मेरा राजस्थान
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मेरा राजस्थान

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2 महीने पहले
#कलशाचल पर्वत जालौर जहाँ स्थित है #सिरेमन्दिर_धाम #जालौर नगर से पश्चिमी दिशा में सटा हुआ पर्वतीय भाग राजस्थान के मान चित्र में ह्रदय रेखा सी खिची अरावली पर्वत माला का ही प्रसरित अंश है, यह #दोवडा डबल भाकर है, #कलशाचल और #स्वर्णगीरी यहाँ पर महासिध्द योगी निश्चल मुद्रा में निवास करते है, तथा यूगों से प्राचीनतम देरीप्यमान है । #सर्वप्रथम मरूदेश के अंतर्गत जालंधर नामक स्थान का वर्णन करता हूँ वहाँ पर कलशाचल नामक एक विशाल पर्वत विध्धयमान है, और वहाँ पर श्री जालंधरनाथजी महाराज साक्षात रूप में विराजमान है, और वही पर स्थित है रत्नेश्वर महादेव धाम, जहाँ पर गंगा माता प्रगट हुई थी । #तथा वही पर श्री गुरूकुल पीठ भी अत्यन्त सम्मान के साथ अधिष्ठित है, तथा वही पर अद्-भुत कपाली तीर्थ है, वही पर चन्द्रकूप नामक सम- जलस्तर वाला तीर्थ भी है, जो साक्षात मोक्ष प्रदान करने वाला है, वही पर सूर्यकुण्ड महातिर्थ भी है, इन तीर्थो से युक्त वह पर्वत वहाँ आश्रय लेने वालें सभी लोगों को आन्नद देने वाला है । #कलशाचल पर्वत के शिखर पर चढ कर मनुष्य जीवन मुक्त हो जाता है, कलशाचल पर्वत पर महासिध्द कनीपाव और कणेरीपाव तथा हरितालीपाव, हालीपाव व अन्य योगी भी इस तीर्थश्रेष्ठ पर्वत पर निरन्तर रहते है, कलशाचल पर्वत श्रेष्ठ एवं पवित्र पाव पंथियों का उद्-गम स्थल है, पुण्य पर्वत गिरनार सें मेलनाथ भी जो सिध्दयोगी थे वर प्राप्त करके कलशाचल पर्वत पर आकर श्री जालंधरनाथजी के चरण- कमलों की सेवा करते हुए सूखपुर्वक रहे थे, गगन से स्पध्द्रा करने वाले शिखर युक्त इस कलशाचल के निकट मेलनाथ से प्रारम्भ होने वाला गुरू - कुल परम्परा का भी विस्तार हुआ । #कलशाचल के ही पास में कनकाचल #स्वर्णगीरी पर्वत है सुमेरूपर्वत के समान अत्यधिक ऊँचा यह कनकाचल अत्यन्त शोभायमान हो रहा है, कनकाचल की तलहटी में जालप #जालौर नाम की विस्त्रत नगरी है, उस नगरी के ऊपर कनकाचल पर बडा कोट ( दुर्ग ) बना हुआ है, प्राचिन समय में महाराजा मानसिंहजी ने यही पर श्री जालंधर नाथजी की दीर्घ तपस्या की थी, एवं श्री नाथ - चरणों की कृपा से अपने मनोवांछित वर प्राप्त किया था, उसी तप के कारण जोधाणै का राज श्री जालंधर नाथजी के आर्शिवाद से मिला था । #चौहान वंश की सोनगरा शाखा में महाबलिष्ठ कान्हडदेव तथा उनके पुत्र विरमदेव हुए, इन दोनों ने भी श्रीनाथजी के चरणों की भक्ति पूर्वक सेवा करते हुए तीनों लोको में दुर्लभ एवं उत्कृष्ठ वर को प्राप्त किया था, इसी प्रकार राठौड वंश के महान तपस्वी मालदेव और महान तेजस्वी राव रत्नसिह इन दोनों ने भी श्रीनाथजी की भक्ति कर वर प्राप्त किया था । #ऐसे तीर्थराज की महीमा का वर्णन कौन कर सकता है, तीर्थों में मुख्य इस तिर्थ को मैं पुन: पुन: प्रणाम करता हूँ । #कनकाचल से पश्चिम की और सौगन्धिक नाम का पर्वत है, जिनकी अधिलका में श्री नाथजी के चरण - कमल शोभायमान है, इस पर्वत पर घोर पापों का विनाशक पवित्र जल से युक्त कुण्ड है, वही पर योगी - श्रेष्ठों का परम पवित्र धाम भी है, सौगन्धिक पर्वत अनेक झरणों के कारण हिमालय की भांती शोभीत हो रहा है, वही पर सुरम्य मन्दिर में परमेश्वरी विराज मान है, इस पर्वत पर फाल्गुन माह में वार्षिक मेला लगता है, इस महोत्सव के कारण धर्म - परायण लोग एकत्र होते है, इस तिर्थ पर जाकर और दर्शन करके लोक पापों से मुक्त हो जाते है, वही पर पीरजी श्री शान्तिनाथजी महाराज की समाधी है, और वही पर इस वर्ष श्री गंगा नाथजी महाराज का चातुर्मास भी है, ऐसे तिर्थ को बारम्बार नमस्कार है । #संग्रहकर्ता :- #श्री_शान्तिनाथजी_टाईगर_फोर्स_संगठन_भारत सभी भक्त शेयर करें #मेरा राजस्थान #🔱हर हर महादेव #🙏 भगवान विष्णु #📰 3 अगस्त की न्यूज़
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मेरा राजस्थान - जिरैमन्दिर धाम जौर । । । । । - ShareChat
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3 महीने पहले
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