किसी भी मामले में अध्यादेश ला सकती हैं। इसकी जरूरत तब पड़ती हैं जब सरकार कानून बनाने के लिए बिल लाना चाहे, लेकिन संसद न चल रहा हो या फिर सरकार काेई बिल राज्यसभा में कम संख्याबल की वजह से अटका हुअा हो। राज्यसभा में कम संख्याबल की वजह से अटका हाे एेसी स्थितियाें में सरकार अध्यादेश ला सकती हैं, अगर सुप्रीम काेर्ट से राम मंदिर निर्माण फैसले में देरी हाेती हैं ताे सकार अध्यादेश ला सकती हैं। ये संभव है लेकिन अध्यादेश लाने के लिए कई फायदे भी हैं लेकिन इसके नुकसान भी हैं, इससे फायदा यह हैं कि राम मंदिर अांदाेलन के जाे समर्थक हैं वाे खुश हाे जाएंगे। अाैर इससे बीजेपी काे हिंदू वाेट मिल सकते हैं, लेकिन इसी बीच सरकार के सामने मुस्लिम वाेट का खाे देने का खतरा भी हैं। क्याेंकि 2014 के चुनावाें में बीजेपी काे करीब 8 प्रतिशत अल्पसंख्यक वाेट मिले थे। अब 2019 में करीब 12 कराेड़ अल्पसंख्य वाेट हाेंगे। वही ट्रीपल तलाक के बाद बीजेपी के अल्पसंख्यक वाेटाें में थाेड़ा इजाफा हाेने अाशंका जताई जा रहा हैं लेकिन जानकाराें का कहना हैं बीजेपी काे बहुत कम मुस्लिम वाेट मिलते हैं, एेसे में बीजीपी थाेड़े वाेटाें के लिए अपने हिंदूअाें के 108 कराेड़ वाेटाें का नुकसान नहीं करना चाहती। वाे हिंदूअाें काे कतई निराश नहीं करना चाहती, एेसे अध्यादेश के बाद देश में कानून व्यवस्या बिगड़ भी सकती हैं अाैर देश में समाज में एक तनाव कि स्थिती निर्माण हाे सकती हैं। एक तरह का टकराव निर्माण हाे सकता हैं। एेसा भी हाे सकता हैं कि लाेग इस अध्यादेश काे चुनाैती दे सकते हैं, एेसे में यह मामला नए रूप से बदल सकता हैं अाैर कानूनी रूप से अधिक पेचिदा हाे सकता हैं। क्याेंकि अध्यादेश एक अस्थाई कानून हाेता हैं अाैर संसद सत्र शुरु हाेने के 6 महीने के अंदर पास करवाना जरूरी हाेता हैं, एेसा नहीं हुअा ताे यह अध्यादेश मान्य नहीं हाेगा। एेसे में सरकार दाेबारा अध्यादेश ला सकती हैं लेकिन इसे सरकार चलाने का सही तरीका नहीं माना जाता, लेकिन इससे एक फायदा ये हाे सकता हैं कि बीजेपी अपने हिंदू वाेटराें काे बताने में सफल रहेगी।
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