मतदाता जागरूकता
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मतदाता जागरूकता

जो लोग अयोध्या चलने को कह रहे है और राम मंदिर के लिए कुर्बानी की बात कर रहे हैं उनसे ये पूछे कि... 1)अमित शाह का बेटा राम मंदिर के लिए कुर्बानी देने के लिए तैयार है। 2)उद्धव ठाकरे का बेटा कुर्बानी देने के लिए तैयार है। 3) राजनाथ सिंह का बेटा कुर्बानी देने के लिए तैयार है। 4)नितिन गडकरी का बेटा कुर्बानी देने के लिए तैयार है। 5)गिरिराज सिंह का बेटा कुर्बानी देने के लिए तैयार है। 6)अश्विनी चौबे का बेटा कुर्बानी देने के लिए तैयार है। 7)सुशील मोदी का बेटा कुर्बानी देने के लिए तैयार है। 8)कैलाश विजयवर्गीय का बेटा कुर्बानी देने के लिए तैयार है। 9)विनय कटियार का बेटा कुर्बानी देने के लिए तैयार है। 10)संबित पात्रा कुर्बानी देने के लिए तैयार है। 11)उमा भारती कुर्बानी देने के लिए तैयार है। 12)गिरिराज सिंह खुद कुर्बानी देने के लिए तैयार है। 13)साक्षी महाराज कुर्बानी देने के लिए तैयार है। 14)नंदकिशोर यादव का बेटा और खुद वो कुर्बानी देने के लिए तैयार है । 15)मुरली मनोहर जोशी कुर्बानी देने के लिए तैयार है । 16)रविशंकर प्रसाद का बेटा और खुद कुर्बानी देने के लिए तैयार है। 17)शिवराज सिंह चौहान का बेटा कुर्बानी देने के लिए तैयार है। 18)रमन सिंह का बेटा कुर्बानी देने के लिए तैयार है। 19)योगी आदित्यनाथ कुर्बानी देने के लिए तैयार है। 20)मोहन भागवत कुर्बानी देने के लिए तैयार है। हमारे देश के युवा ये देख ले कि ये लोग राम मंदिर के लिए कुर्बान होने को तैयार है तभी जाए नही तो आप 1992 का इतिहाश आपके सामने है कि न ही लालकृष्ण आडवाणी ,उमा भारती,प्रवीण तोगड़िया, अशोक सिंघल, नरेंद्र मोदी,मुरली मनोहर जोशी जैसे लोगो को कुछ नही हुआ हाँ केवल कोर्ट-कचहरी हुआ और वो अपने परिवार के साथ आराम से रह रहे हैं और देश के हजारों कारसेवक बे मौत मारे गए और इनके परिवार की कोई सुध भी लेने नहीं जाता की इनके बच्चे बीबी माता पिता कैसे हैं। इन सभी नेताओ के बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ने व विदेश में डिग्रीधारी बनने जाते हैं। और देश की आम जनता के बच्चे मंदिर मस्जिद बनाने को जाते हैं और मार दिए जाते हैं। देश का प्रत्येक व्यक्ति चाहता है दो वक़त की सुकून की रोटी और कुछ भी नहीं। 1 किसान चाहता है फसल की पूरी किमत । 2 पढे लिखे युवक नौकरी चाहता है । 3 बिज़नेस मैन ग्रहक चाहता है । 4 सेना के जवान आटोमेटिक हथियार चाहता है । पर यह समझ नहीं आ रहा है हम किस ओर जा रहे हैं या हमें घुमा दिया जा रहा है
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11 महीने पहले
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मतदाता जागरूकता

👆 *एकविचार* 👆 😦बैतूल मे विकास कैसे रुका ? ☹ प्रियजनों, प्यारे साथियों , आप सभी अच्छी तरह जानते है और विरोधी भी स्वीकार करते है कि जब 1998 से 2003 तक बैतूल मे *विकास†* का *पहिया* अपनी पूरी *रफ्तार* से *घूम* रहा था जब क्षेत्र की बागडोर *श्री* *विनोद* *डागा* संभाले हुए थे । किन्तु 2003 और फिर 2008 मे *सत्ता* परिवर्तन के साथ ही प्रतिनिधि. भी बदलें । जहां विकास की *रफ्तार* कम.हो गयी । पुनः 2013 मे *प्रतिनिधि* बदले तो ऐसा लगा कि *विकास* अब गुमशुदा सा हो गया.जो चलने - फिरने या दिखने की स्थिति मे नहीं है क्योंकि इस समय *विकास* पर ध्यान देने की बजाय सब अपने आपको स्थापित करने में लग गये । कैसे ,? अब यह प्रश्न. होना लाजमी है । 👎 *सांसद* हो गये विधायक, 👎 *विधायक* हो गये नगरपालिका अध्यक्ष,. * 👎** *नगरपालिका* *अध्यक्ष*, ह़ो गये नगरपालिका उपाध्यक्ष । अब ऐसे मे विकास कही खो गया । 😦😦😦👆 उपाय - यदि हम *क्षेत्र* का *सर्वांगीण* *विकास* चाहते है , तो फिर वही * *विकास* हमे श्री *निलय* **विनोद*डागा* करके दिखायेंगे । जो इस. काम के लिए *सक्षम* है, *युवा* है,*प्रखर है,. *काबिल* है , *जानकर*है, *भरोसेमंद* है और इस *वक्त* सबसे उपयुक्त *उम्मीदवार* है जो *बैतूल* को नयी *पहचान* देने को *और योजनाबध्द तरीके से विकास लाने को कटिबद्ध* हैं। तो फिर सोचना क्या *मौका* भी है,*दस्तूर* भी.हैं । अब इस बार श्री *निलय* **विनोद* *डागा* क़ो ही क्षेत्र की *बागडोर* *सौपनी* है, यह हमें *दृढ* *निश्चय* से *फैसला* करना है। 🌹जय हिंद 🌹🙏🏻🌹🙏🏻🌹
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12 महीने पहले
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मैं इस पोस्ट का विरोध करता हूँ, क्योंकि ये पोस्ट...
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