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सुप्रभातम्
चिन्ता कापि न कार्या निवेदितात्मभि: कदापीति।
भगवानपि पुष्टिस्थो न करिष्यति लौकिकीं गतिम्।।
(वल्लभाचार्य)
अर्थात् 👉 जिसने प्रभु को आत्म-निवेदन कर दिया है, उन्हें कभी किसी प्रकार की चिन्ता नहीं करनी चाहिए। पुष्टि (कृपा) करनेवाले प्रभु अंगीकृत जीव की लौकिक (सामान्य मनुष्य के समान) गति नहीं करते।
जय श्री कृष्ण
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#🌷'श्रीनाथजी' महाप्रभु🌹🙏 #श्रीनाथजी नाथद्वारा