Saudi Aramco (सऊदी अरामको): ₹36 लाख करोड़
विश्व की सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी ExxonMobil (एक्सोन मोबिल): ₹27 लाख करोड़
अमेरिका की सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी Gazprom (गज़परोम): ₹12 लाख करोड़
रुस की सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी National Iranian Oil Company (नेशनल ईरान ऑयल कंपनी): ₹9 लाख करोड़
ईरान की सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी ये इन चार संस्थानों की एक साल की कमाई है: ₹84 लाख करोड़
लेकिन हम इनकी क्यों बात कर रहे हैं? क्योंकि सिर्फ़ ये 4 कंपनियाँ प्रतिवर्ष
मानवता के कुल कार्बन उत्सर्जन के
एक-चौथाई (25%) हिस्से के लिए ज़िम्मेदार हैं। कहना ग़लत नहीं होगा कि साल-दर-साल
यही और इनके जैसी अन्य कंपनियाँ दुनिया को तेज़ी से
महाविनाश की ओर धकेल रहे हैं। लेकिन ये कंपनियाँ रुकने को तैयार नहीं हैं! प्रतिवर्ष इनकी कमाई बढ़ रही है,
प्रतिवर्ष मानवता का कुल कार्बन उत्सर्जन भी बढ़ रहा है। और इसलिए आज हमारी ये हालत है कि
यूनाइटेड नेशंस के प्रमुख कहते हैं कि पृथ्वी पर
मानवता को बचाने के लिए सिर्फ़ 2 साल बचे हैं। पर ये कंपनियाँ इतने पैसों का करती क्या हैं?
अपने पैसे के भंडार से ये 3 सत्ताओं को अपनी मुट्ठी में रखते हैं: 1. शैक्षणिक समुदाय (Academia): ये कंपनियाँ फ़र्ज़ी रिसर्च के लिए पैसा खर्चती हैं। फ़र्ज़ी रिसर्च से ये साबित करवा देती हैं कि क्लाइमेट चेंज ज़्यादा घातक नहीं है। 2. मीडिया: ये मीडिया को ख़रीद लेते हैं, और भ्रामक प्रचार करवाते हैं। लोगों को मूर्ख बनाकर जताते हैं कि क्लाइमेट चेंज का समाधान AC कम चलाने से या, या इलेक्ट्रिक कार, या रीसाइलिंग से हो जाएगा। 3. राजनीति: अपने पैसे से वे उन राजनैतिक दलों को व ऐसे नेताओं को ख़रीद लेते हैं। ताकि सरकार इन कंपनियों के फ़ायदे के लिए नीतियाँ बनाए। और देश के प्राकृतिक संसाधन कौड़ियों के दाम में उन्हें बेच दे। ₹84 लाख करोड़ का ख़ज़ाना है भाई!
ये लोग जो चाहे वो ख़रीद सकते हैं। जो क्लाइमेट चेंज के सबसे बड़े अपराधी हैं
वो इतने अमीर हैं कि उन्होंने सब कुछ ख़रीद लिया है। पैसा बड़ी चीज़ है
और दुर्भाग्य से आज सारा पैसा उनके पास है
जो पृथ्वी को बर्बाद कर रहे हैं। ➖➖➖➖ जब आचार्य जी और आपकी संस्था
क्लाइमेट चेंज की भयावहता और
पृथ्वी पर हो रहे महाविनाश की असलियत
आप तक लेकर आते हैं
तो वे इतने विशाल तंत्र की जड़ें हिला रहे हैं! पर क्या इस विशाल तंत्र से लड़ने हेतु
आपकी संस्था के पास पर्याप्त संसाधन हैं? बिलकुल नहीं!
क्योंकि हमें आने वाला आर्थिक सहयोग
इनकी सालाना कमाई का एक-लाखवाँ हिस्सा भी नहीं है। लेकिन फिर भी हम तो जो कर रहे हैं वो करते रहेंगे। आचार्य प्रशांत संघर्षरत हैं,
आपके लिए। स्वधर्म निभाएँ:
https://acharyaprashant.org/hi/contribute/contribute-work?cmId=m00072
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